16 अप्रैल, 2011

विधानसभा अध्यक्ष भी कूदे खेल के मैदान में


छत्तीसगढ़ ताइक्वांडो संघ के अध्यक्ष बने मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ और छत्तीसगढ़ स्क्वैश संघ का अध्यक्ष बनने के बाद विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक भी खेल के मैदान में कूद गए हैं। कौशिक छत्तीसगढ़ ताइक्वांडो संघ के अध्यक्ष बनाए गए हैं और उन्होंने कहा है कि उन्हें जो दायित्व दिया गया है उसका वे पूरी जिम्मेदारी के साथ निवर्हन करेंगे।
शनिवार को यहां होटल ग्रांड इंटरनेशनल में छत्तीसगढ़ ताइक्वांडो संघ की 11वीं वार्षिक सामान्य सभा की बैठक का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य एजेंडा था विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक को राज्य संघ का अध्यक्ष बनाना। स्वयं कौशिक नहीं जानते थें कि उन्हें अध्यक्ष पद पर विराजमान होने का प्रस्ताव दिया जाएगा। ऐसा उन्होंने अपने संबोंधन में कहा। बैठक में राज्य ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष बशीर अहमद खान और राज्य टेनिस संघ के सचिव गुरुचरण सिंह होरा तथा राज्य ताइक्वांडो संघ के सचिव रामपुरी गोस्वामी ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा जिस पर सभी ने सहमती जताई। पूर्व अध्यक्ष आरएल आम्रवंशी को चेयरमैन बनाया गया है। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि ताइक्वांडो को गांव-गांव तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे और सभी  को मिलकर अपने-अपने दायित्वों का निवर्हन करना होगा। कौशिख ने  कहा कि छत्तीसगढ़ को 37वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी मिली है जो गर्व की बात है। इससे हमारा राज्य पूरे देश में ख्याति हासिल करेगा। झारखंड में हाल ही में राष्ट्रीय खेलों का आयोजन किया गया था जिससे झारखंड की पहचान पूरे देश में हो गई है। बैठक में चेयरमैन आरएल आम्रवंशी सहित राज्य ताइक्वांडों संघ के तमाम पदाधिकारी, जिला इकाइयों के पदाधिकारी और कई खिलाड़ी मौजूद थे। इस दौरान कामनवेल्थ गेम्स चेन्नई में राज्य के लिए ताइक्वाडों में पदक हासिल करने वाली संगीता दत्ता और रजनी लहरे को पदक व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम का संचालन छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के कोषाध्यक्ष डा. विण्णु श्रीवास्तव ने किया।

कई दिग्गज हैं खेल के मैदान में
बीते कुछ सालों में खेल के मैदान में कई दिग्गज नेताओं ने कदम रखा है। इसकी एक वजह यह भी है कि खेल में बिना किसी विशेष परिश्रम के प्रचार मिलता है। राज्य के अधिकांश खेल संघों में प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा नेताओं और मंत्रियों का कब्जा है। हालांकि इससे खेलों को मजबूत आधार भी मिला है। छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के अध्यक्ष डा. रमन सिंह छत्तीसगढ़ स्क्वैश् संघ के भी अध्यक्ष हैं। संसदीय सचिव विजय बघेल छत्तीसगढ़ वेटलिफ्टिंग संघ के अध्यक्ष हैं तो वे राज्य ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष भी हैं। हाल ही में राजेश मूणत ने छत्तीसगढ़ वालीबाल संघ के अध्यक्ष पद की कमान संभाली है. खेल मंत्री लता उसेंडी  राज्य ओलंपिक संघ की उपाध्यक्ष हैं। सांसद रमेश बैस छत्तीसगढ़ आरचरी एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं तो भाजपा नेता कैलाश मुरारका सचिव हैं। शिक्षा सचिव  बृजमोहन अग्रवाल भारतीय एमेच्योर शरीर सौष्ठव संघ के अध्यक्ष हैं।

07 अप्रैल, 2011

खेलों को भी जरूरत है अन्ना हजारे की. . .


