05 जनवरी, 2011

मेजबान ने जीते सबसे ज्यादा स्वर्ण

ओलंपिक राउंड में छा  गए ओलंपियन मंगल, राहुल बेनर्जी




रायपुर, ५ जनवरी, २०११. दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) की मेजबानी में आयोजित पहली आल इंडिया इंटर रेलवे आरचरी चैंपियननिशप में मेजबान एसईसीआर के खिलाड़ियों ने सर्वाधिक दस स्वर्ण पदक हसिल कर अपना दबदबा बनाए रखा। प्रतियोगिता के अंतिम दिन ओलंपिक राउंड में ओलंपियन मंगल सिंह चाम्पइया सहित राहुल बेनर्जी, रामाराव, वृशाली और रेणु ने कंपाउंड और रिकर्ब के स्वर्ण पदक हासिल किए। इस प्रतियोगिता में देश के दिग्गज खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।
राजधानी के डब्ल्यूआरएस मैदान स्थित सेक्रेसा स्टेडियम में इस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। बुधवार को अंतिम दिन ओलंपिक रांउंड के मुकाबले खेले गए जो काफी रोमांचक और संघर्षपूर्ण रहे। ये मुकाबले कंपाउंड और रिकर्ब इवेंट में खेले गए। पुरुष वर्ग के रिकर्ब ओलंपिक राउंड में स्वर्ण पदक के लिए ओलंपियन मंगल सिंह चाम्पइया और कामनवेल्थ गेम्स के पदक विजेता खिलाड़ी राहुल बेनर्जी के बीच हुआ। दोनों के बीच रोमांचक मुकाबला खेला गया। पहले सेट में मंगल ने 30 प्वाइंट हासिल किए और राहुल 28 प्वाइंट के साथ पिछड़ गए। दूसरा सेट भी मंगल ने जीत लिया। तीसरा सेट टाई हो गया और तीसरे सेट के बाद मंगल ने पांच प्वाइंट और राहुल ने एक मात्र प्वाइंट हासिल किया। पांच सेट के इस मुकाबले में मंगल सिंह ने 6-1 सेट से जीत हासिल कर ली और स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया। राहुल को रजत पदक मिला जबकि वी राजू ने कांस्य पदक हासिल किया। कंपाउंड के पुरुष वर्ग के मुकाबले भी काफी रोमांचक खेले गए। स्वर्ण पदक के दावेदार शिवनाथ नागेशिया और रामाराव के बीच मुकाबला खेला गया। यह मुकाबला रामाराव ने शिवनाथ को 6-4 सेट से पराजित कर जीत लिया। रामाराव ने पहले सेट से जीत हासिल की और दूसरे सेट में रामाराव तीन प्वाइंट व शिवनाथ एक प्वाइंट के स्कोर पर थे। चौथे सेट में दोनों के बीच टाइ हुआ और दोनों के स्कोर चार-चार प्वाइंट तक पहुंच  गए। पांचवे और निर्णायक सेट में रामाराव ने 6-4 से जीत हासिल कर स्वर्ण पदक हासिल कर लिया। शिवनाथ को रजत पदक और पल्टन हासदा ने