31 दिसंबर, 2010

आल इंडिया एडवोकेट्स क्रिकेट ने रचा इतिहास

  22वें आल इंडिया क्रिकेट टूर्नामेंट के यादगार लम्हे 
फोटो : दिनेश यदु-नेशनल  लुक
छत्तीसगढ़ एडवोकेट्स क्रिकेट एसोसिएशन की मेजबानी में आयोजित 22वें आल इंडिया क्रिकेट टूर्नामेंट के यादगार लम्हे फोटो फीचर के माध्यम से सहेजे गए हैं। 




































30 दिसंबर, 2010

स्पोर्ट्स फोटोग्राफी

खेल की अनोखी झलकियां. . .
स्पोर्ट्स फोटोग्राफी खेल पत्रकारिता में काफी मायने रखती है. स्पोर्ट्स फोटोग्राफी काफी कठिन भी है. आइये हमारे नेशनल लुक के फोटोग्राफर दिनेश यदु के कुछ चुनिन्दा चित्रों पर नज़र डालते हैं.

 
राजधानी के साईंस मैदान में आयोजित नेशनल मोटर स्पोर्ट्स प्रतियोगिता का दृश्य.

 
रग्बी फूत्बल्ल का अभ्यास करती स्चूली छात्राएं.

 
रग्बी के रोमांचक पल का एक दृश्य.


 
रविवि ग्राउंड में खेली गई अंतर विवि. महिला वालीबाल प्रतियोगिता का दृश्य.
 
राज्य महिला खेल प्रतियोगिता का एक दृश्य.


राज्य महिला प्रतियोगिता में महिला हाकी प्रतियोगिता का दृश्य


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 नेशनल गर्ल्स हैंडबाल से होगी नए साल की शुरुआत







तैयारियां प्रारंभ, बूढ़ापारा स्पोर्ट्स काम्पलेक्स में होंगे मुकाबले
छत्तीसगढ़ के खेल जगत के लिए नया साल राष्ट्रीय स्पर्धा की मेजबानी से शुरू हो रहा है। भारतीय हैंडबाल फेडरेशन ने 33वीं जूनियर नेशनल गर्ल्स हैंडबाल प्रतियोगिता की मेजबानी छत्तीसगढ़ को दी है और छत्तीसगढ़ हैंडबाल एसोसिएशन इस प्रतियोगिता का आयोजन राजधानी में 27 जनवरी से कर रहा है। 31 जनवरी तक आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता में देश के कई राज्यों की टीमें हिस्सा ले रही हैं। इस प्रतियोगिता के उद्घाटन और समापन समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह होंगे।
गत दिनों संसदीय सचिव विजय बघेल ने राज्य ओलंपिक संघ के सचिव बशीर अहमद खान के साथ मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह से भेटकर प्रतियोगिता की जानकारी। इस प्रतियोगिता में मेजबान छत्तीसगढ़ सहित 27 राज्यों के 486 खिलाड़ी, अधिकारी हिस्सा लेंगे। इस प्रतियोगिता के लिए आउटडोर स्टेडियम में तीन कोर्ट और इनडोर स्टेडियम में एक कोर्ट का निर्माण किया जाएगा। प्रतियोगिता में चार पूल बनाकर लीग कम नाकआउट आधार पर मुकाबले कराए जाएंगे। इस प्रतियोगिता का दूरदर्शन पर सीधा प्रसारण किया जाएगा। खिलाड़ियों के आवास की व्यवस्था आउटडोर स्टेडियम के कमरों में की जाएगी जबकि अधिकारियों के लिए राजधानी के होटलों में व्यवस्था की जाएगी। इस प्रतियोगिता के उद्घाटन के लिए हाल ही में छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गुरुचरण सिंह होरा ने मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह से अनुमति लेने सौजन्य भेट की। मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। वे इस प्रतियोगिता का उद्घाटन करेंगे।

जीत गया खेल जज्बा

  1. अभावों के बाद भी अंजनी पहुंची कामनवेल्थ गेम्स तक



ईश्वर ने भले ही एक पैर छीन लिया हो लेकिन उसने साबित कर दिया कि खेल जज्बा हो तो दो पैरों वाले सही-सलामत लोगों को भी पीछे छोड़कर अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है। बात मूलत: जांजगीर की अंजनी पटेल की है जो कामनवेल्थ गेम्स दिल्ली में शिरकत करने के बाद शुक्रवार (15-10-2010)  को राजधानी पहुंची। हालांकि राजधानी में उसके स्वागत के लिए कोई विशेष इंतजाम नहीं थे, बल्कि पत्रकारों के आमंत्रण पर अंजनी यहां आउटडोर स्टेडियम में पायका के समापन समारोह में पहुंची।
अंजनी ने पत्रकारो से चर्चा करते हुए कहा कि उसका मकसद राज्य  के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक हासिल करना है। अंजनी ने कामनवेल्थ गेम्स में पिछड़ने के कई कारण बताए और इनमें से एक मूल वजह थी सुविधाओं का अभाव। अंजनी को छत्तीसगढ़ विकलांक तैराकी संघ ने तराशा और यहां तक पहुंचाया लेकिन इस संघ को खेल विभाग से मान्यता ही नहीं है। इस वजह से संघ अपने सीमीत दायरे में व्यवस्था कर पाता है। अंजनी ने कहा कि उसके जैसे कई और विकलांग खिलाड़ी इस राज्य में है और जरूरत है उन्हें आगे बढ़ाने की। अंजनी ने 2007 में उत्तरप्रदेश विकलांग तैराकी संघ की मेजबानी में इलाहाबाद की यमुना नदी में आयोजित प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। वे दूसरे स्थान पर थीं। अंजनी ने बताया कि कामनवेल्थ गेम्स में उसका काफी अच्छा अनु•ाव मिला और उसे काफी अंतर भी समझ में आया। विदेशी खिलाड़ी एक-दो घंटे तो सिर्फ वार्मअप करते हैं और हम उतना अ•यास करते हैं। हमें भी बेहतर सुविधाएं मिलें तो हम काफी आगे बढ़ सकते हैं। कामनवेल्थ गेम्स की 50 मीटर फ्रीस्टाइल तैराकी में अंजनी ने 00.46.64 का समय निकाला जबकि 100 मीटर फ्रीस्टाइल तैराकी में अंजनी ने 01.45.25 का समय निकाला। उन्होंने फाइनल में पात्रता हासिल कर शीर्ष आठवां स्थान हासिल किया। अंजनी के परिवार में पांच बहनें हैं और उसके पिता शत्रुघन पटेल वाहन चालक का काम कर परिवार चलाते हैं। घर की आर्थिक स्थिति  ठीक नहीं है। ऐसे में अंजनी ने कामनवेल्थ गेम्स में राज्य का प्रतिनिधित्व कर यह साबित कर दिखाया कि वह हारकर भी  अपने खेल जज्बे को जिता ही गईं। अंजनी ने बताया कि जांजगीर में करीब 60 से 65 विकलांग ऐसे हैं जो तैराकी करते हैं और जरूरत उन्हें  आगे बढ़ाने की है। अंजनी हालांकि बचपन से तैराकी कर रही हैं लेकिन उन्हें 2005 में ही पता चला कि विकलांगों की भी तैराकी होती है। अंजनी ने कहा कि उसे आने वाले एशियाड की तैयारी करनी है और इसके लिए वह हरसंभव प्रयास करेंगी कि उनका चयन भारतीय टीम में कर लिया जाए। शासकीय बिलासा कन्या विद्यालय बिलासपुर की बीए प्रथम वर्ष की छात्रा अंजनी करीब 55 फीसदी विकलांग है। उसे पोलियो है और परिवार में उनकी माता भी विकलांग है।



एक नजर..
0. 2007 में राष्ट्रीय तैराकी प्रतियोगिता इलाहाबाद में एक किलोमीटर की तैराकी स्पर्धा में रजत पदक।
0. 2007 में आठवीं राष्ट्री तैराकी प्रतियोगिता पुणे (महाराष्ट्र) में दो स्वर्ण पदक और एक रजत पदक।
0. 2008 में 9वी ंराष्ट्रीय पैरालिंपिक तैराकी प्रतियोगिता करनाला (हरियाणा) में एक स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक।
0. 2008 में बेंगलूर के इंडिया कैंप में चयन। एक माह तक प्रशिक्षण।
0. 2009 में ग्वालियर के 45 दिवसीय इंडिया कैंप के लिए चयन।
0. 2009 के बेंगलूर के इंडिया कैंप के लिए चयन।
 हौसले बुलंद हों तो सपने भी सच होते हैं
सिर्फ तीन साल पहले की ही तो बात है, जब असम के 33वें नेशनल गेम्स में छत्तीसगढ़ के खेल जगत ने सपना देखा था नेशनल गेम्स की मेजबानी का। छत्तीसगढ़ ने कई खेलों में पात्रता हासिल कर असम नेशनल गेम्स में हिस्सा लिया था। तब असम की खेल अधोसंरचनाओं ने सभी को अचंभजीत कर दिया था। भले उनके पास बेहतर खिलाड़ी न रहे हों लेकिन खेल की बुनियादी सुविधाएं देखकर सभी की आंखें फटी रह गई थीं। यह नेशनल गेम्स की मेजबानी लेने का ही चमत्कार था जिसने असम को पूरे देश में ख्याति दिला दी थी। पूरा असम खेलों की दीवानगी में डूब गया था। हर शख्स नेशनल गेम्स के खेलों को देखने बेताब रहता था। एक आम रिक्शा चालक ही क्यों न हो, कई किलोमीटर लंबी कतारें लगती थीं दर्शकों की। वह असम जहां उलफा ने अशांति फैला रखी थी, एकदम शांत हो गया था और एक आम असमिया भी देर रात तक मुकाबले देखने में व्यस्त रहता था। जाहिर है खेल से अपराध कम होते हैं फिर चाहे वर्ल्ड कप क्रिकेट का मामला हो या नेशनल गेम्स का, क्राइम रिपोर्ट सामान्य दिनों की अपेक्षा (सट्टेबाजी को छोड़कर) नील ही रहती है। यह असम के राष्ट्रीय खेलों ने साबित कर दिखाया था। वह असम जो राष्ट्रीय स्तर की खेल स्पर्धाओं में कभी ज्यादा पदक हासिल नहीं कर पाता था,  लेकिन 33वें नेशनल गेम्स का मेजबान बना तो उसने 38 स्वर्ण, 53 रजत और 57 कांस्य  पदक हासिल कर पदक तालिका में तीसरा स्थान बना लिया। असम के खेल इतिहास में यह सबसे बड़ी उपलब्धि थी। असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई का उस समय बयान था- नेशनल गेम्स के आयोजन से असम में खेल अधोसंरचना का जो विकास हुआ है उसका फायदा आने वाले कई सालों तक हमें पीढ़ी-दर-पीढ़ी मिलता रहेगा और इसमें कोई दो मत नहीं है कि खेल शांति का सबसे बेहतर माध्यम है। उस समय असम में मौजूद छत्तीसगढ़ का हर खिलाड़ी और छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के पदाधिकारियों का भी सपना था कि ऐसे ही दृश्य एक दिन छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिलेंगे। हां, यह सपना इतनी जल्दी पूरा होने की राह पर होगा, यह किसी ने नहीं सोचा था। छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण को सिर्फ नौ साल ही हुए हैं और यह दसवां साल चल रहा है। हमारी उम्र कम है लेकिन हौसले इतने बुलंद हैं कि कोई भी करिश्मा असंभव नहीं। यही करिश्मा छत्तीसगढ़ सरकार ने 37वें नेशनल गेम्स की मेजबानी लेकर कर दिखाया है। प्रदेश के खेल जगत ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह और खेल मंत्री लता उसेंडी को दिया है। खेल मंत्री लता उसेंडी कभी जगदलपरु के मैदान में कार्क बॉल से क्रिकेट खेला करती थीं। आज भी उन्हें कार्क बाल से ही खेलना पसंद है न कि टेनिस बाल क्रिकेट से। जाहिर है उनका मनोबल मजबूत है। कभी उन्होंने भी सोचा नहीं था कि वे राज्य के लिए नेशनल गेम्स की मेजबानी का आधार बनेंगी। वे भी काफी खुश हैं। कहती हैं कि नेक इरादे के साथ कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती हैं और राज्य के खेल जगत के लिए इस ऐतिहासिक दिन की उपलब्धि तभी  मानी जाएगी जब नेशनल गेम्स का सफल आयोजन हम करके दिखाएंगे।  नि:संदेह उनके बुलंद हौसलों ने राज्य के खेल जगत का नेशनल गेम्स की मेजबानी हासिल करने का सपना भी पूरा कर दिखाया। मेजबानी पर अरमानों के पंख तो उस दिन ही लग गए थे जब छत्तीसगढ़ सरकार ने नेशनल गेम्स की दावेदारी के लिए विधिवत आवेदन के साथ भारतीय ओलंपिक संघ को 50 लाख रुपए दिए। पिछले साल अक्टूबर माह में दिल्ली में हुई भारतीय ओलंपिक संघ की कार्यकारिणी और आमसभा  की बैठक में छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ ने जिस दावेदारी के साथ मेजबानी हासिल की, वह काबिले तारीफ थी। छत्तीसगढ़ ने दावेदारी जीतकर दिखा दी। क्योंकि हौसले बुलंद और इसलिए भी कि छत्तीसगढ़ सरकार राज्य ओलंपिक संघ के साथ थी। सरकार ने मेजबानी के लिए दो करोड़ रुपयों के प्रस्ताव पर भी मुहर लगा दी। सारे रास्ते एक के बाद एक बनते चले गए। स्वयं भारतीय ओलंपिक संघ के आजीवन अध्यक्ष विद्याचरण शुक्ल ने भारतीय ओलंपिक संघ के पदाधिकारियों से दिल्ली में चर्चा की और मेजबानी के लिए दबाव भी बनाया। फिर भला भारतीय ओलंपिक संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विजय मल्होत्रा के सहयोग को भी विस्मृत नहीं किया जा सकता। ऐसा नहीं है कि छत्तीसगढ़ का विपक्ष साथ नहीं है। होस्ट सिटी कांट्रेक्ट पर हस्ताक्षर के बाद पूरे देश की मीडिया के सामने सात मिनट की वीडियो क्लीपिंग भी दिखाई गई। इस क्लीपिंग में छत्तीसगढ़ में राज्य निर्माण के बाद हुए विकास कार्यों के अलावा राज्य के सत्ता पक्ष और विपक्ष के बयान  हैं जिसमें उन्होंने छत्तीसगढ़ को नेशनल गेम्स का मेजबान बनाने की बातें कही हैं और सभी को इस आयोजन को साथ मिलकर सफल बनाने का आव्हान किया है। इसी एकता  की जररूत हमें नेशनल गेम्स के पहले अधोसंरचना के विकास के लिए  पड़ेगी। जिससे हमारे बुलंद हौसलों पर कोई आंच न आने पाए। खेल विशेषज्ञ कहते हैं कि बिना सरकार के सहयोग के नेशनल गेम्स का आयोजन किसी भी राज्य के ओलंपिक संघ के लिए संभव नहीं है। राज्य के खेल जगत की किस्तम बेहतर है कि सरकार खेलों को तवज्जो दे रही है, वरन दूसरे राज्यों में खिलाड़ियों को किसी राष्ट्रीय स्पर्धा में हिस्सा लेने के लिए भी अपनी जेब ढीली करनी पड़ती है। खैर, हम लौटते हैं नेशनल   गेम्स की तरफ जिसके आयोजन से राज्य की तस्वीर बदल जाएगी। खासतौर पर होस्ट सिटी छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की। जैसा कि भारतीय ओलंपिक संघ के आजीवन अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी होस्ट सिटी कांट्रेक्ट पर हस्ताक्षर करने के बाद कहते हैं कि कॉमनवेल्थ गेम्स से जिस तरह दिल्ली की तस्वीर बदली है उसी तरह रायपुर की तस्वीर भी बदल जाएगी। जाहिर है राजधानी में कई खेलों के राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के स्टेडियम बन जाएंगे। इतना ही नहीं शहर की कई और बुनियादी सुविधाओं में इजाफा् होगा। लेकिन राज्य के कुछ दूसरे जिलों को भी मेजबानी का मौका देना होगा जिससे प्रदेश के दूरस्थ इलाकों में भी खेल की सुविधाओं का विस्तार हो सके। लेकिन यह तभी  सभव हो पाएगा जब हम एक घंटे की तय सीमा को पूरा कर पाएंगे। नेशनल गेम्स के खेलों का आयोजन उन स्थानों में कराया जाना संभावित है, जहां मुख्य आयोजन स्थल से एक घंटे की समयावधि में पहुंचा जा सकता है। जाहिर है हमें दूरस्थ इलाकों के विकास के लिए हैलीकाप्टर से खिलाड़ियों को पहुंचाना पड़ेगा और कोई चारा नहीं। लेकिन इसके लिए  चाहिए बुलंद हौसले जिससे यह सपना भी पूरा किया जा सके।
विशेष लेख-कमलेश गोगिया ( खेल पत्रकार- नेशनल लुक )

