07 फ़रवरी, 2011

ट्रैक पर दौड़ेगी लोहांडीगुड़ा की बाला



झारखंड नेशनल गेम्स में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद
रायपुर। झारखंड में 12 फरवरी से शुरू होने वाले 34 वें राष्ट्रीय खेलों की एथलेटिक्स स्पर्धा में लोहांडीगुड़ा की बालमती भी छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। टीएसआरडीएस से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली बालमती की इच्छा राष्ट्रीय टीम से प्रतिनिधित्व करते हुए देश के लिये सोना लाने की है। छत्तीसगढ़ की टीम में बालमती के चयन होने पर टाटा स्टील के कृष्णनंदन (चीफ कारर्पोरेट रिलेशन टाटा स्टील),श्री वरूण झा(वाईस प्रेसिडेंट छत्तीसगढ़ प्रोजेक्ट टाटा स्टील) ने अपनी शु•ाकामनाएं दी और उसकी सफलता की कामना की है।
झारखंड के रांची में 12 से 26 फरवरी तक होने वाले 34 वें राष्ट्रीय खेलों में भाग लेने वाली छत्तीसगढ़ की आठ सदस्यीय टीम में स्थान प्राप्त करने वाली बालमती बस्तर की एक मात्र एथलीट है। टाटा स्टील रूरल डेव्हलपमेंट सोसायटी (टीएसआरडीएस) से बालमती ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है। टाटा स्टील ने अपने टीएसआरडीएस के माध्यम से प्रस्तावित संयंत्र स्थल के प्रभावित लोगों के सामाजिक और आर्थिक विकास की दिशा में जो शुरूआत की है उसके नतीजे आने शुरू हो गये और बस्तर आदिवासी अंचल के बच्चे विभिन्न विधाओं में अपना हुनर दिखा रहे हैं। छत्तीसगढ़ की ओर से प्रतिनिधित्व करने वाली बालमती लोहांडीगुड़ा शासकीय कन्या हायर सेंकडरी स्कूल की कक्षा 11 वीं की छात्रा है। बालमती का प्रारंभ से खेलों के प्रति लगाव था और विशेषकर उसकी रूची दौड़ में थी। उसकी रूची को ध्यान में रखते हुए टीएसआरडीएस के खेल प्रशिक्षक शंकर पटेल का ध्यान उस पर गया और उन्होंने बालमती की प्रतिभा को तराशना शुरू किया। इसका परिणाम भी जल्द ही दिखाई दिया जब बालमति ने पेंड्रा में संपन्न हुई राज्य स्तरीय शालेय खेलों में बस्तर संभाग की ओर से प्रतिनिधित्व करते हुए 1500 मीटर, 3000 और 5000 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक हासिल किया।  सरल व शर्मीली बालमती आज के खेलों की चकाचौंध से पूरी से तरह से दूर है उसे केवल इतना ही मालूम है कि उसे दौड़ना है और जो विश्वास उस पर व्यक्त किया गया है उस पर उसे खरा उतरना है। छत्तीसगढ़ की ओर से प्रतिनिधित्व करने वाली बालमती ने इससे पूर्व राष्ट्रीय शालेय खेलों में छत्तीसगढ़ की ओर से कोलकाता, केरल, उत्तर प्रदेश, मुंबई, बिहार और अमृतसर में हुई प्रतियोगिताओं की ट्रैक एंड फील्ड में दौड़ लगाई है। राष्ट्रीया खेलों में राज्य की टीम में अपने चयन को लेकर वह काफी प्रसन्न है, बालमती ने कहा कि जब उसे टीम में लिये जाने की सूचना मिली तो पहले तो उसे सहसा विश्वास नहीं हुआ लेकिन बाद में उसके साथ अ•यास करने वाली अन्य खिलाड़ियों से उसे जब बधाई मिली तो उसे यकीन हुआ। राज्य की टीम में चयन होने का श्रेय बालमती ने टीएसआरडीएस और प्रशिक्षक शंकर पटेल को दिया। बालमती ने टीम ने 1500 व 3000 ,5000 मीटर दौड़ में टीम चयन ट्रायल के दौरान सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए जो समय निकाला उससे चयनकर्ता काफी प्रभावित हुए। इन दिनो बालमती भिलाई के जयंती स्टेडियम में चल रहे टीम प्रशिक्षण शिविर में राज्य टीम के प्रशिक्षक राधाकृष्णनन पिल्लई के मार्गदर्शन में अभ्यास कर रही है। प्रशिक्षक श्री पिल्ले ने कहा कि बालमती काफी प्रतिभाशली खिलाड़ी हैं और प्रशिक्षण अवधि के दौरान जो समय वह निकाल रही है उससे यह कहा जा सकता है कि वह पदक हासिल करेगी।
मां की ख्वाहिश, बेटा भी हिस्सा ले खेलों में
राष्ट्रीय खेलों में छत्तीसगढ़ की ओर से प्रतिनिधित्व मिलने पर बालमती की मां ओमबती यादव आंगनबाड़ी कार्यकर्ता है और बालमती के राज्य एथलेटिक टीम में चयन होने पर वे बेहद प्रसन्न मुद्रा में थी। ओमबती भिलाई में प्रशिक्षण ले रही बालमती से मिलने के लिये लोहांडीगुड़ा से भिलाई पहुंची थी। उन्होंने कहा कि 6 बच्चों में उनकी दो लड़कियां बालमती और सुमित्रा को बचपन से ही खेलों के प्रति बेहद लगाव है और खेलों के प्रति उनकी दिलचस्पी को देखते हुए उन्होने दोनों को खिलाड़ी बनाने का निर्णय लिया। बालमती जहां ट्रैक पर दौड़ रही हैं वहीं उसकी छोटी बहन सुमित्रा खो-खो  में बस्तर की ओर से प्रतिनिधत्व कर चुकी है। बालमती के राष्ट्रीय खेलों में प्रदर्शन और पदक जीतने के बारे में ओमबती ने कहा कि उसका प्रदर्शन हमेशा से अच्छा रहा है और वह अपना बेहतर प्रदर्शन करना भी चाहती है उसे परी उम्मीद है कि बालमती अपने राज्य के लिये पदक अवश्य जीतेगी। लेकिन इसके बाद भी उस दिन के प्रदर्शन और भाग्य पर भी बहुत कुछ निभर  रहेगा। ओमबती ने कहा कि वह अपनी दो लड़कियों की तरह अपने एक  मात्र छोटे लड़के को भी खिलाड़ी बनाना चाहती है। अपनी दोनों लड़कियों के इस मुकाम तक पहुंचने के लिये उन्होंने टाटा स्टील रूरल डेव्हलपमेंट सोसायटी (टीएसआरडीएस) को पूरा श्रेय दिया और कहा कि चूंकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता होने के नाते वे अपनी लड़कियों के खेलों की ओर ध्यान नहीं दे पाती ऐसे में टीएसआरडीएस के प्रशीक्षक ने इस कमी को पूरा कर दिया।

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