19 फ़रवरी, 2011

आरचरी में भी है पदक की उम्मीद

छत्तीसगढ़ की टीम  झारखंड रवाना , रेलवे के तीन खिलाड़ी


झारखंड के 34वें राष्ट्रीय खेलों में छत्तीसगढ़ की आरचरी की टीम भी हिस्सा ले रही है। टीम में स्थानीय खिलाड़ियो ंके अलावा दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी शामिल हैं। इससे छत्तीसगढ़ की आरचरी में पदक हासिल करने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी रिकर्ब, कंपाउंड और इंडियन तीनों राउंड में हिस्सा ले रहे हैं। टीम के खिलाड़ियों ने पूरी उम्मीद जताई है कि वे पदक लेकर ही लौटेंगे
रायपुर। शुक्रवार को यहां सांसद रमेश बैस के निवास स्थान पर छत्तीसग़ढ़ की आरचरी टीम के खिलाड़ियों को किट प्रदान की गई। श्री बैस छत्तीसगढ़ आरचरी एसोसिएसन के अध्यक्ष  हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में धीरे-धीरे इस खेल का विकास हुआ है और पूरे प्रदेश में इस समय एक हजार खिलाड़ी तैयार हो गए हैं। श्री बैस ने कहा कि झारखंड नेशनल गेम्स के लिए खिलाड़ियों ने कड़ा अभ्यास  किया है और निश्चय ही पदक मिलेगा। राज्य आरचरी एसोसिएशन के सचिव कैलाश मुरारका ने बताया कि छत्तीसगढ़ के 11 सदस्यी दल में महिला और पुरुष दोनों वर्ग के खिलाड़ी हैं। इनमें अंजली चंद्रा, श्रद्धा सोनवानी बिलासपुर, चंचल सिन्हा कांकेर, संतोषी कौशिक, साकरो  बेसरा, विश्वनाथ  नागेशिया, बी प्रणीता, कोच एएस मर्सी, टेकलाल कुर्रे, प्रबंधक योगेश उपाध्याय शामिल है। कंपाउंड इवेंट ने रेलवे के शिवनाथ नागेशिया और साकरो बेसरा जौहर दिखाएंगी। इंडियन राउंड में श्रद्धा सोनवानी, चंचल सिन्हा, प्रतिमा, संतोषी और अंजली हिस्सा लेंगी। बी प्रणिता रिकर्ब में जौहर दिखाएंगी। झारखंड नेशनल गेम्स में पहली बार टीम लेकर जा रहीं एनआईएस कोच एएस मर्सी ने पत्रकारों को चर्चा करते हुए बताया कि उन्होंने चार बार नेशनल गेम्स में खिलाड़ी के तौर पर् मणिपुर का प्रतिनिधित्व किया है लेकिन कोच के तौर पर पहली बार वे टीम लेकर जा रही हैं। उन्होंने कहा कि टीम में बिलासपुर रेलवे के खिलाड़ियों के शामिल होने से पदक की उम्मीदें बढ़ गई हैं। असम नेशनल गेम्स में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर  चुकीं बिलासपुर की श्रद्धा सोनवानी के लिए यह दूसरा मौका है जब वे राज्य का नेशनल गेम्स में प्रतिनिधित्व कर ही हैं। श्रद्धा ने बताया कि पिछले नेशनल गेम्स में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों का प्रदर्शन का्रफी खराब रहा था क्योंकि उस दौरान खिलाड़ियों के पास कोच, उपकरण व मैदान जैसी बुनियादी सुविधाएं  नहीं थीं। श्रद्धा असम के 33वें नेशनल गेम्स में टाप-32 की फाइट तक पहंची थीं लेकिन इसके आगे का रास्ता वे तय नहीं कर पाईं। श्रद्धा ने उम्मीद जताई कि इस बार वे बेहतर से बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेंगी। टीम की अन्य खिलाड़ियों चंचल सिन्हा, प्रतिमा आदि ने भी यही कहा।
पुरस्कार मिला तो आधा पैसा संघ को देंगे रेलवे के खिलाड़ी

छत्तीसगढ़ की टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे रेलवे के खिलाड़ियों ने घोषणा की है कि यदि वे पदक हासिल करते हैं और पदक हासिल करने पर उन्हें राज्य सरकार से कोई भी नगद पुरस्कार मिलता है तो वे उसकी आधी राशि खेल उपकरणों के लिए राज्य आरचरी संघ को देंगे। यह जानकारी छत्तीसगढ़ आरचरी एसोसएिशन के सचिव कैलाश मुरारका ने दी। उन्होंने बताया कि यह पहला मौका है जब खिलाड़ियों ने इस खेल के विकास और दूसरे खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए यह निर्णय लिया है। वैसे तो खिलड़ियों को संघ से लेने का अधिकार है लेकिन खिलाड़ी जब संघ के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो जाएं तो किसी भी खेल का विकास हो सकता है। सांसद रमेश  बैस ने भी रेलवे के खिलाड़ियों के इस निर्णय की सराहना की।
इन पर टिकी रहेंगी निगाहें

झारखंड नेशनल गेम्स में छत्तीसगढ़ की टीम का प्रतिनिधत्व कर रहे रेलवे के शिवनाथ नागेशिया, बी प्रणिता और साकरो बेसरा पर निगाहें लगी रहेंगी। शिवनाथ नागेशिया मूलत: झारखंड के रहने वाले हैं और वर्ष 2002 के हैेदरबाद नेशनल गेम्स में रिकर्ब का स्वर्ण पदक हासिल किया था। वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर •ाी •ाारतीय टीम का कई बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वर्ष 2005 में वियतनाम की एशियन ग्रांप्री आरचरी चैंपियनशिप में उन्होें •ाारतीय टीम के लिए कांस्य पदक हासिल किया था।  थाइलंैड में वर्ष 2005 में हुए एशिया कप में उन्होंने कंपाउंड इवेंट में गोल्ड मेडल हासिल किया था। इसके बाद से वे कंपाउंड में जौहर दिखा रहे हैं। शिवानाथ ने कहा कि उनका पूरा प्रयास रहेगा कि वे राज्य के लिए पदक हासिल करें और उन्हें अपने खेल पर पूरा भरोसा है। रेलवे की ही साकरो बेसरा  मूलत: झारखंड की हैं और इन खिलड़ियों ने भारतीय टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक भी हासिल किया है। साकरो ने झारखंड के लिए 2007 में गोवाहाटी नेशनल गेम्स में हिस्सा लिया था और वे चौथे स्थान पर रहीं थीं। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बी प्रणिता ने भी भारतीय टीम के लिए पदक हासिल किया है।
रायपुर के साई हास्टल में आरचरी की करेंगे मांग : बैस
छत्तीसगढ़ आरचरी एसोसएिशन के अध्यक्ष और सांसद रमेश बैस ने कहा है कि साई हास्टल में आरचरी जैसे खेलों को शामिल करने से इस खेल का काफ विकास होगा लेकिन यह खेल राजनांदगांव के साई हास्टल की बजाए रायपुर के साई हास्टल में होना चाहिए। रायपुर राजधानी है और   मुख्य सेंटर भी। इसके अलावा यहां यातायात व अन्य कई सुविधाएं  हैं। श्री बैस ने कहा कि वे रायपुर के साई हास्टल मे आरचरी को शामिल करने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। वे डीजी साई गोपालकृष्ण से भी इस संबंध में मुलाकात कर चर्चा करेंगे। इसके अलावा खेल मंत्री लता उसेंडी से भी चर्चा की जाएगी। राजधानी में आरचरी एकेडमी के लंबित प्रस्ताव को लेकर उन्होंने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह से चर्चा की गई है और डा. सिंह नई राजधानी में जमीन देने को तैयार हैं जहां कई खेलों के लिए कोर्ट बनाने की योजना है लेकिन नई राजधानी खिलाड़ियों के लिए काफी दूर है। इसलिए साइंस कालेज हास्टल में एकेडमी खोलने की मांग की गई है।

कोई टिप्पणी नहीं: