22 जनवरी, 2011







गांवों में खोजें खेल प्रतिभएँ
चैलेंजेस आफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स पर राष्ट्रीय सेमीनार
रायपुर, २१ जनवरी, २०११.  खेल प्रतिभाएं तो ग्रामीण क्षेत्रों में है लेकिन हम उन्हें खोज नहीं पा रहे हैं। ग्रामीणों को खेल में आगे लाना बेहद जरूरी है। मौजूदा समय में खिलाड़ी उन्हीं खेलों में भाग रहे हैं जिनमें सबसे ज्यादा पैसा है। फिजीकल एजुकेशन की पूरे देश में बाढ़ आ गई है लेकिन क्वालिटी की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है। यह तमाम बातें साइंस कालेज की मेजबानी में आयोजित चैलेंजेस आफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार के पहले दिन सामने आईं। इस सेमिनार में देशभर के शारीरिक शिक्षा के चुनिंदा विशेषज्ञ अपना व्याख्यान दे रहे हैं और शोध पत्र भी प्रस्तुत कर रहे हैं।
शासकीय नागार्जुन स्नातकोत्तर विज्ञान महाविद्यालय (साइंस कालेज) की मेजबानी में आयोजित इस सेमीनार का उद्घाटन शुक्रवार को सुबह संसदीय सचिव विजय बघेल ने किया। इस अवसर पर श्री बघेल ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि सेमिनार में दो मंत्री (उच्च शिक्षा मंत्री हेमचंद यादव, खेल मंत्री लता उसेंडी) नहीं आए और उन्हे मुख्य अतिथि बनाया गया। उन्होंने का कि बचपन के दिनों में वे खेलों में ज्यादा ध्यान देते थे और यही वजह थी कि बार्डर लाइन में पास होते थे। मौजूदा परिवेश में हर कोई व्यावसायिक हो गया है। यहां तक कि रिश्ते भी व्यवसाय बन गए हैं। लड़की की शादी के लिए लड़का ऐसा खोजेंगे जो ज्यादा कमाई करता हो। खेल में भी व्यवसायिकता आ गई है। खिलाड़ी उन्हीं खेलों में ज्यादा हिस्सा ले रहे हैं जिनमें पैसा ज्यादा है। उन्होंने कहा कि 71 रुपए और 51 रुपए का पहले कबड्डी प्रतियोगिता का नगद पुरस्कार हुआ करता था और हम 40 किलोमीटर दूर तक सायकल से सफर कर प्रतियोगिता में हिस्सा लिया करते थे। आज वह जुनून देखने को नहीं मिलता। श्री बघेल ने बताया कि इन्हीं चीजों को देखते हुए सरकार प्रयास कर रही है कि उद्योगपति खेलों को गोद लें और खिलाड़ियों के लिए नौकरी की  व्यवस्था करें जिससे उनका जीवन सुरक्षित हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल के दिनों में शारीरिक शिक्षा और बागवानी जैसे विषय हुआ करते और इसके  नंबर मिलते थे। आज यह सब नहीं है क्योंकि शिक्षा भी व्यवसायिक हो गई है व्यवहारिक नहीं। इसके पूर्व साइंस कालेज के प्राचार्य केएन बापट और आयोजन सचिव डा. विष्णु कुमार श्रीवास्तव ने अपने विचार रखे। सेमीनार के पहले दिन उद्घाटन अवसर पर प्रमुख व्याख्यान मेजर जनरल शिबनाथ मुखर्जी द्वारा प्रस्तुत किया गया।
 श्री मुखर्जी लक्ष्मीबाई नेशनल यूनिवर्सिटी आफ फिजिकल एजुकेशन के पूर्व कुलपति हैं। उन्होंने अपने व्याख्यान में कहा कि जीवन में कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जिसमें चैलेंज नहीं होता। हर क्षेत्र में चैलेंज है और फिजीकल एजुकेशन व स्पोर्ट्स में भी चैलेंज है। जरूरत है इस चैलेंज को समझ पाने की। श्री मुखर्जी ने इस  बात पर  ज्यादा जोर दिया कि ग्रामीण इलाकों में  खेल प्रतिभाएं मौजूद  हैं लेकिन हम उन्हें आगे नहीं ला पा रहे हैं। उन्होंने पायका को काफी अच्छी योजना बताते हुए कहा कि इसके बेहतर परिणाम सामने आएंगे। सेमिनार के उद्घाटन अवसर पर वरिष्ठ क्रीड़ाधिकारी सुरेंद्र दुबे का संसदीय सचिव और उनके शिष्य विजय बघेल ने शाल और श्रीफल देकर सम्मान  किया। इस अवसर पर डा. जेएस नरुका (एडवाइजर एवं कंसलटेंट स्पोर्ट्स एवं यूथ अफेयर के पूर्व कुलपति), पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग की विभागाध्यक्ष डा. रीता वेणुगोपाल, डा. सीडी आगाशे, डा. रविंद्र मिश्रा, डा. विपिन शर्मा, डा. आलोक दुबे सहित कई कालेजों के क्रीड़ाधिकारी, खेल विशेषज्ञ और प्राध्यापक मौजूत थे।  इस सेमीनार में देश के ख्यातिप्राप्त खेल विशेषज्ञ, क्रीड़ाधिकारी, खेल प्रशासनिक अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। सेमनीर में शारीरिक क्रीड़ा के वि•िान्न आयामों एवं विषयों पर विचार मंथन किया जाएगा। सेमीनार में शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में मार्डन ट्रेंड, शारीरिक शिक्षा कारीकूलम डिजाइनिंग, अंतरविषय परिचर्चा, शारीरिक शिक्षा एवं स्वस्थ जीवन, महिलाओं में व्यायाम का एंडी एजिंग में महत्व, राष्ट्रीय स्तर पर शारीरिक शिक्षा परिषद का निर्माण एवं सतही स्तर पर शारीरिक शिक्षा एवं खेलों का विकास, क्रीड़ा के क्षेत्र में भारतीय ओलंपिक परिषद की भूमिका, खेलों में शासकीय एवं अशासकीय संस्थाओं की भूमिका, खेलों में महिलाओं की सहभागिता, भारत में साहसिक खेलों के विकास की संभावनाएं, इवेंट मैनेजमेंट एवं पेशे के रूप में तथा स्पोर्ट्स एरगोनाकिम्स   जैसे नवीन विषयों पर  चर्चा की जाएगी।

