07 मार्च, 2011

सीओए पर सस्पेंस बरकरार

सभी की नजरें लगी हैं सचिव पद पर
रायपुर। छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ यानी सीओए की नई कार्यकारिणी को लेकर सस्पेंस बरकरार है। प्रदेश के खेल जगत की नजरें लगी  हैं सचिव पद पर। यह पद इसलिए  काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह सीओए के अध्यक्ष हैं। ऐसे में जिस राज्य का राजा किसी खेल संगठन का अध्यक्ष हो तो उस खेल संघ का सचिव पद गरिमामय हो जाता है। सचिव  पद के अलावा कार्यकारी अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष जैसे पदों पर भी चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है।
यदि राज्य निर्माण के पिछले एक दशक के इतिहास पर नजर डालें तो छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ शुरू से ही चर्चा का विषय बना रहा है। राज्य निर्माण के शुरुआती दौर में तो सीओए प्रदेश के दो दिग्गजों की प्रतिष्ठा का प्रश्न भी  बन गया था और इसकी गूंज दिल्ली तक उठी थी। हालांकि ये काफी पुरानी बातें हैं जिनका इस समय कोई औचित्य नहीं है। इस समय सभी को इंतजार है 13 मार्च को होने वाली छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की बैठक का जिसमें नई कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा। इस बैठक की घोषणा होने के बाद प्रदेश के खेल जगत ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक जगत  में भी चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है। खासतौर पर नगरीय प्रशासन मंत्री राजेश मूणत के राज्य वालीबाल संघ का अध्यक्ष बनने के बाद नए समीकरणों की बात कही जा रही है। खेल सूत्रों का कहना है कि श्री मूणत के एकाएक खेल जगत में कदम रखने के पीछे •ाविष्य में कुछ नई कहानी सामने आ सकती है। हालांकि श्री मूणत ने इस बात से इनकार जरूर किया है कि वालीबाल संघ का अध्यक्ष बनने के पीछे उनका मकसद छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ का पद हासिल करना है लेकिन उन्होंने यह कहकर सस्पेंस बरकरार रखा है कि जो भी जवाबदारी मिलेगी उसे वे पूरी तरह निभाएंगे। जाहिर है कि श्री मूणत यदि सचिव न भी बनें तो कार्यकारी अध्यक्ष जैसे पद उन्हें दिया जा सकता है। श्री मूणत के अध्यक्ष बनने के दूसरे दिन प्रदेश के खेल जगत में इस  बात की चर्चा जोरो पर थी कि यह 37वें राष्ट्रीय खेलों के की पूर्व तैयारी भी है जिससे आयोजन की पूरी कमान सरकार के पास रहे। वैसे बिना सरकार के सहयोग के कोई भी राज्य राष्ट्रीय खेलों का सफल आयोजन नहीं कर सकता। सीओए के मौजूदा सचिव बशीर अहमद खान का कहना है कि वे सीओए के सचिव पद के दावेदार नहीं हैं। खेल सूत्रों का कहना है कि न्यू सर्किट हाऊस में 13 मार्च को शाम 6.30 बजे से होने वाली सीओए की बैठक पूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ होगी और इस बैठक के एक दिन पूर्व पूरी कार्यकारिणी पर गहन मंथन किया जाएगा। इसके अलावा कई तकनीकी पहलुओं और नियम-कानून की भी गहनता से समीक्षा की जा रही है।
क्या बनेंगी उपसमितियां?
कार्यकारिणी में कई राज्य खेल संघों के पदाधिकारियों को प्रमुखता देने की बात सामने आ रही है। इसके अलावा 37वें राष्ट्रीय खेलों के आयोजन को देखते हुए सीओए की कई उपसमितियां भी बनाई जा सकती है जिससे मान्यता प्राप्त राज्य खेल संघों का कोई भी पदाधिकारी असंतुष्ट नहीं रहे। वह आयोजन समिति हो या तकनीकी समिति और या  फिर वित्त, प्रबंधन, स्वागत, भोजन, आवास या अन्य कोई समिति। माना जा रहा है कि प्रदेश के खेल जगत को सीओए के साथ एक सूत्र में पिरोने का यह काफी अच्छा रास्ता हो सकता है। हालांकि राज्य ओलंपिक संघ के जिन पदाधिकारियों ने पूर्व में इस्तीफा दिया था उन्हें और मौजूदा सचिव को भी सीओए की नई कार्यकारिणी में प्रमुखता देने की बात सामने आ रही है।
हो सकती है कुछ घोषणाएं...
छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की 13 मार्च को होने वाली बैठक काफी अहम मानी जा रही है। प्रदेश के खेल जगत के लिए कुछ घोषणाएं भी हो सकती हैं। सीओए अध्यक्ष और मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने अध्यक्ष बनने के बाद पहली बैठक में काफी महत्वपूर्ण घोषणाएं की थी जिन पर खासा अमल हुआ। डा. सिंह ने राज्य निर्माण के दस साल पूर्ण होने पर राज्य खेल उत्सव की घोषणा की थी। इस घोषणा पर अमल करते हुए प्रदेश में साढेÞ तीन करोड़ की लागत से खेलोत्सव का कई दिनों तक भव्य आयोजन किया गया। डा. सिंह ने बास्केटबाल के बडे टूर्नामेंट की घोषणा की थी और राजधानी में पिछले माह ही 25वीं फेडरेशन कप बास्केटबाल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इसके साथ ही उन्होंने खेल सुरक्षा निधि का भी गठन किया था जिसमें बाकायदा 50 लाख रुपए की  व्यवस्था की गई। यह डा. सिंह के ओलंपिक संघ का अध्यक्ष बनने की सौगात थी और प्रदेश के खेल जगत की उनसे और भी अपेक्षाएं बढ़ गई हैं।



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