29 दिसंबर, 2010

छत्तीसगढ़ का खेल जगत - २०१०




छत्तीसगढ़ में खेल गतिविधियों और खेल प्रतिभाओं के लिए उत्साहजनक वातावरण के निर्माण में कैलेण्डर वर्ष २०१० कई सुखद स्मृतियां छोड़कर जा रहा है। राज्य स्थापना के दस वर्ष पूर्ण होने और ग्यारहवें साल में प्रवेश के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की घोषणा के अनुरूप नवम्बर माह में छत्तीसगढ़ के सभी विकासखंड मुख्यालयों में ब्लाक स्तर पर और जिला मुख्यालयों में जिला स्तर पर खेल महोत्सवों में विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। ब्लाक स्तरीय इन प्रतियोगिताओं में लगभग पचास हजार खिलाड़ियों को अपने खेल कौशल के प्रदर्शन का मौका मिला। इनमें से लगभग ३६ हजार खिलाड़ियों का चयन कर उन्हें जिला स्तरीय खेल महोत्सवों में शामिल होने का अवसर दिया गया। इनमें से चयनित करीब साढ़े चार हजार खिलाड़ी राजधानी रायपुर में ११ दिसम्बर से १३ दिसम्बर तक तीन दिवसीय राज्य स्तरीय खेल महोत्सव में शामिल हुए। लगभग एक माह की अल्प अवधि में पचास हजार खिलाड़ियों के खेल प्रदर्शन का छत्तीसगढ़ में यह एक नया कीर्तिमान रहा। विकासखंड, जिला और राज्य स्तरीय महोत्सव में कबड्डी, फुटबॉल, हॉकी, व्हालीबॉल, खो-खो आदि विभिन्न प्रकार के १८ खेलों की प्रतियोगिताएं हुई। प्रदेश के खेल जगत में ये सभी प्रतियोगिताएं खिलाड़ियों के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों के लिए यादगार बन गयी। प्रदेश में निवर्तमान वर्ष २०१० में खेल और युवा कल्याण विभाग की माहवार और तारीख वार प्रमुख गतिविधियों की एक झलक यहां प्रस्तुत है -



३ जनवरी :- जिला मुख्यालय कोरबा में तीन दिवसीय राज्य स्तरीय सब जूनियर खो-खो प्रतियोगिता का शुभारंभ हुआ, जिसमें २६४ खिलाड़ियों ने भाग लिया।
 ८ जनवरी :-उड़ीसा के भुवनेश्वर में पांच दिवसीय राष्ट्रीय युवा उत्सव का शुभारंभ हुआ, जिसमें छत्तीसगढ़ के कलाकारों ने तीन स्वर्ण एवं एक रजत पदक हासिल किया। राजधानी रायपुर में दो दिवसीय ५७ वीं राष्ट्रीय सीनियर कबड्डी चैम्पियनशिप आयोजित की गयी।
१२ जनवरी :-राष्ट्रीय युवा दिवस को दुर्ग में राज्य स्तरीय मैराथन दौड़ का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश के ६९५ धावकों ने हिस्सा लिया।
२५ जनवरी :-महाराष्ट्र के औरंगाबाद में प्रारंभ पांच दिवसीय राष्ट्रीय अंतरशालेय टूर्नामेंट में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने एक स्वर्ण, चार रजत और नौ कांस्य पदक सहित कुल १४ पदक हासिल किए।
३१ जनवरी :-छत्तीसगढ़ के वेटलिफ्टर श्री रूस्तम सारंग ने ढाका(बांग्लादेश) में आयोजित सैफ गैम्स के अंतर्गत आयोजित वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में रजत पदक हासिल किया।
५ फरवरी :-खेल एवं युवा कल्याण मंत्री सुश्री लता उसेंडी ने यहां रायपुर में माधव राव सप्रे स्कूल में छत्तीसगढ़ खेल मड़ई का शुभारंभ किया। इस खेल प्रतियोगिता के अंतर्गत गेड़ी, पिट्टुल जैसे ग्रामीण खेलों का आयोजन किया गया। '
२० फरवरी :-आदिवासी बहुल बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर में जिला प्रशासन के सहयोग से जिला ओलम्पिक संघ कुश्ती संघ और स्टेडियम कमेटी द्वारा आयोजित दो दिवसीय एशियाई कुश्ती महादंगल का शुभारंभ।
१८ मार्च :-     मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ विधानसभा परिसर के समिति कक्ष में राष्ट्रीय खेलों के आयोजन एवं तैयारियों की प्रारंभिक और महत्वपूर्ण बैठक ली। बैठक में उन्होंने राज्य में पहली बार २०१२-१३ में होने वाले राष्ट्रीय खेलों के भव्य, व्यवस्थित और सफल आयोजन के लिए व्यापक प्रबंध करने पर जोर दिया।
३० मार्च :-छत्तीसगढ़ में ३७वें राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के लिए नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ सदन में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की उपस्थिति में 'मेजबान शहर अनुबंध' पर हस्ताक्षर किए गए। इस अनुबंध के अनुसार २०१२-१३ के राष्ट्रीय खेल छत्तीसगढ़ में आयोजित किए जाएंगे।
९ मई :-खेल एवं युवा कल्याण मंत्री सुश्री लता उसेंडी की अध्यक्षता में राजधानी रायपुर में ३७वें राष्ट्रीय खेलों और राष्ट्रमंडलीय खेलों की क्वीन्स बैटन रिले के आगमन की तैयारियों के संबंध में संकल्प संगोष्ठी का आयोजन किया गया।



