07 फ़रवरी, 2011

छत्तीसगढ़ को एक और पदक का नुकसान





कोच नहीं मिला तो रुस्तम सारंग भी 
हिस्सा  नहीं लेंगे नेशनल गेम्स में
 वर्ष 2007 में असम के 33वें नेशनल गेम्स में छत्तीसगढ़ को वेटलिफ्टिंग का पदक दिलाने वाले रुस्तम सारंग झारखंड नेशनल गेम्स में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करना लगभग असंभव नजर आ रहा है। रुस्तम इस समय बेंगलूर में हैं और उनका कहना है कि उनका कोच ही उन्हें नहीं दिया गया है तो वे नेशनल गेम्स जाकर क्या करेंगे। रुस्तम इस बात से भी खफा हैं कि झारकंड नेशनल गेम्स के लिए कैंप लगाया गया है या नहीं, उन्हें कोई जानकारी नहीं है। यही हालात रहे तो कोई खिलाड़ी कैसे पदक हासिल कर सकता है

रायपुर। झारखंड के 34वें नेशनल गेम्स में छत्तीसगढ़ का नेटबाल का पदक तय माना जा रहा था लेकिन फेडरेशन ने छत्तीसगढ़ को अपात्र घोषित कर दिया। इसके बाद राजधानी के अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर रुस्तम सारंग ने भी झारखंड नेशनल गेम्स में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है। छत्तीसगढ़ के खेल जगत के लिए यह दूसरा झटका है क्योंकि रुस्तम से सौ फीसदी पदक की उम्मीद है।
राजधानी के अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर रुस्तम सारंग ने 33वें नेशनल गेम्स असम में छत्तीसगढ़ के लिए व्यक्तिगत रूप से रजत पदक हासिल किया था। यह राज्य के लिए काफी अहम उपलब्धि थी। इसके बाद भी रुस्तम सारंग का लगातार  राज्य के लिए पदक हासिल करने का सिलसिला जारी है। हाल ही में रुस्तम ने कामनवेल्थ  गेम्स में भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम का भी प्रतिनिधित्व किया। रुस्तम मात्र एक अंक से चूक गए वरन उनका कांस्य  पदक तय था। इस दौरान उनकी कलाई में चोट भी लग गई थी। कलाई की चोट को देखते हुए रुस्तम ने पहले ही कह दिया था कि वे नेशनल गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। लेकिन इसके बाद थोड़ी बहुत संभावना भी बनी। रुस्तम झारखंड नेशनल गेम्स के लिए क्वालीफाई कर चुके हैं। इस समय बेंगलूर के इंडिया कैंप में हैं। रुस्तम ने नेशनल लुक से दूरभाष पर कहा कि नेशनल गेम्स में हिस्सा लेने के दो प्रमुख कारण हैं। उनमें पहला कारण कलाई में चोट है तो दूसरा कारण कोच का अभाव। वे चाहते हैं कि उनका कोच उनके पिता विक्रम अवार्डी बुधराम सारंग को बनाया जाए जिन्होंने उन्हें इन बुलंदियों तक पहुंचाया है। असम नेशनल गेम्स में भी उनके पिता ही उनके कोच थे और उनकी मेहनत की बदौलत ही वे छत्तीसगढ़ के लिए रजत  पदक हासिल कर पाए थे। रुस्तम ने यह भी कहा कि अफसोस इस बात  का है कि उन्हें इस बात की कोई सूचना भी नहीं दी गई है कि झारखंड नेशनल गेम्स के लिए छत्तीसगढ़ में कोई कैंप लगाया गया है और उन्हें कोचिंग करनी है। दूसरी तरफ रुस्तम सारंग के पिता बुधराम सारंग का कहना है कि वेटलिफ्टिंग का कोचिंग कैंप लगाया गया है या नहीं यह पता ही नहीं है। कैंप का कोई नामोनिशा नजर नहीं आ रहा है। हां, यह जरूर मालूम है कि रुस्तम सारंग झारखंड नेशनल गेम्स के लिए पात्र है और उससे सौ फीसदी पदक की उम्मीद भी है। इस मामले में नेशनल लुक ने छत्तीसगढ़ वेटलिफ्टिंग एसोसिएशन के सचिव सुकलाल जंघेल से संपर्क करने का काफी प्रयास किया लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
इनडोर में क्यों नहीं हुआ रुस्तम का सम्मान ?

छत्तीसगढ़ के खेल जगत में यह सवाल भी  उठने लगे हैं कि राजधानी के अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर रुस्तम सारंग को इनडोर स्टेडियम के उद्घाटन समारोह में ही भूला दिया गया। जबकि ऐसे लोगों का  सम्मान किया गया जिनकी कोई विशेष उपलब्धि खेलों के विकास के लिए नहीं है। रुस्तम सारंग राजधानी ही नहीं बल्कि राज्य के पहले ऐसे वेटलिफ्टर हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई दफा भारत का प्रतिनिधित्व करने के साथ-साथ पदक भी हासिल किया है। छत्तीसगढ़ के वे एकमात्र वेटलिफ्टर हैं जिन्होंने कामनवेल्थ  गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इसके अलावा एशियाड में भी रुस्तम ने देश का प्रतिनिधित्व किया। वे राज्य के श्रेष्ठ खेल पुरस्कार भी हासिल कर चुके हैं। इतनी उपलब्धियों के बावजूद रुसम का नाम तक इनडोर स्टेडियम के उद्घाटन समारोह में नहीं पुकारा गया। रुस्तम के पिता बुधराम सारंग का कहना है कि कम से कम परिवार के किसी सदस्य को ही बुला

कोई टिप्पणी नहीं: