10 फ़रवरी, 2011

राजधानी को साई हास्टल जून में


श्री गोपालकृष्ण राजधानी में साईं हॉस्टल के लिए स्टेडियम का अवलोकन करते हुए.

श्री गोपालकृष्ण कल संचालक ज.प. सिंग से चर्चा करते हुए. 

100 बालकों से शुरू होगा हास्टल, मार्च में
 टेकओवर होगा आउटडोर स्टेडियम
रायपुर। राजधानी में प्रस्तावित भारतीय खेल प्राधिकरण का हास्टल इस साल जून में प्रारंभ होगा। इसके लिए आउटडोर स्टेडियम साई को मार्च माह में टेकओवर हो जाएगा। यह निर्णय भारतीय खेल प्राधिकरण के महानिदेशक गोपालकृष्ण के राजधानी दौरे के बाद लिया गया। उन्होंने राजनांदगांव का भी दौरा किया। राजनांदगांव के साई सेंटर को विस्तृत किया जा रहा है।
भारतीय खेल प्राधिकरण के महानिदेशक गोपालकृष्ण ने राजधानी में प्रस्तावित साई हास्टल के लिए आउटडोर स्टेडियम का निरीक्षण किया। इस दौरान निगम आयुक्त ओपी चौधरी और साई भोपाल के क्षेत्रीय निदेशक आरके नायडू ने उन्हें साई के साथ हुए एमओयू और खेल सुविधाओं की जानकारी दी। इस दौरान खेल संचालक जीपी सिंह भी मौजूद थे। डीजी साई गोपालकृष्ण ने यह वादा किया कि जून माह में साई हास्टल प्रारंभ कर दिया जाएगा। इसके पहले मार्च माह में स्टेडियम टेकओवर कर लिया जाएगा जिससे फर्नीचर व अन्य सुविधाएं पूरी की जा सके व शेष मरम्मत कार्य को भी अंजाम दिया जा सके। उन्होंने पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि साई हास्टल की शुरुआत 100 बालकों से की जाएगी जिन्हें चार खेलों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें वालीबाल, जूडो, वेटलिफ्टिंग और फुटबाल शामिल है। उन्होंने बताया कि राजनांदगांव में पहले से ही साई का सेंटर दिग्वजय स्टेडियम में चल रहा है। इस सेंटर को बड़ा करने के लिए नया सेंटर बनाने की योजना है। यहां भी चार खेलों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें आरचरी, हाकी, फुटबाल शामिल हैं। वहां नया स्टेडियम बना है जिसे साई को देने का अनुरोध किया गया है। इससे 100 खिलाड़ियों के लिए नया सेंटर  प्रारंभ कर सकते हैं। राज्य सरकार द्वारा मुहैया कराई गई 15 एकड़ जमीन पर खेल की अधोसंरचनाओं के निर्माण को लेकर उन्होंने बताया कि इसमें करीब तीन साल लग जाएंगे। लेकिन साई शीघ्र ही यहां खेल की बुनियादी सुविधाओं का विकास करेगा। जशपुर में हाकी के साई सेंटर को लेकर उन्होंने बताया कि खेल संचालक जीपी सिंह ने उन्हें बेहतर योजना दी है और इस पर विचार किया जा रहा है। डीजी साई गोपालकृष्ण ने कहा कि इसके बाद बस्तर के संबंध में निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि उत्तर बस्तर और दक्षिण बस्तर में भी साई सेंटर हो जिससे पूरा राज्य कवर हो जाएगा और आने वाले समय में यहां से खेल की बेहतर प्रतिभाएं सामने आएंगी।
इनडोर भी मिल जाए तो लड़कियों को भी देंगे प्रशिक्षण
डीजी साई गोपालकृष्ण ने इनडरो स्टेडियम का भी अवलोकन किया। उन्होंन कहा कि यदि इनडोर स्टेडियम भी साई को दे दिया जाए तो यहां 50 बालिकाओं के लिए हास्टल खोला जा सकता है। उन्होंने कहा कि इनडोर स्टेडियम का ज्यादातर उपयोग खेलों के लिए होना चाहिए। यदि सालभर स्पोर्ट्स की गतिविधियां यहां होती है तो खेलों के लिए इसे खुला रखना चाहिए।
स्थानीय प्रशिक्षकों को प्राथमिकता
भारतीय खेल प्राधिकरण के महानिदेशक गोपालकृष्ण ने स्थानीय एनआईएस कोच को प्राथमिकता देने पर जोर दिया है। उन्होंने बताया कि राजनांदगांव और रायपुर के साई सेंटर के लिए कुल आठ प्रशिक्षकों की व्यवस्था की जाएगी। रायपुर में जूडो व वेटलिफ्टिंग के कोच पहल्े से ही मौजूद हैं। वालीबाल के लिए एनआईएस कोच चंदर सिंह के नाम पर जोर दिया गया। उन्हें जब पत्रकारों ने बताया कि खेल विभाग में फुटबाल की एनआईएस कोच सरिता कुजूर पदस्थ हैं और उन्होंने कई राष्ट्रीय खिलाड़ी भी दिए हैं तो उन्होंने हर्ष व्यक्त किया और कहा कि यदि खेल विभाग कोच देना चाहे तो वे इसके लिए तैयार हैं। इस  दौरान खेल संचालक जीपी सिंह ने भी यह बात स्वीकार कर ली। डीजी साई ने एक सवाल के जवाब में बताया कि हर साल करीब 450 एनआईएस कोच बनते हैं लेकिन इनमें से 50 या 60 कोच ही नियुक्त हो पाते  हैं। कोई राज्य सरकार की सेवा में रहता है तो कोई निजी संस्थानों में सेवा देता है।

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