२२ जुलाई :-मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को छत्तीसगढ़ ओलम्पिक संघ का अध्यक्ष मनोनीत किया गया।
१० अगस्त :- राष्ट्रमण्डलीय खेलों का इतिहास ,उपलब्धयो  और सदस्य देशों के बीच आपसी सद्भावना का संदेश लेकर कामनवेल्थ एक्सप्रेस राजधानी रायपुर पहुंची।
१२ अगस्त :-मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ में राष्ट्रमंडलीय खेलों के क्वीन्स बैटन रिले के प्रदेश दौरे का राजधानी रायपुर से शुभारंभ किया।
१८ अगस्त :-मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ ओलम्पिक संघ की साधारण सभा की प्रथम बैठक में घोषणा की कि राष्ट्रमंडलीय खेलों में स्वर्ण पदक हासिल करने पर आठ लाख रूपए, रजत पदक जीतने पर छह लाख रूपए और कांस्य पदक जीतने पर चार लाख रूपए का पुरस्कार खिलाड़ियों को छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से दिया जाएगा। इसी अवसर पर उन्होंने राज्योत्सव २०१० में छत्तीसगढ़ मिनी ओलम्पिक के आयोजन की भी घोषणा की थी, जिसे बाद में छत्तीसगढ़ खेल महोत्सव का नाम दिया गया। १८ अगस्त :- जिला मुख्यालय कबीरधाम (कवर्धा) में शुभारंभ पांच दिवसीय 'दसवीं राज्य स्तरीय जूनियर बैंटमिंटन प्रतियोगिता' का शुभारंभ, जिसमें राज्य के लगभग १५४ खिलाड़ियों ने भाग लिया।
 २९ अगस्त :- मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती पर राजधानी रायपुर में खेल और युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित समारोह में छत्तीसगढ़ के ३५५ सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को वर्ष २००९-१० के राज्य स्तरीय खेल अलंकरणों सहित विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया।
९ नवम्बर :-स्कूल शिक्षा मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल के मुख्य आतिथ्य में नवीन विश्राम भवन रायपुर में 'पंचायत युवा क्रीड़ा एवं खेल अभियान' (पायका) पर राज्य स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन।
११ नवम्बर :- खेल एवं युवा कल्याण मंत्री सुश्री लता उसेंडी की अध्यक्षता में मंत्रालय में पायका (पंचायत युवा क्रीड़ा एवं खेल अभियान) की राज्य स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गयी।
१ दिसम्बर :-खेल मंत्री सुश्री लता उसेंण्डी ने राजधानी रायपुर के नजदीक ग्राम परसदा स्थित अंतराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बी.सी.सी.आई.) की प्रदेश इकाई छत्तीसगढ़ राज्य क्रिकेट संघ द्वारा आयोजित एसोसिएट मेम्बर्स टूर्नामेन्ट के उद्धाटन मैच का शुभारंभ किया। इस टूर्नामेन्ट में देश के सात राज्यों -मेघालय, छत्तीसगढ़, अरूणालच प्रदेश, मणिपुर, बिहार, सिक्किम और नागालैण्ड ने भाग लिया।'
६ दिसम्बर :-जिला मुख्यालय राजनांदगांव में आयोजित ३६वें राष्ट्रीय महिला खेल के अंतर्गत छत्तीसगढ़ की महिला बास्केटबॉल टीम ने स्वर्ण पदक हासिल किया।
७ दिसम्बर :- छत्तीसगढ़ राज्य शासकीय सेवा में उत्कृष्ट खिलाड़ी भर्ती नियम-२०१० जारी।
१० दिसम्बर :- मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से ३६वें राष्ट्रीय महिला खेलों में स्वर्ण पदक विजेता बनी छत्तीसगढ़ महिला बास्केटबॉल टीम ने रायपुर में की मुलाकात। मुख्यमंत्री ने दी बधाई।
 ११ दिसम्बर :- मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने रायपुर में आयोजित तीन दिवसीय राज्य स्तरीय खेल महोत्सव का शुभारंभ किया। इस खेल महोत्सव में प्रदेश भर के लगभग साढ़े चार हजार खिलाड़ियों ने भाग लिया।

एडवोकेट्स क्रिकेट ट्राफी इलाहाबाद की झोली में

एडवोकेट्स क्रिकेट ट्राफी इलाहाबाद की झोली में
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम छत्तीसगढ़ की गौरवपूर्ण उपलब्धि : शेखर दत्त