कांस्य पदक हासिल किया। रिकर्ब व कंपाउंड के ओलंपिक राउंड के महिला वर्ग के मुकाबले भी काफी रोमांचक रहे। इन मुकाबलों को देखने काफी दर्शक स्टेडियम पहुंचे थे। महिला वर्ग के रिकर्ब के स्वर्ण पदक के लिए मुख्य मुकाबला ईस्टर्न रेलवे की रेणु और एनएफआर की प्रतिमा के बीच खेला गया। इस मैच में रेणु ने शुरू से ही दबाव बनाए रखा और एकतरफा 6-0 से सेट जीतकर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया। प्रतिमा ने एक भी सेट जीतने में सफलता हासिल नहीं की। उसे रजत पदक पर संतोष करना पड़ा। एल बुम्बइया ने कांस्य पदक हासिल किया। ओलंपिक राउंड के कंपाउंड इवेंट के स्वर्ण पदक के लिए खिताबी मुकाबला वृशाली गोरले और मंजूधा के बीच खेला गया। यह मैच काफी रोमांचक और संघर्षपूर्ण रहा। वृशाली ने शुरू से ही बढ़त बनाए रखी। पहले सेट में हालांकि मंजूधा ने 28 अंक बनाकर वृशाली (25 अंक) को दबाव में ला दिया था। लेकिन बाद के सेट में वृशाली ने वापसी की और यह मुकाबला 6-4 सेट से जीतकर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया। मंजूधा को रजत पदक पर संतोष करना पड़ा। नमिता यादव ने कांस्य पदक हासिल किया। इस प्रतियोगिता में डोला बेनर्जी से काफी उम्मींदे थीं लेकिन वे व्यक्गित इवेंट में रजत पदक हासिल कर सकीं। ओलंपिक राउंड में उन्होंने कोई  पदक हासिल नहीं किया। मेजबान एसईसीआर ने कुल दस स्वर्ण पदक हासिल कर पदक तालिका में पहला स्थान हासिल किया जबकि ईस्टर्न रेलवे आठ स्वर्ण पदक के साथ दूसरे, सीएलडब्लू तीसरे और एनएफआर चौथे स्थान पर रही। प्रतियोगिता के समापन समारोह में मुख्य अतिथि दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक एनएस कस्तूरीरंगन ने विजेता-उपविजेता खिलाड़ियों को पदक देकर पुरस्कृत किया। समापन समारोह के विशेष अतिथि सेक्रेसा के अध्यक्ष वीके संगल, सत्यवीर सिंग, डीआरएम बिनायक पी स्वाइन, बीपी पिल्लई, एसबी मोहरिल, अम्लान, मनीष अवस्थी थे। समारोह में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक धर्नुविद्या के अर्जुन कोदूराम वर्मा का सम्मान भी किया गया। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों डोला बेनर्जी, मंगल सिंह चाम्पइया, राहुल बेनर्जी, पल्टन हासदा, साकरा बेसरो का परिचय कराया गया।
एसईसीआर को सर्वाधिक 31 पदक

