16 अप्रैल, 2011

विधानसभा अध्यक्ष भी कूदे खेल के मैदान में


छत्तीसगढ़ ताइक्वांडो संघ के अध्यक्ष बने मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ और छत्तीसगढ़ स्क्वैश संघ का अध्यक्ष बनने के बाद विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक भी खेल के मैदान में कूद गए हैं। कौशिक छत्तीसगढ़ ताइक्वांडो संघ के अध्यक्ष बनाए गए हैं और उन्होंने कहा है कि उन्हें जो दायित्व दिया गया है उसका वे पूरी जिम्मेदारी के साथ निवर्हन करेंगे।
शनिवार को यहां होटल ग्रांड इंटरनेशनल में छत्तीसगढ़ ताइक्वांडो संघ की 11वीं वार्षिक सामान्य सभा की बैठक का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य एजेंडा था विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक को राज्य संघ का अध्यक्ष बनाना। स्वयं कौशिक नहीं जानते थें कि उन्हें अध्यक्ष पद पर विराजमान होने का प्रस्ताव दिया जाएगा। ऐसा उन्होंने अपने संबोंधन में कहा। बैठक में राज्य ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष बशीर अहमद खान और राज्य टेनिस संघ के सचिव गुरुचरण सिंह होरा तथा राज्य ताइक्वांडो संघ के सचिव रामपुरी गोस्वामी ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा जिस पर सभी ने सहमती जताई। पूर्व अध्यक्ष आरएल आम्रवंशी को चेयरमैन बनाया गया है। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि ताइक्वांडो को गांव-गांव तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे और सभी  को मिलकर अपने-अपने दायित्वों का निवर्हन करना होगा। कौशिख ने  कहा कि छत्तीसगढ़ को 37वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी मिली है जो गर्व की बात है। इससे हमारा राज्य पूरे देश में ख्याति हासिल करेगा। झारखंड में हाल ही में राष्ट्रीय खेलों का आयोजन किया गया था जिससे झारखंड की पहचान पूरे देश में हो गई है। बैठक में चेयरमैन आरएल आम्रवंशी सहित राज्य ताइक्वांडों संघ के तमाम पदाधिकारी, जिला इकाइयों के पदाधिकारी और कई खिलाड़ी मौजूद थे। इस दौरान कामनवेल्थ गेम्स चेन्नई में राज्य के लिए ताइक्वाडों में पदक हासिल करने वाली संगीता दत्ता और रजनी लहरे को पदक व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम का संचालन छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के कोषाध्यक्ष डा. विण्णु श्रीवास्तव ने किया।

कई दिग्गज हैं खेल के मैदान में
बीते कुछ सालों में खेल के मैदान में कई दिग्गज नेताओं ने कदम रखा है। इसकी एक वजह यह भी है कि खेल में बिना किसी विशेष परिश्रम के प्रचार मिलता है। राज्य के अधिकांश खेल संघों में प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा नेताओं और मंत्रियों का कब्जा है। हालांकि इससे खेलों को मजबूत आधार भी मिला है। छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के अध्यक्ष डा. रमन सिंह छत्तीसगढ़ स्क्वैश् संघ के भी अध्यक्ष हैं। संसदीय सचिव विजय बघेल छत्तीसगढ़ वेटलिफ्टिंग संघ के अध्यक्ष हैं तो वे राज्य ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष भी हैं। हाल ही में राजेश मूणत ने छत्तीसगढ़ वालीबाल संघ के अध्यक्ष पद की कमान संभाली है. खेल मंत्री लता उसेंडी  राज्य ओलंपिक संघ की उपाध्यक्ष हैं। सांसद रमेश बैस छत्तीसगढ़ आरचरी एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं तो भाजपा नेता कैलाश मुरारका सचिव हैं। शिक्षा सचिव  बृजमोहन अग्रवाल भारतीय एमेच्योर शरीर सौष्ठव संघ के अध्यक्ष हैं।

07 अप्रैल, 2011

खेलों को भी जरूरत है अन्ना हजारे की. . .


इस देश को भ्रष्ट्राचार से मुक्ति दिलाने सड़क की लड़ाई लड़ रहे प्रख्यात समाजसेवी अन्ना हजारे को शत-शत प्रणाम, चलो किसी ने तो पहल की करप्शन रूपी इस दानव को खत्म करने की। दानव तो सतयुग में भी थे लेकिन वे प्रत्यक्ष थे और इनके अंत के लिए देवताओं को भी प्रत्यक्ष ही लड़ाई लड़नी पड़ती थी। कलयुग में भी दानव होते हैं लेकिन वे करप्शन के समान कभी टेबल के नीचे तो कभी कोंटे में छिपकर देशवासियों पर हमला बोलते हैं। करप्शन कहां नहीं है, हर शहर और हर गांव ही नहीं बल्कि गली-कूचे तक पहुंच गया है। ऐसे में भला खेल का मैदान कैसे पीछे रह सकता है जो आज तक कामनवेल्थ गेम्स के घोटालों से उबर नहीं सका है। सच पूछिए तो खेल के मैदान से भ्रष्ट्राचार को हटाने के लिए भी अन्ना हजारे की जरूरत है। खेल में क्या भ्रष्ट्राचार नहीं होता बल्कि यह आम कहावत हो चली है कि जितनी राजनीति खेल में होती है उतनी तो राजनीति में भी नहीं होती। इसी राजनीति के पीछे भ्रष्ट्राचार का दानव भी पल रहा होता है। क्या घोटाले सिर्फ कामनवेल्थ गेम्स और झारखंड नेशनल गेम्स में ही होते हैं? नहीं, बल्कि देश के हर राज्य के खेल जगत में होते रहे हैं। मामला किसी खिलाड़ी को टीम इंडिया में शामिल करने का हो या फिर किसी राज्य या राष्ट्रीय स्पर्धाओं की मेजबानी करने के लिए अनुदान के तौर पर मिलने वाली लाखों रुपए की राशि के दुरुपयोग करने का। स्कूली खिलाड़ियों को ही ले लीजिए। आज भी राष्ट्रीय स्पर्धाओं में वे शिरकत करने जाते हैं तो बिना किसी रिजर्वेशन के एक ही डिब्बे में ठसा-ठस वे राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं और थक-हार कर पहुंचते ही खेलने की मजबूरी लिए पराजय का मुंह देखकर वापस लौट आते हैं। क्या यह भ्रष्ट्राचार नहीं है? खेल के मैदान से जुड़ा हर शख्स जानता है कि आयोजनों और ताम-झाम में लाखों रुपए खर्च करने से खिलाड़ी तैयार नहीं होते बल्कि खिलाड़ी मैदान, खेल उपकरण और ट्रेनिंग की बेहतर से बेहतर सुविधाओं से तैयार होते हैं। फिर भी आयोजन होते हैं। क्या यह भ्रष्ट्राचार नहीं है? हर खेल विशेषज्ञ और खेल अधिकारी भी यह जानता है कि राज्य के सभी जिलों और विकासखंडों में 99 फीसदी राज्य खेल संघों की इकाई नहीं है, फिर भी उन्हें मान्यता और लाखों रुपए का अनुदान मिलता है जिसका कोई हिसाब नहीं। क्या यह भ्रष्ट्राचार नहीं है? नेता, मंत्री, अफसर सभी खेल संघों पर कब्जा जमाए बैठे हैं क्योंकि उनके अपने निजी स्वार्थ हैं, क्या यह भ्रष्ट्राचार नहीं है। छत्तीसगढ़ के खेल जगत में ही जितना पैसा इन दस सालों में आयोजनों और ताम-झाम में बहा दिया गया, उतना खेल के मैदानों और अधोसंरचनाओं में बहाया जाता तो इस राज्य की तस्वीर ही कुछ और होती। यह तो बेहतर है कि मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ के खेल जगत के लिए खुले दिल से खजाना खोला है और उद्योगों के साथ खेल संघों को जोड़कर सभी को लखपति बना दिया है। लेकिन हम मुख्यमंत्री डा. सिंह का ओलंपिक में स्वर्ण, रजत या कांस्य हासिल करने का सपना पूरा नहीं कर सके। फिलहाल तो अन्ना हजारे जैसे समाजसेवियों की जरूरतें देश-प्रदेश के खेल जगत को भी है जिससे पाक समझे जाने वाले इस क्षेत्र को नापाक इरादों से बचाए रख सकें।

 

02 अप्रैल, 2011

इस जीत के लिए कोई हैडिंग नहीं. . .