आज अंतिम दिन
सेमिनार का कल 23 जनवरी को अंतिम दिन होगा। इस दिन भी कई विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। सुबह 9 बजे से 9.30 बजे तक रविवि के शारीरिक शिक्षा विभाग की विभागाध्यक्ष डा. रीता वेणुगोपाल, 9.30 से 10 बजे तक आईजीपीई के एसोसिएट प्रोफेसर डा. संदीप तिवारी, 10 बजे से 10.30 बजे तक एलएनयूपीई के प्रोफेसर डा. विवेक पांडेय, 10.30 से 11 बजे तक डा. रिशी त्रिपाठी कानपुर अपने विचार रखेंगे। 11.15 से दूसरा सत्र शुरू होगा जिसमें डा. अमित श्रीवास्तव वाराणसी, डा. चिनप्पा रेडी एनएपीईएसएस हैदराबाद, डा. विष्णु कुमार श्रीवास्तव रायपुर अपने विचार रखेंगे। दोपहर 2 बजे से ओरल प्रजेंटेशन के बाद ओपन सेशन और फिर शाम चार बजे के बाद सेमिनार का समापन होगा।
स्पोर्ट्स ला से मिलेगा खिलाड़ियों को न्याय

देश के खेल जगत में जल्द ही स्पोर्ट्स ला भी लागू हो जाएगा जो खिलाड़ियों को न केवल न्याय दिलाएगा बल्कि खेल विवाद से संबंधित मुद्दों को भी सुलझाएगा। यह जानकारी चैलेंजेस आफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में हिस्सा लेने आए अधिवक्ता डा. अमरेश कुमार ने दी। वे एशियन काउंसिंल आफ स्पोर्ट्स आर्बिटेशन के महासचिव भी  हैं। उन्होंने बताया कि इस संस्था के एशिया महादीप में जितने ओलंपिक संघ है, सदस्य हैं। इसके अलावा स्वीट्जरलैंड में इंटरनेशनल स्पोर्ट्स कोर्ट भी है। इंटरनेशनल कोर्ट 48 घंटे के भीतर विवादों का निपटारा करता है और अधिक से अधिक 48 दिनों के भीतर किसी विवाद का निपटारा होता है। डा.कुमार ने बताया कि भारत में इंडियन स्पोर्ट्स आर्बिटेशन या कहें भारतीय खेल अधिकरण का गठन होगा जो भारतीय ओलंपिक संघ से संबद्ध रहेगा। इसे मान्य करने अगले माह 12 फरवरी से झारखंड में आयोजित होने वाले 34वें नेशनल गेम्स के दौरान होने वाली भारतीय ओलंपिक संघ की सामान्य सभा की बैठक में मुहर लगाई जाएगी। इस अधिकरण में विधि के जानकार और खेलों के जानकार होंगे। इसमें खिलाड़ियों के यौन शोषण के मामले से लेकर खिलाड़ियों के साथ अन्याय, खेल संघों के मामले, पुरस्कार संबंधित मामले भी सुलझाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि हमारे देश में स्पोर्ट्स ला का अभी उतना चलन नहीं है लेकिन विदेशों में यह काम कर रहा है। आस्ट्रेलिया में दो खंडपीठ है। एक सिडनी में और एक न्यूयार्क में है।
पायका के बाद आएगा मायका : मुखर्जी
लक्ष्मीबाई नेशनल यूनिवर्सिटी आफ फिजिकल एजुकेशन के पूर्व कुलपति डा. शिवनाथ मुखर्जी ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को सामने लाने पंचायत युवा क्रीड़ा एवं खेल अभीयान (पायका) काफी अच्छी योजना है। पायका की योजनाओं को लेकर कई बार अपना मार्गदर्शन दे चुके डा. मुखर्जी ने बताया कि पायका के बाद मायका योजना आने वाली है। मायका यानी (म्यूनिसिपल) नगर निगम या पालिका युवा क्रीड़ा खेल अभीयान योजना। इसकी तैयारियां और प्रशिक्षण दोनों चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पायका में क्रीड़ा श्री एक अहम पार्ट होता है और उसका मासिक मानदेय पांच सौ रुपए काफी कम है। संभवत: 2012 तक मानदेय में काफी इजाफा होगा। डा. मुखर्जी ने कहा कि गांवों में बड़ा बेस मिलता है। मौजूदा समय में खेल छोटे बेस में है क्योंकि यह शहरों तक सिमटा हुआ है और यही वजह है कि हमें पदक भी कम मिल रहे हैं। उन्होंने खेल आयोजनों पर ज्यादा जोर देते हुए कहा कि इससे जागरुकता बढ़ती है। 1982 में देश में एशियन गेम्स आयोजित हुए थे और इसी वजह से देश की पहली स्पोर्ट्स पालिसी बनी थी। वरन देश में स्पोर्ट्स पालिसी ही नहीं थी। देश में काफी सालों बाद कामनवेल्थ गेम्स का बड़ा आयोजन हुआ। इससे काफी जागरुकता बढ़ी है और खेलों के प्रति लोगों का झुकाव  बढ़ गया है।



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