पहली आल इंडिया इंटर रेलवे आरचरी प्रतियोगिता में मेजबान दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) ने 31 पदक हासिल किए। इनमें 10 स्वर्ण, 9 कांस्य और 12 रजत पदक शामिल हैं। ईस्टर्न रेलवे ने 8 स्वर्ण, 6 कांस्य और 4 रजत पदक सहित कुल 18 पदकों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। सीएलडब्ल्यू ने एक कांस्य और दो रजत पदक तथा एनएफआर ने भी एक कांस्य और दो रजत पदक हासिल किया। ये दोनों टीमें क्रमश: तीसरे और चौथे स्थान पर रहीं।
सबसे ज्यादा महिलाओं ने लिया हिस्सा


इस  प्रतियोगिता की खास बात यह भी रही कि इसमें पुरुषों से ज्यादा महिला खिलाड़ी शामिल थीं। पूरी प्रतियोगिता में कुल 26 अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया जो दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे, ईस्टर्न रेलवे, सीएलडब्ल्यू, एनएफआर, पूर्व रेलवे से थे। इनमें 12 पुरुष खिलाड़ी और 14 महिला खिलाड़ी शामिल थीं। मेजबान दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे की   सर्वाधिक 10 महिला खिलाड़ियों ने अपनी खेल प्रतिभा  दिखाई। इन दस में से सबसे ज्यादा सात महिला और तीन पुरुष खिलाड़ी शमिल थे। प्रतियोगिता के स्टार खिलाड़ियों में अर्जुन अवार्डी और कामनवेल्थ गेम्स की पदक विजेता डोला बेनर्जी, ओलंपियन व अर्जुन अवार्डी मंगल सिंह चाम्पइया सभी पूर्व रेलवे, 2010 के एशियन चैंपियनशिप के पदक विजेता सेक्रो बेसरा, जूनियर वर्ल्ड कप 2008-09 के स्वर्ण पदक विजेता  पल्टन हासदा (दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे) प्रमुख रूप से शामिल थे।
वालीबाल खिलाड़ियों को रेलवे में नौकरी का आश्वासन
दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे के डीआरएम एनएस कस्तूरीरंगन व खेल सचिव सत्यवीर सिंह ने छत्तीसगढ़ वालीबाल संघ के सचिव मो. अकरम खान व अन्य पदाधिकारियों को छत्तीसगढ़ के वालीबाल खिलाड़ियों को रेलवे में नौकरी का आश्वासन दिया है। श्री खान ने बुधवार को रेल अधिकारियों से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपकर बताया कि 2006 में रेलवे में वालीबाल खिलाड़ियों की भर्ती के लिए प्रक्रिया प्रारंभ की गई थी। बाकायदा खिलाड़ियों का ट्रायल भी हुआ था। लेकिन बाद में कोई नियुक्ति नहीं की गई। श्री खान ने बताया कि कई प्रतिभावान वालीबाल खिलाड़ी बेरोजगार घूम रहे हैं और रेलवे पिछले 20 साल से वालीबाल की नेशनल चैंपियन है। श्री खान ने रेलवे अधिकारियों से मिले आश्वासन पर आभार व्यक्त किया है।

किस्मत भी मायने रखती है आरचरी में

हवा का रुख बदला तो पासा पलट जाता 
है ओलंपिक में : ओलंपियन मंगल सिंह




४ जनवरी, २०११. आल इंडिया इंटर रेलवे में ईस्टर्न रेलवे का प्रतिनिधित्व करने राजधानी पहुंचे ओलंपियन मंगल सिंह चाम्पइया तीरंदाजी में बेहतर खेल प्रतिभा  के साथ-साथ किस्तम को भी ज्यादा तवज्जो देते हैं। वे कहते हैं कि यदि हवा का रुख साथ दे गया तो सीधे पदक पर निशाना लगता है, वरन बेहतर खेल प्रतिभा भी  हवा के सामने हवा हो जाती है।
