28 दिसंबर, 2010

खेलों के विकास का दशक

10वां साल तो और भी  लकी...
 छत्तीसगढ़ निर्माण को दस साल देखते ही देखते बीत गए और इन दस सालों में प्रदेश के खेल जगत ने भी उन ऊचाइयों को स्पर्श किया है जिसकी कल्पना कभी  अविभाजित मध्यप्रदेश में नहीं की गई थी। दस साल पहले तक मुट्ठीभर नेशनल पदक और अंतरराष्ट्रीय खेल स्पर्धाओं में शिरकत करने का सपना हमारे पास था। लेकिन राज्य निर्माण के बाद छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में जो परचम लहराया वह न सिर्फ काबिले तारीफ है बल्कि हैरत में डालने वाला भी है। दस साल पहले तक तो हम सोच भी  नहीं सकते थे कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी कभी  कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाड तक पहुंचकर इस राज्य और इस देश का प्रतिनिधित्व कर सकेंगे। कुछ नकारात्मक पहलुओं को छोड़कर यदि सकारात्मक बात की जाए तो सच्चाई यही है कि इन दस सालों में हमने कई इतिहास रचे हैं और कई नए खेल अध्याय भी लिखे हैं। मजेदार बात तो यह भी है कि छत्तीसगढ़ के खेल जगत के लिए दसवां साल सबसे ज्यादा लकी रहा क्योंकि इस साल की हासिल उपलब्धियों ने पिछले नौ साल के रिकार्ड तोड़ दिए। हालांकि कई उपलब्धियां राज्य के खाते में हैं लेकिन कुछ महत्वपूर्ण उपलब्धियां ऐसी हैं जो कभी विस्मृत नहीं की जा सकतीं। इन्हीं महत्वपूर्ण उपलब्धियों पर यहां प्रकाश डाला जा रहा है।  आने वाला साल 2011 राज्य के खेल जगत के लिए और भी अहम और विकास का साल होगा। इन्हीं उम्मीदों के साथ छत्तीसगढ़ के खेल विकास पर  विशेष पेशकश...




1. एक दशक में मिला नेशनल गेम्स का तोहफा
राज्य निर्माण के बाद पहली  बार छत्तीसगढ़ को टोकन सिस्टम से नेशनल गेम्स में हिस्सा लेने का मौका मिला था। तब हम सोचा करते थे कि छत्तीसगढ़ में कब नेशनल गेम्स होंगे जिससे खेल की बुनियादी अधोसंरचनाओं का विकास हो सके। यह सपना दसवें साल पूरा हुआ। राज्य निर्माण के पहले तक अविभाजित मध्यप्रदेश में भी  कभी  इस बात की कल्पना नहीं की गई थी कि छत्तीसगढ़ को नेशनल गेम्स की मेजबानी का सुनहरा मौका मिल सकेगा। लेकिन राज्य निर्माण के दसवें साल यह सपना पूरा हो गया। छत्तीसगढ़ को इसी साल 30 मार्च 2010 को होस्ट सिटी कान्ट्रेक्ट पर त्रिपक्षीय हस्ताक्षर के साथ ही 37वें नेशनल गेम्स की मेजबानी विधिवत मिली। राज्य सरकार ने सहर्ष मेजबानी के लिए भारतीय ओलंपिक संघ को ढाई करोड़ रुपए दिए। होस्ट सिटी कांन्ट्रेक्ट पर हस्ताक्षर होते ही छत्तीसगढ़ का नाम भी  नेशनल गेम्स के मेजबान राज्यों की सूची में दर्ज हो गया। राज्य में रायपुर, भीलाई और राजनांदगांव में नेशनल गेम्स होंगे और आने वाले कुछ वर्षों में यहां राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मापदंड के कई खेलों के स्टेडियम खड़े हो जाएंगे। नेशनल गेम्स की प्रारंभीक तैयारियों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने खेल विभाग  को पांच करोड़ रुपए भी प्रदान किए हैं। नेशनल गेम्स के संभावित खेलों में एथलेटिक्स, आरचरी, एक्वेटिक्स, बैडमिंटन, बास्केटबाल, बॉलिंग, बॉक्सिंग, सायकिलिंग, इक्वेस्टियन, फेंसिंग, फुटबाल, जिम्नास्टिक, हैंडबाल, हॉकी, जूडो, कबड्डी, खोखो, कराते, केनोइंग एंड क्याकिंग, नेटबाल, रोविंग, रग्बी सेवन ए साइड, सेपक तपरा, शूटिंग, स्क्वैश, टेबल टेनिस, ताइक्वांडो, टेनिस, ट्रायथलान, वॉलीबाल, वेटलिफ्टिंग, कुश्ती और वुशू शामिल हैं।