रायपुर.(२९ जनवरी, २०१०, बुधवार).   छत्तीसगढ़ एडवोकेट्स क्रिकेट एसोसिएशन की मेजबानी में आयोजित 22वीं आल इंडिया एडवोकेट्स क्रिकेट प्रतियोगिाता का खिताब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जीत लिया। इलाहाबाद ने इंदौर फाइनल मुकाबले में सात विकेट से पराजित किया। राज्यपाल शेखर दत्त ने विजेता-उपविजेता ट्राफी देते हुए राजधानी के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम को छत्तीसगढ़ की गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया।
इंदौर और इलाहाबाद के बीच फाइनल मुकाबला और समापन समारोह यहां परसदा स्थित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित किया गया। इंदौर ने टास जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 11. 4 ओवर में अपने सभी  विकेट 82 रन के स्करो पर खो दिए। रजनीश पांचाल ने 19 और राकेश पालीवाल ने 10 रन बनाए। इलाहाबाद के राजेश शर्मा ने चार विकेट हासिल किए। जवाबी पारी में इलाहाबाद ने मैन आफ द मैच नासिर अली के 48 रन की बदौलत 16.1 ओवर में विजय लक्ष्य हासिल कर सात विकेट से जीत दर्ज की। प्रतियोगिता के समापन समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल शेखर दत्त ने विजेता-उपविजेता टीमों और खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया। इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ एडवोकेट्स क्रिकेट एसोसिएशन को बधाई देते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम को राज्य की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना और इसके लिए मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह, शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल और खेल मंत्री लता उसेंडी के प्रयासों को सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि क्रिकेट स्टेडियम छत्तीसगढ़ की काफी अहम धरोहर है और इसका बेहतर उपयोग हो सकता है। उन्होंने श्रीलंका टीम की मौजूदगी को भी महत्वपूर्ण बताया और उम्मीद जताई की श्रीलंका लायर्स के खिलाड़ी श्रीलंका जाकर यहां की संस्कृति से लोगों को अवगत कराएंगे और छत्तीसगढ़ आने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। समारोह में लोक निर्माण और शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि आने वाले दिनों में यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के मैच हो सकेंगे इसकी उन्हें पूरी उम्मीद  है। श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में काफी प्रतिभाएं हैं, उन्हें आगे लाने की जररूत है। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के बाद यहां सबसे बड़ा पहला निर्माण अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का हुआ और दूसरा निर्माण बिलासपुर हाईकोर्ट का हुआ है। इसके पूर्व छत्तीसगढ़ क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष फैसल रिजवी ने स्वागत भाषण दिया। समारोह को आल इंडिया एडवोकेट्स क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष आर संथानन कृष्णनन, जस्टिस धीरज मिश्रा, एडवोकेट्स जनरल देवराज सुराना ने भी  संबोधित किया। इस दौरान जस्टिस सुभाषचंद्र मिश्रा, महापौर किरणमयी नायक, वीके मुंशी, बार काउंसिल आफ छत्तीसगढ़ के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे, इकबाल अहमद रिजवी,भूपेंद्र जैन सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ता और खिलाड़ी मौजूद थे। इस दौरान रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया जिसमें स्कूली बच्चों ने देश की एकता पर केंद्रीत नृत्य प्रस्तुत किया।


अधिवक्ताओं को कई पुरस्कार
समापन समारोह में अधिवक्ताओं और खिलाड़ियों को कई पुरस्कार राज्यपाल शेखर दत्त के द्वारा दिए गए। आल इंडिया एडवोकेट्स क्रिकेट एसोसएशन के अध्यक्ष आर संथानन कृष्णनन को लाइफ टाइम अचीवमेंट का पुरस्कार दिया गया। श्रीलंका लायर्स टीम के सभी खिलाड़ियों को मेमोरियल आफ छत्तीसगढ़ ट्राफी दी गई। रायपुर अधिवक्ता क्रिकेट की 1980 में बुनियाद रखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ताओं को बुनियाद ट्राफी दी गई। इस प्रतियोगिता में सेमीफाइन ट्राफी उड़ीसा और सुप्रीम कोर्ट को दी गई। मैच के मेन आफ द मैच की ट्राफी इलाहाबाद के नासिर अली को दी गई। बेस्ट बालर की ट्राफी इलाहाबाद के संतोष (15 विकेट) को दी गई। कैचेस अवार्ड श्रीलंका के पी सिल्वा को दिया  गया। बेस्ट बल्लेबाज की ट्राफी नासिर अली (33 रन) को दी गई। मैन आफ द सीरीज इंदौर के राकेश पालिवार घोषित किए गए और उन्हें हीरो होंडा प्रदान की गई।