 
धोनी के धुरंदरों ने कर ली दुनिया मुट्ठी में. . .
अनिश्चितता के इस खेल यानी क्रिकेट के  सरताज भारत ने अंतत: दुनिया अपनी मुट्ठी में कर ली। पूरे 28 साल बाद आईसीसी क्रिकेट 2011 का ताज पहनकर टीम इंडिया ने साबित कर दिखाया कि दुनिया में वही और एकमात्र वही क्रिकेट का बिग बॉस है। सच पूछिए तो इस जीत के लिए कोई हैडिंग ही नहीं है। यह कहने में अतिश्योक्ति नहीं होगी कि देशभर के समाचार पत्रों को इस जीत के लिए हैडिंग लगाने में घंटों सोचना पड़ा होगा और कई ने तो जीत की हैडिंग की तैयारियां पहले दिन ही कर ली होंगी। टीम इंडिया से जिस जीत की अपेक्षा की जा रही थी उस पर वह पूरे सौ नहीं बल्कि पूरे दो सौ फीसदी खरी उतरी। हर भारतीय का सपना था टीम इंडिया 28 साल बाद फिर से विश्वविजेता बने और वह सपना भी पूरा हो गया। श्रीलंकाई शेरों को जिस अंदाज में भारत ने ध्वस्त किया वह न केवल आक्रामक था बल्कि अद्भूत, करशिमाई और निराला भी था। कहा जाए तो कोई शब्द ही नहीं मिलते इस अंदाज को बयां करने के लिए। जीत के बाद मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में सिर्फ दर्शक ही नहीं बल्कि हर भारतीय खिलाड़ी की आंखों में जीत के आंसू थे। क्या हरभजन और क्या धोनी, युवराज सभी  से जीत की खुशी बर्दाश्त नहीं हो रही थी और आंखों से खुशियों के मोती छलक पड़े। यह नजारा पूरे विश्व ने देखा और देशवासियों को 28 साल बाद यह नजारा देखने को मिला जब भारतीय खिलाड़ियों की आंखों में खुशी के आंसु थे। यह जीत कोई मामूली जीत नहीं थी बल्कि वह इतिहास रच गई जिसकी 1983 के बाद हर वर्ल्ड कप में हर देशवासी और हर खिलाड़ी इंतजार किया करते थे। भारत ने एक और इतिहास रचा और वह यह कि किसी एशियाई टीम ने दूसरी बार विश्व कप का खिताब हासिल किया है। २ अप्रेल २०११ की रात हमेशा याद रहेगी. ये रात दिवाली की रात थी जो लम्बे अरसे के बाद पुरे देशवसियो को नसीब हो सकी. फिर कपिल के बाद  धोनी ने भी साबित कर दिखाया की वे इंडिया के लिए कितने लकी हैं.

ये हुआ था 28 साल पहले

सन 1983  में लगातार तीसरे वर्ष इंग्लैंड ने वर्ल्ड कप की मेजबानी की थी। 1983 का विश्व कप भारतीय टीम के लिए बहुत अहम साबित हुआ था।  कमज़ोर समझी जाने वाली भारतीय टीम ने दिग्गजों को धूल चटाई और पहली बार  कप पर क़ब्जा  किया। दूसरी ओर लगातार तीन बार विश्वकपप  का ख़िताब जीतने का वेस्टइंडीज़ का सपना चकनाचूर हो गया। फाइनल  में वेस्टइंडीज़ का मुक़ाबला था भारत के साथ था।  एक ओर थी दो बार ख़िताब जीतने वाली वेस्टइंडीज़ की टीम तो दूसरी ओर थी पहले के विश्व कप मैचों में ख़राब प्रदर्शन करने वाली भारतीय टीम. वेस्टइंडीज़ ने भारत को सिर्फ़ 183 रनों पर समेट कर शानदार शुरुआत की और जवाब में एक विकेट पर 50 रन भी बना लिए।  वेस्टइंडीज़ समर्थक जीत का जश्न मनाने की तैयारी करने लगे लेकिन मोहिंदर अरमनाथ और मदन लाल ने शानदार गेंदबाज़ी की और मैच का पासा ही पलट दिया।  हेंस और रिचर्ड्स का अहम विकेट मदन लाल को मिला तो बिन्नी की गेंद पर क्लाइव लॉयड को बेहतरीन कैच लपका कपिल देव ने. बाद में दुजों (25) और मार्शल (18) ने पारी संभालने की कोशिश की लेकिन उनके आउट होते ही मैच उनकी झोली से निकल गया।  दोनों को मोहिंदर अमरनाथ ने आउट किया. अमरनाथ ने होल्डिंग को एलबीडब्लू आउट कर भारत को शानदार जीत दिलाई. वेस्टइंडीज़ की पूरी टीम 140 रन बनाकर आउट हो गई और भारत पहली बार विश्व कप का विजेता बना। इसके 28 साल बाद भारत ने 2011 में श्रीलंका को छह विकेट से पराजित कर खिताब अपने नाम कर लिया। श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए महेला जयवर्धने के शतक की बदौलत भारत को 275 रन का विजय लक्ष्य दिया। भारत ने कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी पारी और गौतम गंभीर के 97 रनों की बदौलत यह मैच छह विकेट से जीत लिया।

एक नजर
वर्ल्ड कप क्रिकेट की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिता है जो हर चार साल में एक बार होती है। यह प्रतियोगिता 36 साल पहले 1965 में इंग्लैंड से शुरू हुई थी। पहले यह प्रतियोगिता 60 ओवरों की होती थी. पहले खिलाड़ी उजली पोशाक में होते थे, तो समय के साथ हर चीज़ रंगीन होता गया। खिलाड़ियों ने रंगीन पोशाकें पहननी शुरू की, गेंद उजली हो गई और अंपायर तक रंगीन पोशाक में नज़र आने लगे. मैच दिन-रात के होने लगे और 50-50 ओवरों के मैच होने लगे। पहले तीन विश्व कप इंग्लैंड में आयोजित हुए और तीन में दो विश्व कप का ख़िताब वेस्टइंडीज़ ने जीता. लेकिन 1983 का विश्व कप जीतकर भारत ने बड़ा उलटफेर किया। भारतीय टीम 1983 के बाद वर्ष 2003 में विश्व कप के फाइनल में पहुँची, लेकिन आस्ट्रेलिया ने उसे रौंद दिया। आस्ट्रेलिया ने सबसे ज़्यादा चार बार विश्व कप का ख़िताब जीता है और तीन बार लगातार ख़िताब जीतकर नया रिकॉर्ड बनाया है। वर्ष 2007 का विश्व कप भारत के लिए दुस्वप्न साबित हुआ और टीम पहले ही दौर में बाहर हो गई. बांग्लादेश की टीम ने भी उसे धूल चटाई और फिर भारत का विश्व कप जीतने का सपना फिर टूट गया। २८ साल बद्द ये सपना एक बार फिर पूरा हुआ.

ये था वर्ल्ड कप का फॉर्मेट
10 वें क्रिकेट वर्ल्ड कप में 14 टीमंों ने हिस्सा लिया। इस बार वर्ल्ड कप में 49 मैच खेले गए। इन टीमों को दो ग्रुपों में बांटा गया।  टीमों का विभाजन उनकी आईसीसी रैंकिंग के हिसाब से किया गया। हर ग्रुप में टीमें एक - दूसरे से खेलीं। हर ग्रुप में टॉप पर रहने वालीं दो - दो टीमें क्वार्टर फाइनल में खेलीं। क्वार्टर फाइनल  जीतने वाली चार टीमें सेमीफाइनल पहुंची और जीतने वाली दो टीमें फाइनल में पहुंची जिनमें मेजबान भारत और श्रीलंका शामिल थीं।  यह फॉर्मेट   1996 के वर्ल्ड कप की तरह था। 

यूडीआरएस
इस बार आईसीसी ने अंपायर डिसीजन रेफर सिस्टम ( यूडीआरएस ) लागू करने का फैसला किया। इसके तहत दो मामलों में टीमें अंपायर के फैसलों के खिलाफ अपील कर सकेंगी। इसमें हॉट स्पॉट तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा , मगर हॉक आई तकनीक का इस्तेमाल करना लागू किया गया था।





01 अप्रैल, 2011

राजीव जैन अध्यक्ष और राजेश पटेल सचिव बने



  राज्य बास्केटबाल संघ की वार्षिक सभा में निर्णय
रायपुर। बिलासपुर में संप्पन्न हुई छत्तीसगढ़ बास्केटबाल संघ की साधारण सभा की बैठक में नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। इस बैठक में मुख्य संरक्षक अरविंद जैन, संरक्षक वीके अरोरा, नवीन सिंह, रूपा जैन, जी स्वामी, चेयरमैन सोनमणी बोरा, अध्यक्ष राजीव जैन, कार्यकारी अध्यक्ष नरेश डाकलिया, महासचिव राजेश पटेल, कोषाध्यक्ष कमल सिंघल बनाए गए। बैठक में कार्यकारिणी समिति का सर्वसम्मति से अप्रैल 2011 से मार्च 2015 तक चुनाव किया गया। प्रदेश बास्केटबाल संघ की कार्यकारिणी इस प्रकार है : मुख्य संरक्षक - अरविन्द जैन(प्रबंध निदेशक, भिलाई  इंजी कारपोरेशन, भिलाई ), संरक्षक:- व्ही. के़ अरोरा(प्रबंध निदेषक, भिलाई इस्पात संयंत्र),नवीन सिंह(डिप्टी सी एम एम, एस ई सी रेल्वे बिलासपुर), रुपा जैन (भिलाई इंजी कारपोरेश),जी़ स्वामी (संस्थापक,बालाजी स्कुल रायपुर), चेयरमेन:- सोनमोनी बौरा, आई ए़ एस (क्लेक्टर,बिलासपुर जिला), अध्यक्ष:-राजीव जैना(कार्यपालक निदेषक, भिलाई इंजी कारपोरेषन, कार्यकारी अध्यक्ष:-नरेश  डाकलिया(महापौर, राजनांदगाव नगर निगम एवं अध्यक्ष राजनांदगाव जिला), वरिश्ठ उपाध्यक्ष:- बृजमोहन सिंह(अध्यक्ष दुर्ग जिला), अजय प्रताप सिंह(अध्यक्ष रायगढ़ जिला), अनिल पुसदकर(रायपुर जिला), उपाध्यक्ष :- कुमार योगेष(सचिव दुर्ग जिला), एस आर ए रिजवी (अध्यक्ष बी एस पी बास्केटबाल कल्ब एवं उपमहाप्रबंधक बी एस पी), अकबर राम कुर्राम (सचिव छग़ पुलिस), विनोद नेमी (अध्यक्ष जाजगीर जिला), निलांजल नियोगी (खेल अधिकारी, एस़ ई़ सी़ रेल्वे बिलासपुर), एस सी त्रीपाठी (सचिव धमतरी जिला), श्रीमति मधु तिवारी (अध्यक्ष कर्वधा जिला), महासचिव :- राजेष पटेल(उपप्रबंधक खेल, भिलाई इस्पात संयंत्र एवं सचिव बी एस पी बास्केटबाल कल्ब), संयुक्त सचिव:- संस्कार द्विवेदी(सचिव, जांजगीर जिला ), विजय डब्लयु़ डी़ देष्पाण्डे (कोशाध्यक्ष बी एस पी बास्केटबाल कल्ब), प्रमोद सिह ठाकुर(सचिव रायपुर नगर निगम), राजेन्द्र तम्बोली (सचिव कर्वधा जिला), दिनेष षर्मा(सचिव,राजनांदगाव नगर निगम बास्केटबाल संघ), अमित मंडल(सचिव, बिलासपुर जिला), कोशाध्यक्ष:-कमल सिंघल(अध्यक्ष दुर्ग नगर निगम बास्केटबाल संघ), सदस्य:-रविन्द्र पटनायक(सचिव बस्तर जिला),षषि सिंह देव(अध्यक्ष सरगुजा जिला), मंजुल दीक्षीत (सचिव रायगढ़ जिला),सुनिल गौराहा(सचिव बिलासपुर नगर निगम बास्केटबाल संघ), गिरिष वाडेर (अध्यक्ष भाटापारा नगर बास्केटबाल संघ), राजेष पाण्डे (काशाध्यक्ष, जॉजगीर जिला), नमिता जैन (सचिव, राजनादगाव नगर निगम बास्केटबाल संघ), एम व्ही़ व्ही. जे़ सुर्य प्रकाष(सचिव भिलाई नगर निगम बास्केटबाल संघ ), इकबाल अहमद खान  (भिलाई इस्पात संयंत्र),विपिन गुप्ता (सचिव कोरबा जिला),सरजीत चक्रवर्ती (भिलाई इस्पात संयंत्र), सेलकषन कमेटी:- चेयरमेन:-साजी टी थामस(सचिव दुर्ग नगर निगम बास्केटबाल संघ), कॉरडीनेटर :- राजेश  प्रताप सिंह(सचिव सरगुजा जिला), आनंद सिंह (बिलासपुर जिला), टेक्निकल कमेटी चेयरमेन:-आऱ एस. गौर(एन आई एस कोच भिलाई इस्पात संयंत्र), कॉरडीनेटर :- विपिन बिहारी सिंह(एन आई एस कोच, बिलासपुर जिला),प्रविण बिसेन(बिलासपुर जिला), रेफरीज बोर्ड चेयरमेन:- एस दुर्गेश राज (कोच भिलाई इस्पात संयंत्र), कॉरडीनेटर:- सुखदेव सिंह (स्पोटर्स कोरडीनेटर भिलाई इस्पात संयंत्र), प्रीतम दास(द़ पु़ म़ रे़ बिलासपुर)। सलाहकार:- राम कुमार च्रन्दा (दुर्ग जिला)।

ये हुआ निर्णय0. 2011-2012 की 10 राज्य सबजूनियर बास्केटबाल प्रतियोगिता का आयोजन कवर्धा में मई के दूसरे सप्ताह में जिला बास्केटबाल संघ की मेजबानी में किया जाएगा।
0. 10वीं राज्य स्तरीय जूनियर बास्केटबाल प्रतियोगिता जून के दूसरे सप्ताप में जांजगीर में आयोजित की जाएगी।
0. 10वीं सीनियर राज्य बास्केटबाल प्रतियोगिता नवबंर के अंतिम सप्ताह में जगदलपुर, जांजगीर, दुर्ग में आयोजित होगी।

26 मार्च, 2011

बकअप राजदीप. . .




राजदीप का छत्तीसगढ़ सिख संगठन ने सम्मान किया.

जंप रोप पर हंसने वालों की बोलती बंद
रायपुर। राजधानी के अंतरराष्ट्रीय जंपर राजदीप सिंह हरगोत्रा ने जंप रोप में नया गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड बनाकर छत्तीसगढ़ के तथाकथित उन खेल संघों के पदाधिकारियों की बोलती बंद कर दी है जो इस नए खेल पर हंसते थे। राजदीप ने न केवल नया कीर्तिमान हासिल किया बल्कि यह भी  साबित कर दिखाया कि हौसले बुलंद हों तो वर्ल्ड रिकार्ड रस्सी कूदकर  बनाया जा सकता है।
30 सेकंड में 154 बार रस्सी कूदने का वर्ल्ड रिकार्ड जापान की मेगुमी सुजूकी के नाम पर था। राजदीप ने 30 सेकंड में 159 बार रस्सी कूदकर नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया और माना जा रहा है कि इस वर्ल्ड रिकार्ड को आने वाले कई सालों तक कोई नहीं तोड़ पाएगा। राजदीप ने न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश का नाम पूरे विश्व में रोश्न कर दिया है। राजदीप के इस वर्ल्ड रिकार्ड का सीधा प्रसारण कलर्स चैनल पर किया गया। होस्ट प्रीति जिंटा ने राजदीप के रिकार्ड के टूटते ही उसे गले लगा लिया और राजदीप के माता-पिता भी गर्व करने लगे। जंप रोप एसोसिएशन आफ छत्तीसगढ़ के सचिव अखिलेश दुबे के मुताबिक राजदीप से नए रिकार्ड की पूरी उम्मीद थी और इस पर वे सौ फीसदी खरे उतरे। राजदीप ने पूरे राज्य का नाम पूरे विश्व में रोशन कर दिया। श्री दुबे ने कहा कि उम्मीद है कि राजदीप का नया गिनीज रिकार्ड आने वाले कई सालों तक कोई नहीं तोड़ पाएगा क्योंकि यह कठिन से कठिन मेहनत का परिणाम और यहां तक पहुंचने के लिए राजदीप के साथ-साथ एसोसिएशन को भी कई संघर्ष करने पड़े हैं। एक समय वह भी था जब कथित खेल विशेषज्ञ जंप रोप (रस्सी कूद) जैसे खेल पर हसते थे और कोई भी सहयोग करने को तैयार नहीं होता था। आज हमें गर्व हो रहा है कि उसी खेल ने राज्य के उन सभी खेलों को पीछे छोड़ दिया जो कभी भी गिनीज रिकार्ड तक नहीं पहुंच सके हैं।






16 मार्च, 2011

प्रशिक्षकों को मिला प्लेटफार्म




खेल विभा ग ने वर्कशाप में सुनी समस्याएं 
                      और दिलाया प्रगति का भरोसा



रायपुर। प्रदेशभर के विभिन्न खेलों के एनआईएस प्रशिक्षकों को खेल संचालनालय ने नया प्लेटफार्म दिया। प्रदेश के खेल जगत के इतिहास में पहली बार करीब 40 एनआईएस प्रशिक्षकों के लिए खेल भवन में वर्कशाप आयोजित की गई। इस वर्कशाप में प्रशिक्षकों ने अपनी-अपनी समस्याएं रखीं और खेलों व खिलाड़ियों के विकास के लिए कई सुझाव दिए।
खेल संचालक जीपी सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस वर्कशाप में प्रशिक्षकों ने खेल सुविधाओं की कमी पर ज्यादा जोर दिया। खासतौर पर खेल मैदानों के अभाव की बातें प्रमुखता से उठीं। इस वर्कशाप में प्रशिक्षकों को यह भी कहा गया कि खेल विभाग ने वि•िान्न खेलों के प्रशिक्षकों के लिए नियुक्ति निकाली है और वे आवेदन दे सकते हैं। ऐसा पहली बार हुआ जब प्रशिक्षकों को नौकरी के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। वर्कशाप में कई मुद्दे उठाए गए और कई सुझाव भी दिए गए। स्वयं प्रशिक्षकों को भी ट्रेनिंग देने की बात प्रमुखता से उठी। कई प्रशिक्षक सबजूनियर वर्ग में जूनियर खिलाड़ियों को और जूनियर वर्ग में सीनियर खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्पर्धाओं में पदक हासिल करने के लिए टीम में शमिल करते  हैं। ऐसे में जो वास्तव में खेल के हकदार हैं वे पीछे रह जाते हैं। कई प्रशिक्षकों ने मैदान की कमी तो मैदान में चेजिंग रूम की कमी का मामला उठाया। इस वर्कशाप में हिस्सा लेने वाले सभी प्रशिक्षकों और प्रशिक्षण कार्य में सहयोग करने वाले विशेषज्ञों से फार्म भी भरवाया गया। इस फार्म में बायोडाटा के अलावा स्थान विशेष में प्रशिक्षण की सुविधाओं की जानकारी मांगी गई तथा सुझाव लिए गए। खेल संचालक जीपी सिंह के मुताबिक इन सुझावों की समीक्षा की जाएगी और प्रशिक्षकों की समस्याओं का समाधान  किया जाएगा।