2. ओलंपिक संघ को लाखों की सौगात


राज्य निर्माण के बाद वैसे तो छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ का जन्म विवादों के साथ हुआ था। लेकिन समय के साथ-साथ विवादों का धुंध छंटता चला गया। दसवे साल कुछ विवाद हुए लेकिन पूरी बागडोर मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के हाथों आ गई। छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ का अध्यक्ष पद स्वीकार करने के बाद मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने विशेष खेल सुरक्षा निधि की स्थापना की जिसमें उन्होंने बाकायदा 50 लाख  रुपए भी  दिए। सीओए को पहली बार इतनी राशि दी गई है। इतना ही नहीं डा. रमन ने 2004 में ओलंपिक के स्वर्ण, रजत और  कांस्य पर क्रमश: दो करोड़, डेड़ करोड़ और एक करोड़ रुपयों की घोषणा के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए पहली बार लाखों रुपयों के नगद पुरस्कार की भी घोषणा की। साथ ही डा. रमन सिंह ने स्क्वैश एसोसिएशन का अध्यक्ष पद भी स्वीकार किया।


3. क्वींस बैटन की ऐतिहासिक यात्रा




देश के खेल इतिहास में पहली बार कामनवेल्थ गेम्स 2010 की मेजबानी की गई। घोटालों के विवादों को छोड़ दें तो छत्तीसगढ़ भी कॉमनवेल्थ गेम्स की महान परंपराओं का निवर्हन करते हुए क्वींस बैटन रिले का साक्षी बना। 11 अगस्त, बुधवार की शाम 7 बजकर 5 मिनट पर-क्वींस बेटन ने माना विमानतल पर दस्तक दी। 12 अगस्त को राजधानी में ऐतिहासिक क्वींस बैटन रिले का आयोजन किया गया। सात किलोमीटर का यह यादगार सफर कभी विस्मृत नहीं किया जा सकेगा। राजधानी रायपुर के बाद 13 अगस्त को दुर्ग, भीलाई और राजनांदगांव में क्वींस बैटन का ऐतिहासिक स्वागत किया गया। रिले को खेल जगत हमेशा याद रहेगा। पिछले दस सालों के खेल इतिहास में पहली बार राज्य का पूरा खेल जगत ही नहीं बल्कि पूरी सरकार और आम जनता भी सड़क पर उतर आई थी। सच पूछिए तो क्वींस बैटन रिले का एक सकारात्मक पहलू यह भी है कि रिले ने राज्य में खेलों के वातावरण को नया आयाम  दिया था। इसके साथ   ही बैटन का स्वागत कैसा होना चाहिए इसे पूरे देश को छत्तीसगढ़ और यहां की मीडिया ने बताया।


4. खिलाड़ियों के लिए खोला नौकरी का रास्ता


वैसे तो राज्य निर्माण के बाद से छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को उत्कृष्ट घोषित कर नौकरी देने की मांग की जाती रही थी। लेकिन वर्ष 2007 में छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को नौकरी सरकारी नौकरी देने की नीति बनाई गई। इस नीति पर तीन साल तक कागजी कार्रवाई होती रही। 2010 में ही राज्य के खिलाड़ियों को नौकरी देने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने सुर्कलर जारी कर दिया। इसके साथ ही इसी साल शहीद पंकज विक्रम पुरस्कार हासिल करने वाले खिलाड़ियों को  उत्कृष्ट घोषित करने के नियम बनाए गए। राज्य निर्माण के इन दस सालों में अब तक प्रदेश के  70 खिलाड़ियों को उत्कृष्ट घोषित किया गया है। यह साल छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों के लिए न केवल नौकरी की उम्मीदें जिंदा रखने वाला साल रहा बल्कि उन्हें जॉब सिक्यूरिटी देने वाला साल  रहा। हालांकि अभी  तक खिलाड़ियों को नौकरी नहीं मिली है जिसका वे काफी सालों से इंतजार कर रहे हैं।


5. खेल बजट की ऊंची छलांग


वर्ष 2001 की बात करें तो खेल के लिए मुट्ठीभर  बजट हुआ करता था। तब खेल विभाग का बजट सिर्फ एक करोड़ रुपए था। उसी में स्थापन्न व्यय और खेल संघों को अनुदान व खेल स्पर्धाओं का आयोजन शामिल था। दस साल में यह छह करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। इसके अलावा अन्य मदों से करोड़ों रुपए मिलने शुरू हो गए। इनमें अधोसंरचनाओं के विकास की योजनाएं भी शामिल हैं। इस साल के बजट में 37वें नेशनल गेम्स की प्रारंभिक  तैयारियों के  लिए पांच करोड़ रुपयों का प्रावधान किया गया तो राजनांदगांव हॉकी स्टेडियम में दो करोड़ रुपयों की लागत से एस्ट्रो टर्फ का निर्माण को हरी झंडी दिखाई गई। पत्थलगांव में स्टेडियम के निर्माण के साथ-साथ  पंचायत युवा क्रीड़ा और खेल अ•िायान योजना हेतु 17 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया।


6. इनडोर का पूरा होता सपना...




राजधानी को आउटडोर स्टेडियम की सौगात मिल गई है  जिसमें कई राज्य और राष्ट्रीय खेल स्पर्धाओं के आयोजन का दौर भी शुरू हो चुका है। अविभाजित मध्यप्रदेश से शुरू हुई इनडोर स्टेडियम की योजना इस साल अंतिम चरण में है। इनडोर स्टेडियम संभवत: फरवरी 2011 तक पूर्ण हो जाएगा। इनडोर स्टेडियम छत्तीसगढ़ के लिए खेल का सबसे अहम तोहफा है। अगले साल यहां कई खेलों की राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाएं देखने को मिलेंगी।


7. राजनांदगांव की तस्वीर बदली


छत्तीसगढ़ की खेल नगरी और हाकी की नर्सरी के नाम से विख्यात राजनांदगांव में  पिछले दस सालों में खेलों का काफी विकास हुआ। दसवें साल यहां बास्केटबाल के इनडोर स्टेडियम का निर्माण हुआ तो यहां करोड़ों की योजनाएं  संचालित हो रही हैं। 15 करोड़ रुपयों का प्रोजेक्ट खेलों की आधारभूत संरचनाओं के लिए चल रहा है। यहां कबड्ड़ी का एक इनडोर हॉल और बास्केटबाल का आउटडोर सिंथेटिक कोर्ट  प्रस्तावित है। इसके अलावा राज्य सरकार ने बजट में दो करोड़ रुपयों की लागत से एस्ट्रो टर्फ को भी शामिल किया है। यहां राज्य शालेय क्रीड़ा प्रशिक्षण संस्थान सह आवासीय स्थल की योजना पर भी काम चल रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार के इस प्रोजेक्ट में अब तक 50 लाख रुपए स्वीकृत हो चुके हैं। यहां मल्टी परपस आउटडोर ग्राउंड बनाया जाएगा। इसके साथ ही गर्ल्स और ब्वॉयस हॉस्टल  बनाए जाएंगे। भारतीय खेल प्राधिकरण ने यहां युगांतर पब्लिक स्कूल को  खेलों के विकास के लिए गोद लिया हुआ है। इस स्कूल में बैडमिंटन के दो रबराइज्ड कोर्ट हैं। बास्केटबाल के चार कोर्ट के अलावा एक इनडोर स्टेडियम और 3 आउटडोर स्टेडियम की भी सुविधाएं मौजूद हैं।


