05 जनवरी, 2011

किस्मत भी मायने रखती है आरचरी में

हवा का रुख बदला तो पासा पलट जाता 
है ओलंपिक में : ओलंपियन मंगल सिंह




४ जनवरी, २०११. आल इंडिया इंटर रेलवे में ईस्टर्न रेलवे का प्रतिनिधित्व करने राजधानी पहुंचे ओलंपियन मंगल सिंह चाम्पइया तीरंदाजी में बेहतर खेल प्रतिभा  के साथ-साथ किस्तम को भी ज्यादा तवज्जो देते हैं। वे कहते हैं कि यदि हवा का रुख साथ दे गया तो सीधे पदक पर निशाना लगता है, वरन बेहतर खेल प्रतिभा भी  हवा के सामने हवा हो जाती है।
ओलंपियन मंगल सिंह ने बीजिंग 2008 में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया था। वे सिर्फ एक अंक से चूक गए थे और दूसरे राउंड से ही बाहर हो गए। मंगल सिंह ने यहां पत्रकारों से चर्चा के दौरान बताया कि ओलंपिक 2008 में उन्होंने ए कोर्ट में अ•यास किया था लेकिन टूर्नामेंट बी कोर्ट में मिल गया जिससे उनका खेल प्रभावित हो गया। यह पूछने पर कि एक खिलाड़ी को हर कोर्ट में खेलने का अभयास होना चाहिए तो उन्होंने कहा कि ओलंपिक में काफी व्यस्त मुकाबले होते हैं और ऐसे में हर कोर्ट में अ•यास करने नहीं मिलता। इसके अलावा सबसे अहम रोल हवा का रहता है। हवा ने यदि साथ नहीं दिया तो निशाना टारगेट के बाहर हो जाता  है। यह खेल किस्मत से भी जुड़ा हुआ है। मंगल ने यह भी कहा कि हमसे हर बार बेहतर प्रदर्शन की अपेक्षाएं की जाती  हैं लेकिन सुविधाएं कोरिया, जापान और चाइना जैसी नहीं मिलती। विदेशों में हर एक प्वाइंट पर रिसर्च होता है। आरचरी के बो के टारगेट से लेकर धागे और तीर के वजन व हवा के दबाव तक, लेकिन हमारे यहां ऐसा कुछ  नहीं होता। तकनीकी रूप से हम काफी कमजोर हो जाते हैं। मंगल सिंह ने बताया कि वे 2012 लंदन ओलंपिक की तैयारियों में लगे हुए हैं और जुलाई मे ं होने वाले क्वालीफाइंग में उन्हें पूरी उम्मीद है कि वे सफल होंगे। विदेशी कोच के सवाल पर वे कहते  हैं कि एशिया के लिए एशियाई और यूरोप के लिए यूरोप का कोच रखना चाहिए क्योंकि हर जगह का वैदर अलग-अलग होता है। मंगल ने यह •ाी कहा कि कोच जानकार होना चाहिए और खासतौर पर ओलंपियन होना चाहिए। जिससे वह खिलाड़ियों को ओलंपिक की बारीकियों से अवगत करा सके। इसके अलावा कोच खिलाड़ियों से पूछकर नियुक्त करना चाहिए। वे यह भी कहते हैं कि जूनियर खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए निचले स्तर से खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करना जरूरी है। इसके लिए जिला व राज्य स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करना चाहिए। वे बताते हैं कि उन्हें और डोला, राहुल बेनर्जी, तरुण जैन को विन एंड विन नामक विदेशी कंपनी प्रायोजित करती है क्योंकि इस समय उनकी रैंकिंग बेहतर है। हावड़ा में सीनियर टीटी के पद पर पदस्थ मंगल सिंह ने रेलवे से मिलने वाली सुविधाओं को लेकर बताया कि सुविधाएं ठीक हैं लेकिन अ•यास के दौरान खिलाड़ियों से ड्यूटी नहीं करानी चाहिए। मंगल सिंह कामनवेल्थ गेम्स के लिए सिर्फ एक प्वाइंट से चूक  गए थे। वरन वे भी भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व् करते। मंगल बताते हैं कि उस दौरान उनका बो सेट नहीं था।
जहां से ज्याद सुविधा मिलेगी वहां से खेलूंगा


ओलंपियन मंगल सिंह चाम्पइया से जब पूछा गया कि क्या वे छत्तीसगढ़ से खेलना चाहेंगे तो उन्होंने कहा कि जिस सरकार से उन्हें ज्यादा सुविधाएं मिलेंगी वे वहां से खेलने के लिए तैयार हैं। फिलहाल रेलवे से खेल रहे मंगल सिंह ने एक साल तक आंध्रप्रदेश का भी प्रतिनिधित्व किया था। वे बताते हैं कि झारखंड से उन्हें आज तक कोई कैश अवार्ड नहीं मिला क्योंकि उन्होंने झारखंड का प्रतिनिध्तिव नहीं किया है लेकिन नेशनल गेम्स में वे झारखंड का प्रतिनिधित्व करना चाहेंगे। मंगल ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार यदि बेहतर सुविधाएं देगी तो वे छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व नेशनल गेम्स में करने को तैयार हैं।

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