फुटबाल बालाओं का हुआ स्वागत




लगातार दूसरी बार श्रीलंका में प्रतिनिधित्व
 कर लौटीं सुप्रिया और निकिता


रायपुर। राजधानी की 13 वर्षीय सुप्रिया कुकरेती और निकिता पन्ना छत्तीसगढ़ के खेल जगत में इतिहास रचकर बुधवार को वापस लौटीं। इन दोनों खिलाड़ियों ने पिछले साल ही श्रीलंका में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया था और टीम इंडिया ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया था। एक बार फिर से इन खिलाड़ियों ने श्रीलंका की एशियन फुटबाल को चैंपियनशिप में अपना जौहर दिखाया और भारतीय टीम ने ओवरआल बेहतर प्रदर्शन किया। इन खिलाड़ियों का यहां पुलिस मुख्यालय में स्वगात  किया गया।
शंकर नगर निवासी सुप्रिया कुकरेती एमजीएम स्कूल की सातवीं की छात्रा हैं। सुप्रिया ने भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व स्टाइकर के तौर पर किया। कचना की निकिता पन्ना होलीक्रास स्कूल कांपा में आठवीं की छात्रा हैं। निकिता टीम की गोलकीपर थीं। पुलिस मुख्यालय में इन खिलाड़ियों का डीजीपी विश्वरंजन, एडीजी रामनिवास सहित छत्तीसगढ़ फुटबाल संघ के सचिव जीडी गांधी, रायपुर जिला फुटबाल संघ के अध्यक्ष मुश्ताक अली प्रधान, सचिव दिवाकर थिटे, कोच सरिता कुजूर सहित कई पदाधिकारियों ने स्वागत किया। इस दौरान इन खिलाड़ियों के परिजन भी  मौजूद थे। इन खिलाड़ियों ने खेल संचालक जीपी सिंह से भी मुलाकात की। श्री सिंह ने इन्हें आगे बढ़ाने हरसंभव सुविधा मुहैया कराने आश्वस्त किया। निकिता और सुप्रिया ने इस दौरान कहा कि वे काफी आगे बढ़ना चाहती हैं और राज्य व देश का प्रतिनिधित्व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करना चाहती हैं। निकिता और सुप्रिया की प्रशिक्षक फुटबाल की एनआईएस कोच सरिता कुजूर ने बताया कि इस प्रतियोगिता के लिए एएफटी ने नियम बनाया था कि एक  देश से 22 खिलाड़ियों को खिलाया जाए और ए व बी दो टीमें बनाई जाएं जिससे सभी खिलाड़ियों को खेलने का मौका मिले। भारत की ए व बी दो टीमें बनाई गईं और दोनों टीमों ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया। भारत ने कुल दस मैच खेले और सभी में जीत हासिल की। श्रीलंका के साथ खेला गया पहला मैच ड्रा रहा। ग्रुप बी में श्रीलंका को भारत ने 0-1 से, जार्डन को 1-0 व 1-8 से, इरान को 1-0 व 2-0 से, पलीस्तीन को 10-0, 6-0 और 7-0 से पराजित किया। सुश्री कुजूर ने बताया कि इस प्रतियोगिता में फाइनल मैच नहीं हुआ बल्कि ओवरआल प्रदर्शन देखा गया।

14 मार्च, 2011

2011 की लकी शुरुआत






दो माह के भीतर छत्तीसगढ़ के खेल जगत को मिली कई सौगातें
 देखते ही देखते वर्ष 2011 का जनवरी और फरवरी माह बीत गया और कुछ दिनों में मार्च माह •ाी बीत जाएगा। छत्तीसगढ़ के खेल जगत के लिए पिछले दो माह काफी बेहतर साबित हुए हैं। इन दो माह के •ाीतर राज्य के खेल जगत को कई सौगातें मिली हैं। मामला खेल की अधोसंरचनात्मक सुविधाओं का हो या फिर राष्ट्रीय खेलों में पदक और खिलाड़ियों को नौकरी की शुरुआत का और या फिर राष्ट्रीय स्तर पर पदक हासिल करने का। उम्मीद की जा रही है कि राज्य के खेल जगत के लिए यह पूरा वर्ष काफी बेहतर रहेगा। 

एक करोड़ के खेल परिसर में होंगी कई खेलों की सुविधाएं


 विधानसभा भवन के नजदीक सवा करोड़ रुपए की लागत से बन रहे खेल परिसर में कई खेलों की सुविधाएं रहेंगी। यहां मल्टी जिम के अलावा दर्शकों के लिए भी बैठने की बेहतर व्यवस्था का इंतजाम किया जाएगा।
राज्य शासन ने इस खेल परिसर के लिए एक करोड़ 18 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। खेल परिसर के प्रस्तावित भवन में बैडमिंटन के दो हाल बनाए जाएंगे। इस हाल में दर्शकों के लिए अलग से बालकनी बनाई जाएगी। बैडमिंटन हाल में वुडन फ्लोरिंग की जाएगी और हाल की ऊंचाई अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के अनुसार होगी। प्रस्तावित भवन में मल्टी जिम हाल, बिलियर्ड्स और कैरम हाल भी बनाया जाएगा। खेल परिसर भवन के दोनों ओर लैंडस्केपिंग का प्रावधान भी शामिल है और भवन में प्रवेश के लिए मुख्य पोर्च के अतिरिक्त दो बरांडा  बनाया जाएगा। खेल परिसर के निर्माण की अवधि आठ माह निर्धारित की  गई है। पिछले फरवरी माह में छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के अध्यक्ष मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह और विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने खेल परिसर के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया है।

हर साल तीन करोड़ खर्च करेगा साई 


मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह की पहल पर फरवरी माह में ही भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) ने छत्तीसगढ़ के ढाई सौ खिलाड़ियों को बास्केटबॉल, आचर्री, एथलेटिक्स और हॉकी में प्रशिक्षण प्रदान करने की सहमति दी है। राजनांदगांव के साई हास्टल द्वारा वहां के इंडोर स्टेडियम में एक सौ खिलाड़ियों को और रायपुर में साई हास्टल द्वारा रायपुर के आउट डोर स्टेडियम में डेढ़ सौ खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, खेल किट, आवास व्यवस्था और विभिन्न  प्रतियोगिताओं में इन खिलाड़ियों की भागीदारी आदि पर भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा हर वर्ष तीन करोड़ रुपए की राशि खर्च की जाएगी। हाल ही में भारतीय खेल प्राधिकरण के सचिव गोपालकृष्णा ने राजनांदगांव और रायपुर का दौरा कर साई हास्टल को हरी झंडी दिखाई थी।  प्राधिकरण राजनांदगांव में पंद्रह एकड़ क्षेत्र में सवर्सुविधायुक्त स्पोर्टस हास्टल विकसित करेगा। वतर्मान में भारतीय खेल प्राधिकरण की प्रशिक्षण योजना के तहत राजनांदगांव में 38 खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साई अब वहां पचास महिला और पचास पुरुष खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करेगा। इस योजना के अंतर्गत साई द्वारा रायपुर में आगामी अप्रेल माह से पहले चरण में एक सौ खिलाड़ियों का प्रशिक्षण प्रारंभ किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ को मिला पहला बास्केटबाल इनडोर स्टेडियम 
इस माह छत्तीसगढ़ को बास्केटबाल का पहला इनडोर स्टेडियम राजनांदगांव में मिला। इस इनडोर स्टेडियम में बास्केटबाल की राष्ट्रीय स्पर्धाओं का आयोजन किया जा सकेगा। इस स्टेडियम का शुभारम्भ  8 मार्च को मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने किया। इससे पहले प्रदेश में बास्केटबाल का एक भी इनडोर स्टेडियम नहीं था। राजधानी के इनडोर स्टेडियम में हालांकि फेडरेशन कप बास्केटबाल प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया था लेकिन यहां कई दूसरे खेलों का  आयोजन किया जाएगा। चार करोड़ 03 लाख रुपये की लागत से निर्मित यह स्टेडियम सिर्फ ग्यारह महीने के रिकार्ड समय में तैयार हुआ है। इसी लम्बाई 37 मीटर, चौड़ाई 22 मीटर और ऊंचाई दस मीटर की है। इसमें एक हजार दर्शक क्षमता वाली गैलेरी का भी निर्माण किया गया है।

राजधानी में बनेगी स्क्वैश एकेडमी


राजधानी में स्क्वैश जैसे खेलों को बढ़ावा देने के लिए स्क्वैश एकेडमी की घोषणा पिछले माह 28 फरवरी को एसोसिएशन के अध्यक्ष मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने की। रायपुर में अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्क्वैश एकेडमी खोली जाएगी। इसके अलावा इस खेल को बढ़ाने के लिए जुलाई-अगस्त माह में यहां राष्ट्रीय प्रतियोगिता का •ाी आयोजन किया जाएगा।

15 साल बाद मिला इनडोर स्टेडियम


15 साल बाद ही सही राजधानी को इनडोर स्टेडियम की सौगात फरवरी माह में मिल गई। 21.5 करोड़ रुपए की लागत से बने इस स्टेडियम का उद्घाटन हालांकि 3 फरवरी को किया गया लेकिन विधिवत 25वीं फेडरशन कप बास्कटेबाल प्रतियोगिता यहां की पहली राष्ट्रीय प्रतियोगिता थी। यह 10 फरवरी से आयोजित की गई। पूरी तरह वातानुकूलित इस स्टेडियम की दर्शक क्षमता 5 हजार है और यहां बास्केटबाल सहित टेबल टेनिस, नेटबाल, वालीबाल और कई इनडोर खेलों की स्पर्धाएं हो सकेंगी।

कुंबले को भी भा गया स्टेडियम


भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और कर्नाटक क्रिकेट संघ के अध्यक्ष अनिल कुंबले पहली बार 17 जनवरी को रायपुर आए और यहां उन्होंने छत्तीसगढ़ टेनिस   संघ की वेबसाइट का लोकापर्ण किया। इस दौरान उन्होंने परसदा के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का भी दौरा किया और इसकी काफी तारीफ  की।

नेशनल गेम्स में मिले सात पदक


छत्तीसगढ़ को असम के 33वें राष्ट्रीय खेलों में छह पदक के बाद झारखंड के 34वें राष्ट्रीय खेलों में इस साल फरवरी माह में सात पदक मिले। ये पदक बास्केटबाल, हैंडबाल, कराते, निशानेबाजी में मिले। इनमें चार स्वर्ण, दो कांस्य और एक रजत पदक शामिल है। नेशनल गेम्स के पदक  विजेताओं के लिए लाखों रुपए के नगद पुरस्कार की  घोषणा की गई थी। यह घोषणा मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने किट वितरण के दौरान की थी। इन खिलाड़ियों को करीब 15 लाख रुपए के नगद पुरस्कार आगामी 13 मार्च को न्यू सर्किट हाऊस में होने वाली ओलंपिक संघ की बैठक में दिए जा सकते हैं।

और सीओए को मिला नया मोड़
13 मार्च को छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ (सीओए) की यहां न्यू सर्किट हाऊस में आयोजित की गई विशेष सामान्य सभा की बैठक में सीओए को नया मोड़ दिया गया। मुख्यमंत्री और सीओए अध्यक्ष डा. रमन सिंह की अध्यक्षता में सीओए का महासचिव छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ के अध्यक्ष बलदेव सिंह भाटिया को चुना गया। सीओए की नई कार्यकारिणी में कोषाध्यक्ष डा. विष्णु श्रीवास्तव को बनाया गया है जबकि आठ उपाध्यक्ष बनाए गए हैं जिनमें खेल मंत्री लता उसेंडी और नगरीय प्रशासन मंत्री राजेश मूणत, संसदीय सचिव विजय बघेल और के साथ-साथ कुलदीप जुनेजा, विक्रम सिसोदिया, रामनिवास और खेल संचालक जीपी सिंह भी शामिल हैं। राज्य गृह निर्माण मंडल के चेयरमैन सुभाष राव को कार्यकारिणी में शामिल किया गया है।

13 मार्च, 2011

ओलंपिक संघ को मिले कई नए चेहरे


मंत्री, विधायक, प्रशासनिक अफसर, क्रीड़धिकारी
 खिलाड़ी और खेल संघों के पदाधिकारी शामिल 



छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ यानी सीओए की नई कार्यकारिणी में न सिर्फ राज्य खेल संघों के पदाधिकारियों को तरजीह दी गई है बल्कि दो मंत्रियों के साथ-साथ विधायक, प्रशासनिक अधिकारी, क्रीड़ाधिकारी और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को शामिल किया गया है। नई कार्यकारिणी को लेकर कई तरह के कयास एक पखवाड़े से चल रहे थे। कई नाम दावेदारों में सामने आ रहे थे। सभी की नजरें सचिव पद पर लगी थीं और इस पद पर जितने भी नाम सामने आए वे सभी पीछे रह गए। 


रायपुर। सीओए की नई कार्यकारिणी का गठन यहां न्यू सर्किट हाऊस में सीओए अध्यक्ष और मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह की अध्यक्षता में किया गया। छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ के अध्यक्ष बलदेव सिंह भाटिया बनाए गए। श्री भाटिया के नाम की कहीं भी चर्चा नहीं थी और जिन नामों की चर्चा थी उन पर मुहर नहीं लगाई गई। हांलाकि इन्हें कार्यकारिणी में जगह जरूर दी गई। सीओए के कोषाध्यक्ष छत्तीसगढ़ स्क्वैश संघ के सचिव डा. विष्णु श्रीवास्तव बनाए गए जो साइंस कालेज में क्रीड़ाधिकारी हैं। इसके अलावा आठ उपाध्यक्ष बनाए गए हैं। इनमें छत्तीसगढ़ वालीबाल संघ के नवनियुक्त अध्यक्ष और नगरीय प्रशासन मंत्री राजेश मूणत, खेल मंत्री लता उसेंडी, संसदीय सचिव और राज्य वेटलिफ्टिंग संघ के अध्यक्ष विजय बघेल, विघायक कुलदीप जुनेजा, छत्तीसगढ़ ट्रायथलान एसोसिएशन के अध्यक्ष रामनिवास, खेल संचालक जीपी सिंह, सीओए के पूर्व सचिव और राज्य हैंडबाल संघ के सचिव बशीर अहमद खान तथा छत्तीसगढ़ टेनिस संघ के अध्यक्ष विक्रम सिसोदिया शामिल हैं। सीओए का संयुक्त सचिव स्क्वैश संघ के उपाध्यक्ष राकेश सिंह, जिम्नास्टिक के अध्यक्ष अश्विनी महेंदु, बाक्सिंग संघ के सचिव राजेंद्र प्रसाद, राज्य टेटे संघ के अध्यक्ष शरद शुक्ला और विजय अग्रवाल बनाए गए हैं। कार्यकारिणी सदस्यों में राज्य जूडो संघ के अध्यक्ष सु•ााष राव, रोविंग संघ के अध्यक्ष राजा रणविजय सिंह जूदेव, राजानांदगांव ओलंपिक संघ के अध्यक्ष विजय पांडेय, तैराकी संघ के अध्यक्ष गोपाल खंडेलवाल, बिलियड्स संघ के अध्यक्ष विजय अग्रवाल (दुर्ग), डा. एके श्रीवास्तव (वालीबाल संघ), नीता डुमरे, इंजीनियर एनआर परासर और ट्रायथलान के कोषाध्यक्ष आलोक दुबे शामिल हैं। विशेष आमंत्रित सदस्यों में वीजी भिसे, विश्वजीत मित्रा, सबा अंजुम और गजराज पगारिया को शामिल किया गया है। सीओए की इस बैठक में भारतीय ओलंपिक संघ के आजीवन अध्यक्ष विद्याचरण शुक्ल, डीजीपी विश्वरंजन के अलावा कई प्रशासनिक अधिकारियों सहित सभी राज्य खेल संघों के पदाधिकारी मौजूद थे।


खेल संघों के लिए खुला लाखों का खजाना
छत्तीसगढ़ के 32 खेलों के राज्य खेल संघों के लिए उद्योगों ने लाखों रुपयों का खजाना खोल दिया है। सीओए की कार्यकारिणी के पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह और उद्योगपतियों की बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में सभी उद्योगपतियों ने अलग-अलग खेलों को गोद लेने की सहमति दी और संघों को 25 से 35 लाख रुपए की वार्षिक आर्थिक सहायता मुहैया कराने की बात कही। उद्योग खेल आयोजनों के लिए करीब 10 लाख रुपए, प्रशिक्षण के लिए 10 लाख रुपए और खिलाड़ियों के खेल उपकरणों के लिए करीब 15 लाख रुपए खर्च करेंगे। पहले साल आर्थिक सहायता के बाद  दूसरे साल इसकी समीक्षा की जाएगी और इसके बाद दी जाने वाली राशि में बढ़ोत्तरी या कटौती की जाएगी। इसके अलावा जिन उद्योगों से खेल संघों को सहायता मुहैया कराई जाएगी उन उद्योगों से एक प्रतिनिधि या उद्योगपति को संबंधित राज्य खेल संघ का उपाध्यक्ष बनाया जाएगा और उन्हें वोटिंग पावर भी दिया जाएगा। जिन खेल संघों को उद्योगों ने गोद लिया है उनमें आरचरी को एनएमडीसी, एथलेटिक्स को बजरंग पावर लि. रायपुर, बैडमिंटन को सेंचूरी सीमेंट, बास्केटबाल को बीईसी, साइकिलिंग को मनमीत स्टील, फेंसिंग को लाफार्ज सीमेंट, फुटबाल को आईएनडी पा. लि. रायगढ़, जिम्नास्टिक को प्रकाश इंडस्ट्रीज लि. चांपा, हैंडबाल को एनएमडीसी, हाकी को वेदांता, बालको कोरबा, खो-खो को जीआर स्पंज एंड पावर लि., कबड्डी को एसईसीएल, नेटबाल को एसकेएस स्टील एंड पा. लि. रग्बी सेवन ए साइड को वीसा स्टील एंड पा. लि, स्क्वैश को इस्पात गोदावरी लि. रायपुर, टेबल टेनिस को एनटीपीसी कोरबा, टेनिस को वेदांता ग्लोबल लि. रायपुर, वालीबाल को शारदा इंडस्ट्रीज, एक्वेटिक्स को भिलाई  इस्पात संयंत्र, कनोइंग एंड क्याकिंग को ग्रासीम सीमेंट, रोविंग को अंबूजा सीमेंट, ट्रायथलान को एलएंडडी सीमेंट ने गोद लिया। पावर गेम्स में बाक्सिंग को मोनेट ने, वेटलिफ्टिंग को जेपी सीमेंट ने, कुश्ती को सिम्पलेक्स लिमिटेड भिलाई  ने, मार्शल आर्ट्स खेलों में जूडो को एसीसी सीमेंट ने, कराते डू को हीरा ग्रुप ने, ताइक्वांडो को बीकेएसके ने गोद लिया। इसके अलावा एक्वेस्ट्रेरियन और शूटिंग को जिंदल स्टील पूर्व से ही प्रायोजित कर रहा है। लान बाल को डीबी पावर ने गोद लिया है।