8. खेलकर बन गए लखपति




राज्य निर्माण के बाद छत्तीसगढ़ ने इन दस सालों में कई खिलाड़ियों को लखपति बना दिया है। मामला खेल पुरस्कारों का हो या फिर राज्य मैराथन जैसी लाखों रुपए वाली इनामी प्रतियोगिता का। शहीद कौशल यादव खेल पुरस्कार के लिए एक लाख तो राजीव पांडे खेल पुरस्कार के लिए सवा दो लाख रुपए की राशि दी जाती है। इतना ही काफी नहीं है। खेल विभाग की मेजबानी में हर साल ब्लाक स्तर से लेकर जिला और फिर राज्य स्तर पर आयोजित होने वाली मैराथन में ही खिलाड़ियों को करीब सात लाख रुपए के नगद पुरस्कार दे दिए जाते है। ब्लाक स्तर पर महिला और पुरुष वर्ग में अलग-अलग 5200 रुपए, जिला स्तर पर 23 हजार  रुपए और राज्य स्तर पर करीब पौने सात लाख रुपए के नगद पुरस्कार टॉप-20 धावकों में बांटे जाते हैं। राज्य स्तर पर विजेता को महिला और पुरुष वर्ग में अलग-अलग एक लाख रुपयों का नगद पुरस्कार दिया जाता है तो दूसरे स्थान पर 75 हजार और तीसरे स्थान पर 50 हजार रुपयों का नगद पुरस्कार दिया जाता है। इतना ही नहीं चौथे स्थान पर 25, पांचवे पर 20, छठे पर 15 हजार, सातवें से दसवें स्थान पर 7-7 हजार रुपए के नगद पुरस्कार दिए जाते हैं। इसके अलावा दसवें से बीसवें स्थान तक के धावक को तीन-तीन हजार रुपए के नगद पुरस्कार मिलते हैं। राज्य स्तर की स्पर्धाओं में शिरकत कर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को  अलग से नगद पुरस्कार की व्यवस्था है। वित्तीय वर्ष 2009-10 में खेल वि•ााग ने इन खिलाड़ियों में से विजेता और उपविजेता खिलाड़ियों को 15 लाख रुपयों का नगद पुरस्कार बांटा है। ये   खिलाड़ी  वुशू, कराते, कैरम, नेटबाल, हैंडबाल, टेबल टेनिस, एथलेटिक्स, ताइक्वांडो, फुटबाल, कार्फबाल, सॉफ्टबाल, कबड्डी, खोखो, सायकलपोलो, तैराकी, म्यूथाई, जूडो, तलवारबाजी, वॉलीबाल, आरचरी के हैं।


9. राज्य को मिले कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी


बीते दस सालों में छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर पदक हासिल करने वाले खिलाड़ी तो मिले ही, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की भी सौगात मिली। कई अंतरराष्ट्रीय पदक राज्य की झोली में गिरे।
प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी
मृणाल चौबे (हॉकी), नेहा बजाज, प्रीति बंछोर, •ाावना खंडारे (तीनों नेटबॉल), संदीप शुक्ला, अलबर्ट कुजूर (दोनों म्यूथाई), संजय मिश्रा (बैडमिंटन), गुरुप्रीत सिंह (आॅस्ट्रेलियन मास्टर गेम), रोसिता केरकेट्टा।
परवेज चौहान (हैंडबॉल), सीमा गोप (पावरलिफ्टिंग), अरुणा किंडो, एल दीपा, रंजीता कौर, कविता (बास्केटबाल)।
अंबर सिंह  (कराते), हरबंस कौर (म्यूथाई), रुस्तम सारंग, अजयदीप सारंग (वेटलिफ्टिंग), प्रतीक कृष्णन, पीयूष सिन्हा, एम संतोष राव (सायकल पोलो), डा. मुरली कृष्णन, स्वाति ध्रुव (कराते), बीनू वी, फिरोज अहमद खान, आनंद एनएस (साउथ एशियन गेम्स), संजय मिश्रा, अभीषेक घोष, दिनेश शर्मा, एसपी मसीह, किरणपाल।

10. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की सौगात



छत्तीसगढ़ के खेल जगत को सबसे बड़ा तोहफा परसदा स्थित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के रूप में मिला। एक अरब की क्षमता वाले इस स्टेडियम को देश में ईडन गार्डन के बाद दूसरे नंबर पर गिना जाता  है। तत्कालीन खेल मंत्री और वर्तमान में लोक निर्माण व शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की इस स्टेडियम को पूर्ण कराने में अहम भूमिका रही है। लग•ाग स•ाी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों ने, जो राजधानी का दौरा कर चुके हैं, ने इस स्टेडियम की तारीफों के पुल बांधें हैं। स्वयं महान क्रिकेटर और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव ने इसे देश का बेहतरीन स्टेडियम करार दिया  है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में बीसीसीआई की अधिकृत एसोसिएट ट्राफी अंडर-19, 22, अंडर-1ॅ6 की स्पर्धाएं हो चुकी हैं। इस स्टेडियम के उद्घाटन में देश के नामी स्टार क्रिकेटरों ने शो मैच के दौरान शिरकत की थी। इस स्टेडियम की वजह से छत्तीगढ़ को क्रिकेट की एसोसिएट स्पर्धाएं मिलने लगीं।


और अंत में...
शुरू हुई राज्य खेल महोत्सव की परंपरा



राज्य निर्माण के दस साल की खुशियां मनाने हर साल राज्योत्सव का आयोजन तो होता ही है लेकिन दसवें साल से राज्य खेल महोत्सव की परंपरा शुरू की गई। मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ का अध्यक्ष बनने के बाद राज्य निर्माण के दस साल की खुशियां मनाने राज्य खेल महोत्सव का आयोजन करने की घोषणा की थी। इस घोषणा पर अमल करते हुए राज्य का सबसे महंगा राज्य खेल महोत्सव 11 से 13 दिसंबर तक राजधानी में आयोजित किया गया। इस महोत्सव में साढ़े चार हजार खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। साढ़े तीन करोड़ रुपए की लागत वाले इस महोत्सव से राज्य में नई परंपरा शुरू हो गई। अब हर दो साल में राज्य खेल महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इसके पूर्व प्रदेशभर  के सभी  जिलों के विकासखंडों में ब्लाक स्तरीय स्पर्धाओं का आयोजन ट्रायल के तौर पर किया गया। इसके बाद जिला खेल महोत्सव का आयोजन हुआ। फिर जोन स्तर पर स्पर्धाएं हुईं और अंत में सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले राजधानी में आयोजित किए गए। इस महोत्सव में अंडर-19 और ओपन वर्ग की 18 खेलों की स्पर्धाएं आयोजित की गईं। महोत्सव की खास बात उद्घाटन और समापन समारोह का ताम-झाम था। राज्य महोत्सव के पूर्व राजधानी में जिला खेल महोत्सव के उद्घाटन समारोह ने खेल जगत में उत्साह का संचार कर दिया था। छत्तीसगढ़ खेल महोत्सव में जिन 18 खेलों को शामिल किया गया था उनमें सामूहिक खेलों के अंतर्गत बास्केटबाल, फुटबाल, हैण्डबाल, हॉकी, कबड्डी, खो-खो, नेटबाल, व्हालीबॉल, सॉफ्टबॉल और थ्रो-बॉल और व्यक्तिगत खेलों में तैराकी, तीरदांजी, एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, कराटे, •ाारोत्तोलन, कुश्ती और जूडो शामिल था।


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