10 फ़रवरी, 2011

प्रतिभएँ ग्रास रूट से खोजें





आगे बढ़ने के लिए विदेशी तकनीक अपनानी होगी : प्रशांति सिंग
रायपुर। चीन के ग्वांगझू में हाल ही में संपन्न हुए 23वें एशियाई खेलों में भारतीय महिला बास्केटबाल टीम का नेतृत्व करने वाली देश की स्टार बास्केटबाल खिलाड़ी प्रशांति सिंग ने ग्रास रूट से प्रतिभाएं खोजने और उन्हें खेल सुविधाएं मुहैया कराने पर ज्यादा जोर दिया है।
प्रशांति राजधानी में गुरुवार से शुरू हुई 25वें फेडरेशन कप बास्केटबाल प्रतियोगिता में दिल्ली की टीम का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। मूलत: वाराणसी की प्रशांति ने 2009 के वितयनाम की एशियन चैंपियनशिप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया था। भारतीय टीम ने इस प्रतियोगिता में रजत पदक हासिल किया था। प्रशांति ग्वांगझू के एशियाई खेलों में भारतीय महिला टीम की कप्तान थीं। टीम ने पांचवा स्थान हासिल किया था जबकि पुरुष टीम 13वें स्थान पर थीं। प्रशांति ने यहां पत्रकारों चर्चा करते हुए कहा कि बास्केटबाल में फारेन की टीमें तकनीक के आधार पर नंबर वन पर हैं। वहां ग्रास रूट तक के खिलाड़ियों को इनडोर स्टेडियम की सुविधाएं मिलती हैं। इसके अलावा हर खिलाड़ी वीडियो फुटेज देखकर अ•यास करता है और आगे बढ़ता है।  2003 में जूनियर इंडिया खेल चुकीं प्रशांति बताती हैं कि बास्कटेबाल में ट्रिपल एस की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और यह जरूरी भी है। ट्रिपल एस मतलब स्टेमिना, स्ट्रैंथ और स्पीड। वे बताती हैं कि भारतीय टीम स्टेमिना और स्पीड में तो ठीक है लेकिन स्ट्रैंथ में हम पीछे रह जाते हैं। प्रशांति के घर में कुल पांच बहनें हैं और इनमें चार बहनें इंडिया टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। एमटीएनएल में कार्यरत प्रशांति के मुताबिक भारतीय बास्केटबाल फेडरेशन ने जब से खिलाड़ियों को ग्रेडिंग सिस्टम में लाया है तब से खिलाड़ियों को काफी आर्थिक सहायता मिलती है। खिलाड़ियों के लिए यह खेल  महंगा है और माता-पिता भी संकोच करते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं रहा है। सी ग्रेड में ही जूनियर खिलाड़ियों को काफी सुविधाएं मिल रही हैं जिससे वे  आगे बढ़ रहे हैं। प्रशांति का कहना है कि कामनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स जैसे खेलों की मेजबानी करने के बाद खिलाड़ियों को एक्सपोज मिल रहा है। लोग बास्कटेबाल को भी गंभीरता से ले रहे हैं और घरों में भी खिलाड़ियों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह मीडिया का सपोर्ट भी है।

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