इस देश को भ्रष्ट्राचार से मुक्ति दिलाने सड़क की लड़ाई लड़ रहे प्रख्यात समाजसेवी अन्ना हजारे को शत-शत प्रणाम, चलो किसी ने तो पहल की करप्शन रूपी इस दानव को खत्म करने की। दानव तो सतयुग में भी थे लेकिन वे प्रत्यक्ष थे और इनके अंत के लिए देवताओं को भी प्रत्यक्ष ही लड़ाई लड़नी पड़ती थी। कलयुग में भी दानव होते हैं लेकिन वे करप्शन के समान कभी टेबल के नीचे तो कभी कोंटे में छिपकर देशवासियों पर हमला बोलते हैं। करप्शन कहां नहीं है, हर शहर और हर गांव ही नहीं बल्कि गली-कूचे तक पहुंच गया है। ऐसे में भला खेल का मैदान कैसे पीछे रह सकता है जो आज तक कामनवेल्थ गेम्स के घोटालों से उबर नहीं सका है। सच पूछिए तो खेल के मैदान से भ्रष्ट्राचार को हटाने के लिए भी अन्ना हजारे की जरूरत है। खेल में क्या भ्रष्ट्राचार नहीं होता बल्कि यह आम कहावत हो चली है कि जितनी राजनीति खेल में होती है उतनी तो राजनीति में भी नहीं होती। इसी राजनीति के पीछे भ्रष्ट्राचार का दानव भी पल रहा होता है। क्या घोटाले सिर्फ कामनवेल्थ गेम्स और झारखंड नेशनल गेम्स में ही होते हैं? नहीं, बल्कि देश के हर राज्य के खेल जगत में होते रहे हैं। मामला किसी खिलाड़ी को टीम इंडिया में शामिल करने का हो या फिर किसी राज्य या राष्ट्रीय स्पर्धाओं की मेजबानी करने के लिए अनुदान के तौर पर मिलने वाली लाखों रुपए की राशि के दुरुपयोग करने का। स्कूली खिलाड़ियों को ही ले लीजिए। आज भी राष्ट्रीय स्पर्धाओं में वे शिरकत करने जाते हैं तो बिना किसी रिजर्वेशन के एक ही डिब्बे में ठसा-ठस वे राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं और थक-हार कर पहुंचते ही खेलने की मजबूरी लिए पराजय का मुंह देखकर वापस लौट आते हैं। क्या यह भ्रष्ट्राचार नहीं है? खेल के मैदान से जुड़ा हर शख्स जानता है कि आयोजनों और ताम-झाम में लाखों रुपए खर्च करने से खिलाड़ी तैयार नहीं होते बल्कि खिलाड़ी मैदान, खेल उपकरण और ट्रेनिंग की बेहतर से बेहतर सुविधाओं से तैयार होते हैं। फिर भी आयोजन होते हैं। क्या यह भ्रष्ट्राचार नहीं है? हर खेल विशेषज्ञ और खेल अधिकारी भी यह जानता है कि राज्य के सभी जिलों और विकासखंडों में 99 फीसदी राज्य खेल संघों की इकाई नहीं है, फिर भी उन्हें मान्यता और लाखों रुपए का अनुदान मिलता है जिसका कोई हिसाब नहीं। क्या यह भ्रष्ट्राचार नहीं है? नेता, मंत्री, अफसर सभी खेल संघों पर कब्जा जमाए बैठे हैं क्योंकि उनके अपने निजी स्वार्थ हैं, क्या यह भ्रष्ट्राचार नहीं है। छत्तीसगढ़ के खेल जगत में ही जितना पैसा इन दस सालों में आयोजनों और ताम-झाम में बहा दिया गया, उतना खेल के मैदानों और अधोसंरचनाओं में बहाया जाता तो इस राज्य की तस्वीर ही कुछ और होती। यह तो बेहतर है कि मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ के खेल जगत के लिए खुले दिल से खजाना खोला है और उद्योगों के साथ खेल संघों को जोड़कर सभी को लखपति बना दिया है। लेकिन हम मुख्यमंत्री डा. सिंह का ओलंपिक में स्वर्ण, रजत या कांस्य हासिल करने का सपना पूरा नहीं कर सके। फिलहाल तो अन्ना हजारे जैसे समाजसेवियों की जरूरतें देश-प्रदेश के खेल जगत को भी है जिससे पाक समझे जाने वाले इस क्षेत्र को नापाक इरादों से बचाए रख सकें।

 

02 अप्रैल, 2011

इस जीत के लिए कोई हैडिंग नहीं. . .



 
धोनी के धुरंदरों ने कर ली दुनिया मुट्ठी में. . .
अनिश्चितता के इस खेल यानी क्रिकेट के  सरताज भारत ने अंतत: दुनिया अपनी मुट्ठी में कर ली। पूरे 28 साल बाद आईसीसी क्रिकेट 2011 का ताज पहनकर टीम इंडिया ने साबित कर दिखाया कि दुनिया में वही और एकमात्र वही क्रिकेट का बिग बॉस है। सच पूछिए तो इस जीत के लिए कोई हैडिंग ही नहीं है। यह कहने में अतिश्योक्ति नहीं होगी कि देशभर के समाचार पत्रों को इस जीत के लिए हैडिंग लगाने में घंटों सोचना पड़ा होगा और कई ने तो जीत की हैडिंग की तैयारियां पहले दिन ही कर ली होंगी। टीम इंडिया से जिस जीत की अपेक्षा की जा रही थी उस पर वह पूरे सौ नहीं बल्कि पूरे दो सौ फीसदी खरी उतरी। हर भारतीय का सपना था टीम इंडिया 28 साल बाद फिर से विश्वविजेता बने और वह सपना भी पूरा हो गया। श्रीलंकाई शेरों को जिस अंदाज में भारत ने ध्वस्त किया वह न केवल आक्रामक था बल्कि अद्भूत, करशिमाई और निराला भी था। कहा जाए तो कोई शब्द ही नहीं मिलते इस अंदाज को बयां करने के लिए। जीत के बाद मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में सिर्फ दर्शक ही नहीं बल्कि हर भारतीय खिलाड़ी की आंखों में जीत के आंसू थे। क्या हरभजन और क्या धोनी, युवराज सभी  से जीत की खुशी बर्दाश्त नहीं हो रही थी और आंखों से खुशियों के मोती छलक पड़े। यह नजारा पूरे विश्व ने देखा और देशवासियों को 28 साल बाद यह नजारा देखने को मिला जब भारतीय खिलाड़ियों की आंखों में खुशी के आंसु थे। यह जीत कोई मामूली जीत नहीं थी बल्कि वह इतिहास रच गई जिसकी 1983 के बाद हर वर्ल्ड कप में हर देशवासी और हर खिलाड़ी इंतजार किया करते थे। भारत ने एक और इतिहास रचा और वह यह कि किसी एशियाई टीम ने दूसरी बार विश्व कप का खिताब हासिल किया है। २ अप्रेल २०११ की रात हमेशा याद रहेगी. ये रात दिवाली की रात थी जो लम्बे अरसे के बाद पुरे देशवसियो को नसीब हो सकी. फिर कपिल के बाद  धोनी ने भी साबित कर दिखाया की वे इंडिया के लिए कितने लकी हैं.

ये हुआ था 28 साल पहले

सन 1983  में लगातार तीसरे वर्ष इंग्लैंड ने वर्ल्ड कप की मेजबानी की थी। 1983 का विश्व कप भारतीय टीम के लिए बहुत अहम साबित हुआ था।  कमज़ोर समझी जाने वाली भारतीय टीम ने दिग्गजों को धूल चटाई और पहली बार  कप पर क़ब्जा  किया। दूसरी ओर लगातार तीन बार विश्वकपप  का ख़िताब जीतने का वेस्टइंडीज़ का सपना चकनाचूर हो गया। फाइनल  में वेस्टइंडीज़ का मुक़ाबला था भारत के साथ था।  एक ओर थी दो बार ख़िताब जीतने वाली वेस्टइंडीज़ की टीम तो दूसरी ओर थी पहले के विश्व कप मैचों में ख़राब प्रदर्शन करने वाली भारतीय टीम. वेस्टइंडीज़ ने भारत को सिर्फ़ 183 रनों पर समेट कर शानदार शुरुआत की और जवाब में एक विकेट पर 50 रन भी बना लिए।  वेस्टइंडीज़ समर्थक जीत का जश्न मनाने की तैयारी करने लगे लेकिन मोहिंदर अरमनाथ और मदन लाल ने शानदार गेंदबाज़ी की और मैच का पासा ही पलट दिया।  हेंस और रिचर्ड्स का अहम विकेट मदन लाल को मिला तो बिन्नी की गेंद पर क्लाइव लॉयड को बेहतरीन कैच लपका कपिल देव ने. बाद में दुजों (25) और मार्शल (18) ने पारी संभालने की कोशिश की लेकिन उनके आउट होते ही मैच उनकी झोली से निकल गया।  दोनों को मोहिंदर अमरनाथ ने आउट किया. अमरनाथ ने होल्डिंग को एलबीडब्लू आउट कर भारत को शानदार जीत दिलाई. वेस्टइंडीज़ की पूरी टीम 140 रन बनाकर आउट हो गई और भारत पहली बार विश्व कप का विजेता बना। इसके 28 साल बाद भारत ने 2011 में श्रीलंका को छह विकेट से पराजित कर खिताब अपने नाम कर लिया। श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए महेला जयवर्धने के शतक की बदौलत भारत को 275 रन का विजय लक्ष्य दिया। भारत ने कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी पारी और गौतम गंभीर के 97 रनों की बदौलत यह मैच छह विकेट से जीत लिया।

एक नजर
वर्ल्ड कप क्रिकेट की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिता है जो हर चार साल में एक बार होती है। यह प्रतियोगिता 36 साल पहले 1965 में इंग्लैंड से शुरू हुई थी। पहले यह प्रतियोगिता 60 ओवरों की होती थी. पहले खिलाड़ी उजली पोशाक में होते थे, तो समय के साथ हर चीज़ रंगीन होता गया। खिलाड़ियों ने रंगीन पोशाकें पहननी शुरू की, गेंद उजली हो गई और अंपायर तक रंगीन पोशाक में नज़र आने लगे. मैच दिन-रात के होने लगे और 50-50 ओवरों के मैच होने लगे। पहले तीन विश्व कप इंग्लैंड में आयोजित हुए और तीन में दो विश्व कप का ख़िताब वेस्टइंडीज़ ने जीता. लेकिन 1983 का विश्व कप जीतकर भारत ने बड़ा उलटफेर किया। भारतीय टीम 1983 के बाद वर्ष 2003 में विश्व कप के फाइनल में पहुँची, लेकिन आस्ट्रेलिया ने उसे रौंद दिया। आस्ट्रेलिया ने सबसे ज़्यादा चार बार विश्व कप का ख़िताब जीता है और तीन बार लगातार ख़िताब जीतकर नया रिकॉर्ड बनाया है। वर्ष 2007 का विश्व कप भारत के लिए दुस्वप्न साबित हुआ और टीम पहले ही दौर में बाहर हो गई. बांग्लादेश की टीम ने भी उसे धूल चटाई और फिर भारत का विश्व कप जीतने का सपना फिर टूट गया। २८ साल बद्द ये सपना एक बार फिर पूरा हुआ.

ये था वर्ल्ड कप का फॉर्मेट
10 वें क्रिकेट वर्ल्ड कप में 14 टीमंों ने हिस्सा लिया। इस बार वर्ल्ड कप में 49 मैच खेले गए। इन टीमों को दो ग्रुपों में बांटा गया।  टीमों का विभाजन उनकी आईसीसी रैंकिंग के हिसाब से किया गया। हर ग्रुप में टीमें एक - दूसरे से खेलीं। हर ग्रुप में टॉप पर रहने वालीं दो - दो टीमें क्वार्टर फाइनल में खेलीं। क्वार्टर फाइनल  जीतने वाली चार टीमें सेमीफाइनल पहुंची और जीतने वाली दो टीमें फाइनल में पहुंची जिनमें मेजबान भारत और श्रीलंका शामिल थीं।  यह फॉर्मेट   1996 के वर्ल्ड कप की तरह था। 

यूडीआरएस
इस बार आईसीसी ने अंपायर डिसीजन रेफर सिस्टम ( यूडीआरएस ) लागू करने का फैसला किया। इसके तहत दो मामलों में टीमें अंपायर के फैसलों के खिलाफ अपील कर सकेंगी। इसमें हॉट स्पॉट तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा , मगर हॉक आई तकनीक का इस्तेमाल करना लागू किया गया था।





01 अप्रैल, 2011

राजीव जैन अध्यक्ष और राजेश पटेल सचिव बने



  राज्य बास्केटबाल संघ की वार्षिक सभा में निर्णय
रायपुर। बिलासपुर में संप्पन्न हुई छत्तीसगढ़ बास्केटबाल संघ की साधारण सभा की बैठक में नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। इस बैठक में मुख्य संरक्षक अरविंद जैन, संरक्षक वीके अरोरा, नवीन सिंह, रूपा जैन, जी स्वामी, चेयरमैन सोनमणी बोरा, अध्यक्ष राजीव जैन, कार्यकारी अध्यक्ष नरेश डाकलिया, महासचिव राजेश पटेल, कोषाध्यक्ष कमल सिंघल बनाए गए। बैठक में कार्यकारिणी समिति का सर्वसम्मति से अप्रैल 2011 से मार्च 2015 तक चुनाव किया गया। प्रदेश बास्केटबाल संघ की कार्यकारिणी इस प्रकार है : मुख्य संरक्षक - अरविन्द जैन(प्रबंध निदेशक, भिलाई  इंजी कारपोरेशन, भिलाई ), संरक्षक:- व्ही. के़ अरोरा(प्रबंध निदेषक, भिलाई इस्पात संयंत्र),नवीन सिंह(डिप्टी सी एम एम, एस ई सी रेल्वे बिलासपुर), रुपा जैन (भिलाई इंजी कारपोरेश),जी़ स्वामी (संस्थापक,बालाजी स्कुल रायपुर), चेयरमेन:- सोनमोनी बौरा, आई ए़ एस (क्लेक्टर,बिलासपुर जिला), अध्यक्ष:-राजीव जैना(कार्यपालक निदेषक, भिलाई इंजी कारपोरेषन, कार्यकारी अध्यक्ष:-नरेश  डाकलिया(महापौर, राजनांदगाव नगर निगम एवं अध्यक्ष राजनांदगाव जिला), वरिश्ठ उपाध्यक्ष:- बृजमोहन सिंह(अध्यक्ष दुर्ग जिला), अजय प्रताप सिंह(अध्यक्ष रायगढ़ जिला), अनिल पुसदकर(रायपुर जिला), उपाध्यक्ष :- कुमार योगेष(सचिव दुर्ग जिला), एस आर ए रिजवी (अध्यक्ष बी एस पी बास्केटबाल कल्ब एवं उपमहाप्रबंधक बी एस पी), अकबर राम कुर्राम (सचिव छग़ पुलिस), विनोद नेमी (अध्यक्ष जाजगीर जिला), निलांजल नियोगी (खेल अधिकारी, एस़ ई़ सी़ रेल्वे बिलासपुर), एस सी त्रीपाठी (सचिव धमतरी जिला), श्रीमति मधु तिवारी (अध्यक्ष कर्वधा जिला), महासचिव :- राजेष पटेल(उपप्रबंधक खेल, भिलाई इस्पात संयंत्र एवं सचिव बी एस पी बास्केटबाल कल्ब), संयुक्त सचिव:- संस्कार द्विवेदी(सचिव, जांजगीर जिला ), विजय डब्लयु़ डी़ देष्पाण्डे (कोशाध्यक्ष बी एस पी बास्केटबाल कल्ब), प्रमोद सिह ठाकुर(सचिव रायपुर नगर निगम), राजेन्द्र तम्बोली (सचिव कर्वधा जिला), दिनेष षर्मा(सचिव,राजनांदगाव नगर निगम बास्केटबाल संघ), अमित मंडल(सचिव, बिलासपुर जिला), कोशाध्यक्ष:-कमल सिंघल(अध्यक्ष दुर्ग नगर निगम बास्केटबाल संघ), सदस्य:-रविन्द्र पटनायक(सचिव बस्तर जिला),षषि सिंह देव(अध्यक्ष सरगुजा जिला), मंजुल दीक्षीत (सचिव रायगढ़ जिला),सुनिल गौराहा(सचिव बिलासपुर नगर निगम बास्केटबाल संघ), गिरिष वाडेर (अध्यक्ष भाटापारा नगर बास्केटबाल संघ), राजेष पाण्डे (काशाध्यक्ष, जॉजगीर जिला), नमिता जैन (सचिव, राजनादगाव नगर निगम बास्केटबाल संघ), एम व्ही़ व्ही. जे़ सुर्य प्रकाष(सचिव भिलाई नगर निगम बास्केटबाल संघ ), इकबाल अहमद खान  (भिलाई इस्पात संयंत्र),विपिन गुप्ता (सचिव कोरबा जिला),सरजीत चक्रवर्ती (भिलाई इस्पात संयंत्र), सेलकषन कमेटी:- चेयरमेन:-साजी टी थामस(सचिव दुर्ग नगर निगम बास्केटबाल संघ), कॉरडीनेटर :- राजेश  प्रताप सिंह(सचिव सरगुजा जिला), आनंद सिंह (बिलासपुर जिला), टेक्निकल कमेटी चेयरमेन:-आऱ एस. गौर(एन आई एस कोच भिलाई इस्पात संयंत्र), कॉरडीनेटर :- विपिन बिहारी सिंह(एन आई एस कोच, बिलासपुर जिला),प्रविण बिसेन(बिलासपुर जिला), रेफरीज बोर्ड चेयरमेन:- एस दुर्गेश राज (कोच भिलाई इस्पात संयंत्र), कॉरडीनेटर:- सुखदेव सिंह (स्पोटर्स कोरडीनेटर भिलाई इस्पात संयंत्र), प्रीतम दास(द़ पु़ म़ रे़ बिलासपुर)। सलाहकार:- राम कुमार च्रन्दा (दुर्ग जिला)।

ये हुआ निर्णय0. 2011-2012 की 10 राज्य सबजूनियर बास्केटबाल प्रतियोगिता का आयोजन कवर्धा में मई के दूसरे सप्ताह में जिला बास्केटबाल संघ की मेजबानी में किया जाएगा।
0. 10वीं राज्य स्तरीय जूनियर बास्केटबाल प्रतियोगिता जून के दूसरे सप्ताप में जांजगीर में आयोजित की जाएगी।
0. 10वीं सीनियर राज्य बास्केटबाल प्रतियोगिता नवबंर के अंतिम सप्ताह में जगदलपुर, जांजगीर, दुर्ग में आयोजित होगी।