ओलंपियन मंगल सिंह ने बीजिंग 2008 में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया था। वे सिर्फ एक अंक से चूक गए थे और दूसरे राउंड से ही बाहर हो गए। मंगल सिंह ने यहां पत्रकारों से चर्चा के दौरान बताया कि ओलंपिक 2008 में उन्होंने ए कोर्ट में अ•यास किया था लेकिन टूर्नामेंट बी कोर्ट में मिल गया जिससे उनका खेल प्रभावित हो गया। यह पूछने पर कि एक खिलाड़ी को हर कोर्ट में खेलने का अभयास होना चाहिए तो उन्होंने कहा कि ओलंपिक में काफी व्यस्त मुकाबले होते हैं और ऐसे में हर कोर्ट में अ•यास करने नहीं मिलता। इसके अलावा सबसे अहम रोल हवा का रहता है। हवा ने यदि साथ नहीं दिया तो निशाना टारगेट के बाहर हो जाता  है। यह खेल किस्मत से भी जुड़ा हुआ है। मंगल ने यह भी कहा कि हमसे हर बार बेहतर प्रदर्शन की अपेक्षाएं की जाती  हैं लेकिन सुविधाएं कोरिया, जापान और चाइना जैसी नहीं मिलती। विदेशों में हर एक प्वाइंट पर रिसर्च होता है। आरचरी के बो के टारगेट से लेकर धागे और तीर के वजन व हवा के दबाव तक, लेकिन हमारे यहां ऐसा कुछ  नहीं होता। तकनीकी रूप से हम काफी कमजोर हो जाते हैं। मंगल सिंह ने बताया कि वे 2012 लंदन ओलंपिक की तैयारियों में लगे हुए हैं और जुलाई मे ं होने वाले क्वालीफाइंग में उन्हें पूरी उम्मीद है कि वे सफल होंगे। विदेशी कोच के सवाल पर वे कहते  हैं कि एशिया के लिए एशियाई और यूरोप के लिए यूरोप का कोच रखना चाहिए क्योंकि हर जगह का वैदर अलग-अलग होता है। मंगल ने यह •ाी कहा कि कोच जानकार होना चाहिए और खासतौर पर ओलंपियन होना चाहिए। जिससे वह खिलाड़ियों को ओलंपिक की बारीकियों से अवगत करा सके। इसके अलावा कोच खिलाड़ियों से पूछकर नियुक्त करना चाहिए। वे यह भी कहते हैं कि जूनियर खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए निचले स्तर से खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करना जरूरी है। इसके लिए जिला व राज्य स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करना चाहिए। वे बताते हैं कि उन्हें और डोला, राहुल बेनर्जी, तरुण जैन को विन एंड विन नामक विदेशी कंपनी प्रायोजित करती है क्योंकि इस समय उनकी रैंकिंग बेहतर है। हावड़ा में सीनियर टीटी के पद पर पदस्थ मंगल सिंह ने रेलवे से मिलने वाली सुविधाओं को लेकर बताया कि सुविधाएं ठीक हैं लेकिन अ•यास के दौरान खिलाड़ियों से ड्यूटी नहीं करानी चाहिए। मंगल सिंह कामनवेल्थ गेम्स के लिए सिर्फ एक प्वाइंट से चूक  गए थे। वरन वे भी भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व् करते। मंगल बताते हैं कि उस दौरान उनका बो सेट नहीं था।
जहां से ज्याद सुविधा मिलेगी वहां से खेलूंगा


