30 दिसंबर, 2010

जीत गया खेल जज्बा

  1. अभावों के बाद भी अंजनी पहुंची कामनवेल्थ गेम्स तक



ईश्वर ने भले ही एक पैर छीन लिया हो लेकिन उसने साबित कर दिया कि खेल जज्बा हो तो दो पैरों वाले सही-सलामत लोगों को भी पीछे छोड़कर अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है। बात मूलत: जांजगीर की अंजनी पटेल की है जो कामनवेल्थ गेम्स दिल्ली में शिरकत करने के बाद शुक्रवार (15-10-2010)  को राजधानी पहुंची। हालांकि राजधानी में उसके स्वागत के लिए कोई विशेष इंतजाम नहीं थे, बल्कि पत्रकारों के आमंत्रण पर अंजनी यहां आउटडोर स्टेडियम में पायका के समापन समारोह में पहुंची।
अंजनी ने पत्रकारो से चर्चा करते हुए कहा कि उसका मकसद राज्य  के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक हासिल करना है। अंजनी ने कामनवेल्थ गेम्स में पिछड़ने के कई कारण बताए और इनमें से एक मूल वजह थी सुविधाओं का अभाव। अंजनी को छत्तीसगढ़ विकलांक तैराकी संघ ने तराशा और यहां तक पहुंचाया लेकिन इस संघ को खेल विभाग से मान्यता ही नहीं है। इस वजह से संघ अपने सीमीत दायरे में व्यवस्था कर पाता है। अंजनी ने कहा कि उसके जैसे कई और विकलांग खिलाड़ी इस राज्य में है और जरूरत है उन्हें आगे बढ़ाने की। अंजनी ने 2007 में उत्तरप्रदेश विकलांग तैराकी संघ की मेजबानी में इलाहाबाद की यमुना नदी में आयोजित प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। वे दूसरे स्थान पर थीं। अंजनी ने बताया कि कामनवेल्थ गेम्स में उसका काफी अच्छा अनु•ाव मिला और उसे काफी अंतर भी समझ में आया। विदेशी खिलाड़ी एक-दो घंटे तो सिर्फ वार्मअप करते हैं और हम उतना अ•यास करते हैं। हमें भी बेहतर सुविधाएं मिलें तो हम काफी आगे बढ़ सकते हैं। कामनवेल्थ गेम्स की 50 मीटर फ्रीस्टाइल तैराकी में अंजनी ने 00.46.64 का समय निकाला जबकि 100 मीटर फ्रीस्टाइल तैराकी में अंजनी ने 01.45.25 का समय निकाला। उन्होंने फाइनल में पात्रता हासिल कर शीर्ष आठवां स्थान हासिल किया। अंजनी के परिवार में पांच बहनें हैं और उसके पिता शत्रुघन पटेल वाहन चालक का काम कर परिवार चलाते हैं। घर की आर्थिक स्थिति  ठीक नहीं है। ऐसे में अंजनी ने कामनवेल्थ गेम्स में राज्य का प्रतिनिधित्व कर यह साबित कर दिखाया कि वह हारकर भी  अपने खेल जज्बे को जिता ही गईं। अंजनी ने बताया कि जांजगीर में करीब 60 से 65 विकलांग ऐसे हैं जो तैराकी करते हैं और जरूरत उन्हें  आगे बढ़ाने की है। अंजनी हालांकि बचपन से तैराकी कर रही हैं लेकिन उन्हें 2005 में ही पता चला कि विकलांगों की भी तैराकी होती है। अंजनी ने कहा कि उसे आने वाले एशियाड की तैयारी करनी है और इसके लिए वह हरसंभव प्रयास करेंगी कि उनका चयन भारतीय टीम में कर लिया जाए। शासकीय बिलासा कन्या विद्यालय बिलासपुर की बीए प्रथम वर्ष की छात्रा अंजनी करीब 55 फीसदी विकलांग है। उसे पोलियो है और परिवार में उनकी माता भी विकलांग है।



एक नजर..
0. 2007 में राष्ट्रीय तैराकी प्रतियोगिता इलाहाबाद में एक किलोमीटर की तैराकी स्पर्धा में रजत पदक।
0. 2007 में आठवीं राष्ट्री तैराकी प्रतियोगिता पुणे (महाराष्ट्र) में दो स्वर्ण पदक और एक रजत पदक।
0. 2008 में 9वी ंराष्ट्रीय पैरालिंपिक तैराकी प्रतियोगिता करनाला (हरियाणा) में एक स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक।
0. 2008 में बेंगलूर के इंडिया कैंप में चयन। एक माह तक प्रशिक्षण।
0. 2009 में ग्वालियर के 45 दिवसीय इंडिया कैंप के लिए चयन।
0. 2009 के बेंगलूर के इंडिया कैंप के लिए चयन।

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