मीडिया ने किया बहिष्कार, सीएम ने माफी मांगी
छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की बैठक के पूर्व उद्योगों के साथ आयोजित की गई बैठक में मीडिया को जाने से रोक दिया गया। मीडिया से कहा गया कि इस बैठक से मीडिया को दूर रहने के निर्देश सीएम हाऊस से दिए गए हैं। उद्योगों के साथ हुई बैठक के बाद सीओए की कार्यकारिणी की   बैठक का आयोजन किया गया। इस दौरान मीडया ने बैठक का ही बहिष्कार कर दिया। बाद में जब पत्रकारों ने मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह को पूरी घटना बताई तो उन्होंने भी आश्चर्य व्यक्त किया और इसके लिए माफी मांगी। उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी।

उद्योगों से कोई जबरदस्ती नहीं : डा. रमन


छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के अध्यक्ष मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि उद्योगों से किसी तरह की कोई जबरदस्ती नहीं की गई है कि वे खेलों को गोद लें। उद्योगों से आग्राह किया गया था और यह खुशी की बात है कि उद्योगों ने स्वेच्छा से खेलों को गोद लेने की बात कही और आर्थिक सहायता मुहैया कराने पर सहमति दी। डा. सिंह ने कहा कि उद्योगों के पास एक माह का समय है और वे सहयोग करने में असक्षम हैं तो मना कर सकते हैं, कोई जोर-जबरदस्ती नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खेलों का बेहतर वातावरण निर्मित होगा और खेल की मूलभुत  सुविधाओं के विकास के लिए बेहतर से बेहतर कदम उठाए जाएंगे।

खर्च खिलाड़ियों पर होगा : भाटिया
 
छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव बलदेव सिंह भाटिया ने कहा है कि उद्योगों के खेल संघों को गोद लेने से प्रदेश में खेलों का काफी विकास होगा और ज्यादा से ज्यादा खर्च खिलाड़ियों, खेल उपकरणों, प्रशिक्षकों पर किया जाएगा न कि उद्घाटन समारोह या समापन समारोह में। श्री भाटिया ने कहा कि छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ का कार्यालय शीघ्र ही राजधानी में खोला जाएगा जिसमें वे अपना समय नियत करेंगे। इससे खिलाड़ी उनसे सीधे संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आगामी 2013-14 में संभावित 37वें राष्ट्रीय खेलों पर विधानसभाचुनाव का कोई असर नहीं होगा। इसका काफी बेहतर आयोजन किया जाएगा।

12 मार्च, 2011

खेल जगत को एका की जरूरत



हर कोई  चाहता है छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ में जगह बनाना


सिर्फ एक दिन का इंतजार शेष रह गया है जब छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की बहुप्रतिक्षित बैठक का आयोजन 13 मार्च को न्यू सर्किट हाऊस में किया जाएगा। सभी  की नजरें लगी हैं सचिव पद पर। यह सस्पेंस अभी भी बरकरार है कि सीओए का सचिव किसे बनाया जाएगा। प्रदेश के खेल जगत की कई हस्तियां चाहती हैं ओलंपिक संघ में जगह हासिल करना। दबी जुबां ही सही, हर किसी की अलग-अलग राय है। इन तमाम कयासों के बीच यह सच्चाई भी सामने है कि प्रदेश का खेल जगत आज भी  एक नहीं है, बावजूद इसके कि मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह सीओए अध्यक्ष हैं और वे कह  चुके हैं कि हर कोई सीओए का अध्यक्ष है। सभी  को अपनी लकीर बड़ी करनी चाहिए न कि एक-दूसरे की लकीर छोटी करने में लगें। लेकिन डा. सिंह की इन बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया। यही वजह है कि तमाम प्रयासों के बाद भी प्रदेश का खेल जगत अनेकता में एकता का पाठ नहीं सीख सका। वरन खेल संघों के पदाधिकारी कहते-सचिव कोई भी बने, सभी मिलकर काम करेंगे...
रायपुर। छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ को लेकर विवाद, यह सीओए की पुरानी परंपरा रही है। एक समय दो दिग्गजों के बीच प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ का मुद्दा दिल्ली तक गूंजा था और यह मामला न्यायालय तक भी पहुंचा था। प्रदेश का खेल जगत इससे वाकिफ है। अतीत के पन्नों को पलटने का हालांकि यह वक्त नहीं लेकिन, यह कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि बीते पलों से सबक ले लिया होता तो सीओए के पुनर्गठन की नौबत ही नहीं आती और कई योजनाएं भी शुरू हो गई होतीं। लेकिन ऐसा कुछ  नहीं हुआ। प्रदेश खेल जगत को मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने अध्यक्ष बनने के बाद कई सौगातें दी। खेल सुरक्षा निधि का गठन कर 50 लाख रुपए तत्काल सहायता के लिए दिए  गए तो राज्य में खेल महोत्सव की परंपरा शुरू हुई। मामला फेडरेशन कप बास्केटबाल का हो या कामनवेल्थ गेम्स और नेशनल गेम्स के पदक विजेताओं के लिए लाखों रुपए की नगद पुरस्कार राशि की घोषणा का। एक के बाद एक सीओए के अध्यक्ष के रूप में डा. सिंह ने राज्य के खेल जगत को कई सौगातें  दीं। यहां तक उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए नौकरी के नियम •ाी बन गए और टेकलाल कुर्रे को पहली नौकरी देकर खिलाड़ियों को जॉब सिक्योरिटी भी दी। इसके पूर्व 37वें नेशनल गेम्स की मेजबानी के लिए सार्थक प्रयास  किए गए। माना जा रहा है कि 37वें राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन के लिए इस समय प्रदेश के खेल जगत को एका की जरूरत है न कि सचिव पद हासिल करने के लिए ऊंची चोटी का जोर लगाने की। इस समय 13 मार्च पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। उन्हें भी जिनके खेल संघों को भारतीय ओलंपिक संघ से मान्यता नहीं मिली है या फिर एक ही खेल के कई संघों के पदाधिकारियों को। कई तरह की चर्चाएं भी शुरू हो चुकी और कई सवाल भी उठने लगे हैं। क्या 13 मार्च की बैठक वैध है, क्या भारतीय ओलंपिक संघ से पर्यवेक्षक आएगा? कहीं आईएएस या आईपीएस को तो सचिव नहीं बनाया जाएगा? ऐसे कई सवाल सभी की जुबां पर है और कार्यकारिणी की सूची का सस्पेंस भी बना हुआ है। यदि आम खिलाड़ियों का मन टटोलें तो उन्हें खेल राजनीति की बजाए खेल की बेहतर सुविधाओं, अधोसंरचना और जॉब सिक्योरिटी की ज्यादा जरूरत है।
एक नजर...




0. पिछले साल 28 मार्च 2010 को छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की बैठक का आयोजन करीब तीन साल बाद किया गया था। वीसी शुक्ल की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में 37वें नेशनल गेम्स के लिए सभी  ने एकजुट होने की बात कही थी।

0. 9 मई 2010 को खेल संचालनालय की मेजबानी में न्यू सर्किट हाऊस में 37वें नेशनल गेम्स और क्वींस बेटन रिले को लेकर मैराथन बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में प्रदेश ओलंपिक संघ ने खुलकर इस बात का विरोध किया कि होस्ट सिटी कान्ट्रेक्ट से पहले सेक्रेटिएट बना दिया गया है और इसमें  खेल संघों के पदाधिकारियों को तवज्जो नहीदी गई है।

0. 11 मई 2010 को छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ ने साफ कहा कि छत्तीसगढ़ के सेक्रेटिएट में यदि भारतीय ओलंपिक संघ हस्तक्षेप नहीं करता है तो सीओए का चुनाव कराया जाएगा। होस्ट सिटी कान्ट्रेक्ट की शर्तों का भी उल्लंघन किया गया है।  यह मामला भी भारतीय ओलंपिक संघ तक पहुंचा।

0. 23 मई को रविवार के दिन भिलाई  में छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की बैठक का आयोजन कर छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के अध्यक्ष डा. अनिल वर्मा पर आर्थिक अनियमितता के आरोप लगाए गए।
0. 25  मई 2010 को मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह को छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ का चेयरमैन या फिर अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया।
0. 17 जून 2010 को छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की बैठक में छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के अध्यक्ष को ही पद से हटा दिया गया। इस बैठक को रजिस्ट्रार फर्म्स एवं सोसायटी ने अवैध करार दे दिया।
0. छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के अध्यक्ष डा. अनिल वर्मा ने सचिव बशीर अहमद खान के खिलाफ न्यायालय में मानहानि का दावा किया।

0. 17 जुलाई 2010 को भारतीय ओलंपिक संघ ने सीओए अध्यक्ष डा. अनिल वर्मा को पत्र लिखकर सीओए का अध्यक्ष माना और छत्तीसगढ़ को आबंटित नेशनल गेम्स उन्हीं के मार्गदर्शन में कराने का समर्थन दिया।

0. 20 जुलाई 2010 को सीओए ने खेल संचालक और रजिस्ट्रार फर्म्स सोसायटी को पत्र लिखकर सूचित   किया कि सीओए की 22 जुलाई को वार्षिक आमसभा की बैठक का आयोजन किया जाएगा। डा. वर्मा ने प्रेस से कहा कि इस बैठक के खिलाफ वे  कानूनी कार्यवाही करेंगे।

0. 22 जुलाई 2010  को सीओए की बैठक का आयोजन सुबह 11 बजे होटल ग्रांड इंटरनेशनल में किया गया। इस बैठक में मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह को अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव पारित किया गया। इसके अलावा ओलंपिक संघ के अध्यक्ष डा. वर्मा और सचिव बशीर अहमद खान ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगकर एक-दूसरे को गले लगाया। इस दिन पूरी कार्यकारिणी ने इस्तीफा दे दिया और मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने सीओए का अध्यक्ष बनने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। नई कार्यकारिणी  के गठन का अधिकार भी उन्हें दिया गया।

0. डा. सिंह के अध्यक्ष बनने के बाद छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ का सचिव पद बनने की होड़ मच गई। कई दावेदार सामने आए। छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की बागडोर मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के हाथों सौंपने के बाद सीओए की वार्षिक सामान्य सभा की बैठक का आयोजन कल 18 अगस्त 2010 को यहां न्यू सर्किट हाऊस में किया गया। इस बैठक में मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने सभी को साथ मिलकर काम करने पर जोर दिया। इसके साथ ही कामनवेल्थ गेम्स के लिए पदक हासिल करने वाले खिलाड़ियों के लिए लाखों रुपए के नगद  पुरस्कार की घोषणा की। उन्होंने क्रिकेट या बास्केटबाल के बड़े टूर्नामेंट कराने के साथ-साथ खेलों को उद्योगों से जोड़ने की पहल करने की घोषणा की। डा. सिंह ने इस बैठक में मुख्यमंत्री विशेष खेल सुरक्षा निधि के गठन करने के साथ-साथ इस निधि में 50 लाख रुपए देने की घोषणा की जिससे खिलाड़ियों व खेल संघों को तत्काल आर्थिक सहायता मुहैया कराई जा सके।

अब आगे. . . 
0. सीओए अध्यक्ष मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह की अध्यक्षता में दूसरी बार 13 मार्च को न्यू सर्किट हाऊस में विशेष सामान्य सभा  की बैठक का आयोजन किया जाएगा जिसमें नई कार्यकारिणी गठित होगी।

मूणत के समर्थन में कूदे विधान




कहा, अच्छे लोगों को ओलंपिक संघ का सचिव बनाएं
छत्तीसगढ़ नेटबाल संघ के अध्यक्ष और पूर्व राज्यमंत्री विधान मिश्रा नगरीय प्रशासन मंत्री राजेश मूणत के समर्थन में सीओए के मैदान में कूद पड़े हैं। श्री मिश्रा ने कहा है कि हाल ही में छत्तीसगढ़ वालीबाल एसोसिएशन के अध्यक्ष बनाए गए नगरीय प्रशासन मंत्री राजेश मूणत को छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ का सचिव बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचा चुके हैं कि सीओए में अच्छे लोगों को शामिल किया जाए और पिछले दस साल से काबिज पेशेवर लोगों को हटाया जाए। श्री मिश्रा ने कहा कि जिला ओलंपिक संघों के वोट समाप्त कर देना चाहिए। उन्होंने यह मांग भी रखी है कि सीओए में महिलाओं को तवज्जो दी जाए और महासचिव व सचिव दो पद बनाए जाएं। महासचिव कोई भी रहे, सचिव महिला खिलाड़ी को बनाया जाए।


हाकी के दोनों सघों को आमंत्रित करें: नीता डुमरे


कहा, महिलाओं को सीओए में प्राथमिकता दें
छत्तीसगढ़ स्टेट महिला हाकी एसोसिएशन की सचिव और पूर्व अंतरराष्ट्रीय हाकी खिलाड़ी नीता डुमरे ने कहा है कि 13 मार्च को होने वाली सीओए  की बैठक में प्रदेश महिला हाकी संघ को आमंत्रित न करना निराशाजनक है व कई शंकाओं को जन्म देता है। उन्होंने कहा कि वे और संघ की अध्यक्ष श्रीमती संध्या मिश्रा सीओए की विगत कार्यकारिणी में भी हैं और नई कार्यकारिणी अभी गठित नहीं हुई है। ऐसे में सिर्फ दो ही महिला सदस्यों को आमंत्रित न करना अफसोस की बात है। नीता डुमरे ने कहा कि सीओए सचिव से संपर्क करने पर उन्हें कहा गया कि हाकी छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष डा. अनिल वर्मा और सचिव फिरोज अंसारी को बैठक के लिए अधिकृत किया गया है। जबकि भारतीय हाकी संघ और हाकी इंडिया का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इसके अलावा राज्य में हाकी का मामला उच्च न्यायालय में लंबित है और इस पर भी फैसला नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि या तो दोनों धड़ों को आमंत्रित करें और नहीं तो हाकी के किसी भी संघ को बैठक में आमंत्रि न किया जाए।

सभी खेल संघों को बुलाया जाएगा बैठक में : बशीर


छत्तीसगढ़ ओलंपकि संघ के सचिव बशीर अहमद खान का कहना है कि सीओए की 13 मार्च को होने वाली बैठक में मान्यता प्राप्त खेल संघों को अलावा सभी खेल संघों के पदाधिकारियों को आमंत्रित किया जा रहा है। वे विशेष आमंत्रित रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह बैठक सकारात्मक होगी और राज्य में खेलों के विकास से संबंधित कई निर्णय लिए जाएंगे।

09 मार्च, 2011

छत्तीसगढ़ को मिला बास्केटबॉल इंडोर स्टेडियम



 मुख्यमंत्री के हाथों लोकार्पित

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज जिला मुख्यालय राजनांदगांव में छत्तीसगढ़ के प्रथम वुडनकोर्ट बास्केटबाल इंडोर स्टेडियम का लोकार्पण किया। लगभग चार करोड़ 03 लाख रुपये की लागत से निर्मित यह स्टेडियम सिर्फ ग्यारह महीने के रिकार्ड समय में तैयार हुआ है। इसी लम्बाई 37 मीटर, चौड़ाई 22 मीटर और ऊंचाई दस मीटर की है। इसमें एक हजार दर्शक क्षमता वाली गैलेरी का भी निर्माण किया गया है। मुख्यमंत्री ने लोकार्पण समारोह में कहा कि यह स्टेडियम प्रदेश में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को तैयार करने में कारगर साबित होगा। आने वाले समय में यहां के खिलाड़ी अपने खेल कौशल और उपलब्धियों से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रौशन करेंगे। डॉ. सिंह ने इस अवसर पर प्रदेश के अंतर्राष्ट्रीय स्तर के तेरह प्रतिभावान खिलाड़ियों को शाल-श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। नगरीय प्रशासन एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री राजेश मूणत ने समारोह की अध्यक्षता की।
     6486A-080311डॉ. सिंह ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि राजनांदगांव के दिग्विजय स्टेडियम परिसर में निर्मित भव्य बास्केटबॉल इंडोर स्टेडियम प्रदेश के खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने का अवसर प्रदान करेगा। खेलों के क्षेत्र में राजनांदगांव का अपना अलग स्थान है, राजनांदगांव के खिलाड़ियों ने समय-समय पर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी खेल प्रतिभा का बेहतर प्रदर्शन करते हुए छत्तीसगढ़ का नाम रौशन किया है। मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने कहा कि खेल की सभी विधाओं में खिलाड़ियों को बेहतर से बेहतर अधोसंरचना उपलब्ध कराने के हर संभव प्रयास राज्य शासन द्वारा किए जा रहे हैं।
    मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने कहा कि वुडनकोर्ट वाला यह छत्तीसगढ़ का पहला बास्केटबॉल इंडोर स्टेडियम है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर के प्रतिभावान खिलाड़ियों अंतर्राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी मृणाल चौबे, कराते खिलाड़ी अम्बर भारद्वाज, बास्केटबॉल खिलाड़ी लूरेन्द्र साहू, बालीबॉल खिलाड़ी रेखापाल, तीरंदाजी में प्रमिला साहू, हैंडबाल में प्रियल सोनी को शाल-श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने पंजा-कुश्ती में रामसिंह, महिला क्रिकेट में नेहा बडनाईक, हैंडबाल के चुन्नीलाल मोहबे और वरिष्ठ खिलाड़ियों में हॉकी के आरएन विश्वकर्मा, आरआर शुक्ला, मैकूलाल यादव और बैडमिंटन में बाबूभाई गौतम को भी शाल-श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया।
     ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने राजनांदगांव में बास्केटबॉल का इंडोर स्टेडियम बनाये जाने की  पहल स्वयं की थी। स्टेडियम में बास्केटबॉल के खेल के लिये वुडनकोर्ट के निर्माण के साथ ही बाहर से आने वाले खिलाड़ियों की आवासीय व्यवस्था के लिये 18 कमरों का भी निर्माण कराया गया है। इंडोर स्टेडियम में स्कोर डिस्प्ले के लिये इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड लगाया गया है। यहां कान्फ्रेन्स हॉल और सांई के कार्यालय का भी निर्माण कराया गया है। बास्केटबॉल इंडोर स्टेडियम के लिये वुडनकोर्ट का निर्माण 32 मीटर लंबाई तथा 19 मीटर चौड़ाई में कराया गया है। इसके बेस में लगाई गई लकड़ी मलेशिया से मंगाई गई है, जो फाइनवुड क्वालिटी की है। इसके ऊपर उच्च क्वालिटी के सागौन की पट्टियां लगाई गई है। वुडनकोर्ट का निर्माण कलकत्ता से आये विशेष कारीगरों ने किया है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के बाद राजनांदगांव में जी.ई. रोड में निर्माणाधीन फ्लाई ओव्हर का निरीक्षण भी किया।
    इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री लता उसेंडी, लोकसभा सांसद श्री मधुसूदन यादव, बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष श्री खूबचंद पारख, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री लीलाराम भोजवानी, छत्तीसगढ़ राज्य पाठय पुस्तक निगम के अध्यक्ष श्री अशोक शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री दिनेश गांधी और नगर निगम राजनांदगांव के महापौर श्री नरेश डाकलिया, सहित अनेक जनप्रतिनिधि, खिलाड़ी, खेलसंघों के पदाधिकारी और खेलप्रेमी प्रबुध्द नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

08 मार्च, 2011

सीओए में महिलाओं को भी मिले तवज्जो

श्रीमती कविता दीक्षित 
अंतरराष्ट्रीय महिला खिलाड़ियों ने की मांग


 छत्तीसगढ़ के खेल जगत की नजरें टिकी हैं आगामी 13 मार्च को न्यू सर्किट हाऊस में शाम 6.30 बजे से होने वाली छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ (सीओए) की बैठक पर जिसमें नई कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा। सीओए की नई कार्यकारिणी में अंतरराष्ट्रीय महिला खिलाड़ियों को भी तवज्जो देने की मांग जोरों पर उठ रही है। इसकी एक वजह यह भी है कि छत्तीसगढ़ में अंतरराष्ट्रीय महिला खिलाड़ियों की संख्या हालांकि कम है और सीओए में महिला खिलाड़ियों को किसी पदाधिकारी या फिर कार्यकारिणी सदस्य के तौर पर प्रतिनिधित्व का मौका नहीं मिला है। खेल विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि सीओए की नई कार्यकारिणी में महिलाओं को तवज्जो मिलती है तो पूरे खेल जगत में काफी बेहतर संदेश जाएगा और अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का यह माह भी सार्थक हो जाएगा।
नीता डुमरे
 छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की आगमी 13 मार्च को होने वाली बैठक काफी अहम होगी और इस बैठक के पूर्व नई कार्यकारिणी के लेकर लगाए जा रहे तमाम कयासों के बीच अंतरराष्ट्रीय महिला खिलाड़ियों को तवज्जो देने की मांग  उठने लगी है। हालांकि इस मांग पर अमल किया जा सकता है क्योंकि ऐसी अंतरराष्ट्रीय महिला खिलाड़ियों की संख्या काफी कम है जो राज्य खेल संघ की पदाधिकारी भी हैं। यदि रायपुर की बात करें तो राजधानी में अंतरराष्ट्रीय महिला हाकी खिलाड़ी और अंपायर नीता डुमरे तथा बैडमिंटन की अंतरराष्ट्रीय महिला खिलाड़ी श्रीमती कविता दीक्षित का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। नीता डुमरे छत्तीसगढ़ महिला हाकी संघ की सचिव हैं और कई अंतरराष्ट्रीय हाकी प्रतियोगिताओं में उन्होंने देश का व इस राज्य का प्रतिनिधित्व किया है। हाल ही में उन्हें राज्य सरकार ने वीर हनुमान सिंह पुरस्कार से भी नवाजा है। नीता डुमरे नेशनल लुक से कहती हैं कि छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ में महिलाओं को तवज्जो देनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर तो वे और भी दावेदारी से कहेंगी कि महिला खिलाड़ियों को तवज्जो दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परिदृश्य में यदि राजनीति की बात करें तो सोनिया गांधी, सुषमा स्वराज जैसी हस्तियों का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है जिन्हें राजनीति में पूरी तवज्जो मिली। इसके अलावा राज्य को सर्वाधिक पदक भी महिला खिलाड़ी ही दिला रही हैं। नीता डुमरे ने कहा कि सीओए में ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को तवज्जो दी जानी चाहिए जिससे प्रदेश के खेल जगत में  काफी अच्छा संदेश जाएगा और महिला खिलाड़ी भी मजबूत होंगी। बैडमिंटन की अंतरराष्ट्रीय महिला खिलाड़ी श्रीमती कविता दीक्षित छत्तीसगढ़ बैडमिंटन संघ की संयुक्त सचिव भी हैं और एक बेहतर प्रशिक्षक भी। वे पिछले करीब 22 साल से लगातार बैडमिंटन के खिलाड़ियों को नि:शुल्क प्रशिक्षण दे रही हैं और बैडमिंटन जैसे जटिल खेलों के विकास में उनकी भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। श्रीमती दीक्षित भी कहती हैं कि नई कार्यकारिणी में महिलाओं को तवज्जो मिलना चाहिए क्योंकि राज्य में महिला खिलाड़ियों की काफी महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं। उन्होंने यह भी कहा कि महिला पदाधिकारियों के अलावा महिला खिलाड़ियों को भी सीओए में काम करने का एक मौका देना चाहिए। खेल विशेषज्ञों का भी यही तर्क है कि महिला खिलाड़ियों व पदाधिकारियों को सीओए में शामिल करना चाहिए जिससे महिला खिलाड़ियों की समस्याओं को  समझा जा सके।


राज्य की खेल मंत्री भी महिला


सुस्री लता उसेंडी
छत्तीसगढ़ की खेल मंत्री भी महिला हैं। राज्य निर्माण के बाद सुस्री लता उसेंडी राज्य की पहली महिला खेल मंत्री बनी हैं और उनके कार्यकाल में प्रदेश में खेलों का काफी विकास हुआ है। सुश्री उसेंडी की छत्तीसगढ़ को 37वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी दिलाने और राज्य का खेल बजट बढ़ाने में काफी अहम रोल है। खेल मंत्री के कार्यकाल में ही प्रदेश के 70 खिलाड़ियों को पहली बार उत्कृष्ट घोषित किया गया और खिलाड़ियों के लिए नौकरी के भी दरवाजे खुल गए। इसके अलावा राज्य में खेल अधोसंरचनाओं का  काफी विकास हुआ है और नई
योजनाएं भी क्रियान्वित हुई हैं।

महिला खिलाड़ियों ने ही दिलाए हैं सर्वाधिक पदक


नेशनल गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता हेंडबाल टीम. 


छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिला खिलाड़ियों ने ही सर्वाधिक पदक दिलाए हैं। राज्य को सबसे ज्यादा बास्केटबाल की महिला टीम ने पदक दिलाए हैं। झारखंड के 34वें राष्ट्रीय खेलों के टीम गेम में छत्तीसगढ़ को महिला हैंडबाल टीम ने स्वर्ण पदक तो बास्केटबाल की टीम रजत पदक दिलाया। इसके पहले असम के 33वें राष्ट्रीय खेलों में भी महिलाओं ने ही राज्य को सर्वाधिक पदक दिलाए थे। नेटबाल का स्वर्ण, हैंडबाल का स्वर्ण, बास्केटबाल का रजत पदक और जूडो का रजत पदक महिलाओं ने ही छत्तीसगढ़ को दिलाए थे। राजधानी के इनडोर स्टेडियम में हाल ही में खेली गई 25वीं फेडरेशन कप बास्केटबाल चैंपियनशिप में छत्तीसगढ़ की महिला टीम ने स्वर्ण पदक हासिल किया है। वैसे बास्केटबाल की लड़कियों ने पिछले एक दशक में 60 से ज्यादा राष्ट्रीय पदक विभिन्न स्पर्धाओं में हासिल किए हैं। राज्य की सबा अंजुम भारतीय महिला हाकी टीम का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। नेहा बजाज कामनवेल्थ गेम्स में भारतीय नेटबाल टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं तो प्रीति बंछोर भारतीय नेटबाल टीम की कप्तान तक रह चुकी हैं। इसी तरह   पावरलिफ्टिंग, वेटलिफ्टिंग, जूडो, फुटबाल, फेंसिंग सहित कई खेलों में राज्य की महिला खिलाड़ियों ने प्रदेश का राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व कर पदक  हासिल किया है। हाल ही में फुटबाल की दो नन्ही बालिकाओं निकिता पन्ना और सुप्रिया कुकरेती का चयन भारतीय फुटबाल टीम में अंडर-14 एशियन फुटबाल को चैंपियनशिप के लिए किया गया है। ये दोनों खिलाड़ी श्रीलंका में देश का प्रतिनिधित्व करेंगीं।