ओलंपियन मंगल सिंह चाम्पइया से जब पूछा गया कि क्या वे छत्तीसगढ़ से खेलना चाहेंगे तो उन्होंने कहा कि जिस सरकार से उन्हें ज्यादा सुविधाएं मिलेंगी वे वहां से खेलने के लिए तैयार हैं। फिलहाल रेलवे से खेल रहे मंगल सिंह ने एक साल तक आंध्रप्रदेश का भी प्रतिनिधित्व किया था। वे बताते हैं कि झारखंड से उन्हें आज तक कोई कैश अवार्ड नहीं मिला क्योंकि उन्होंने झारखंड का प्रतिनिध्तिव नहीं किया है लेकिन नेशनल गेम्स में वे झारखंड का प्रतिनिधित्व करना चाहेंगे। मंगल ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार यदि बेहतर सुविधाएं देगी तो वे छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व नेशनल गेम्स में करने को तैयार हैं।

मंगल और राहुल को दोहरा स्वर्ण

 


आल इंडिया इंटर रेलवे आरचरी में एसईआर 
के खिलाड़ी छाए, डोला को एकमात्र रजत
4 जनवरी, २०११.-पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) की मेजबानी में खेली जा रही पहली आल इंडिया आरचरी चैंपियनशिप में ओलंपियन मंगल सिंह चाम्पइया और राहुल बेनर्जी के लिए मंगलवार का दिन मंगलमयी  रहा। राहुल और मंगल सिंह ने दोहरे स्वर्ण पर निशाना दागा। इसके अलावा मेजबान दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे के खिलाड़ी छाए रहे। महिला वर्ग में स्टार आरचर डोला बेनर्जी को रजत पदक पर संतोष करना पड़ा।
डब्ल्यूआरएस मैदान में आयोजित इस प्रतियोगिता का उद्घाटन सुबह आठ बजे सेक्रसा अध्यक्ष और डीआरएम बिनायक पी स्वाइन ने किया। प्रतियोगिता में दोपहर तक रिकर्ब और कंपाउंड इवेंट के 90, 60, 70 मीटर के महिला और पुरुष वर्ग के व्यक्गित मुकाबलों के परिणाम आ चुके थे। 90 मीटर पुरुष वर्ग के रिकर्ब के मुकाबलों में ईस्टर्न रेलवे के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी और ओलंपियन मंगल  चाम्पइया ने 360 में से सर्वाधिक 322 अंक बटोरकर स्वर्ण पर निशाना मारा। राहुल बेनर्जी 309 अंक के साथ दूसरे स्थान पर रहे। कपिल ने 294 अंक के साथ तीसरा स्थान बनाया। 90 मीटर कंपाउंड पुरुष वर्ग के मुकाबले  काफी रोमांचक और संघर्षपूर्ण रहे। पल्टन हसदा ने 317 अंक के साथ स्वर्ण पदक, रामाराव ने 310 अंक के साथ रजत और कपिल ने 309 अंक के साथ कांस्य पदक हासिल किया। 70 मीटर रिकर्ब पुरुष वर्ग के मुकाबलों में ओलंपियन मंगल सिंह ने 332 अंक के साथ दोहरा स्वर्ण हासिल किया। एनएफआर के हेमंता ने 329 अंक लेकर रजत और कामनवेल्थ गेम्स के पदक विजेता राहुल ने •ाी 329 अंक के साथ कांस्य पदक हासिल किया। 70 मीटर कंपाउंड के पुरुष वर्ग के मुकाबलों में एसईसीआर के शिवनाथ नगेशिया ने 331 अंक बनाकर स्वर्ण, रामाराव ने 330 अंक के साथ  रजत और विकास ने  330 अंक के साथ कांस्य पदक हासिल किया। आल इंडिया इंटर रेलवे में महिला वर्ग के मुकाबले भी काफी रोमांचक रहे। दिग्गज अंतरराष्ट्रीय महिला तीरंदाजों के बीच रिकर्ब और कंपाउंड इवेंट के मुकाबले खेले गए। 70 मीटर रिकर्ब में दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे के रिमिल बिरुली ने 360 में से 323 अंक पर निशाना लगाकर स्वर्ण पदक हासिल किया। सुषमा 316 अंक लेकर दूसरे और लक्ष्मीरानी (312) दूसरे स्थान पर रहीं। 70 मीटर कंपाउंड के मुकाबलों में रोशनी ने 327, मंजूधा ने 316 और नमिता यादव ने 312 अंक लेकर क्रमश: स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक हासिल किया। 60 मीटर रिकर्ब के मुकाबलों में बाम्बइया ने 334 अंक लेकर स्वर्ण, रिमिल बिरुली ने 334 अंक लेकर रजत और लक्ष्मी ने 326 अंक के साथ कांस्य पदक हासिल किया। 60 मीटर कंपाउंड में मंजूधा (328), नमिता यादव (338) और रुशाली गोरले (319) ने क्रमश: स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक हासिल किया।
मेजबान का बेहतर प्रदर्श
इस प्रतियोगिता में मेजबान दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे के खिलाड़ियों ने बेहतर खेल का प्रदर्शन दिखाया। महिला और पुरुष वर्ग के 90, 70 और 60 मीटर के रिकर्ब व कंपाउंड के मुकाबलों में एसईसीआर ने 10 स्वर्ण पदक हासिल कर लिए। ईस्टर्न रेलवे ने छह स्वर्ण हासिल किया।  50 और 30 मीटर के मुकाबले शाम तक खेले गए। इन मुकाबलों में राहुल बेनर्जी ने दोहरा स्वर्ण हासिल किया। 50 मीटर रिकर्ब में राहुल बेनर्जी ने 342 अंक के साथ  स्वर्ण पदक पर निशाना साधा।, ए राजू (329) ने रजत और प्रसन्ना (328) ने कांस्य पदक हासिल किया। कंपाउंड में रामाराव (335), पल्टन हसदा (322)और शिवनाथ नगेशिया (320) क्रमश: पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। 30 मीटर रिकर्ब के पुरुष वर्ग के मुकाबलों में राहुल (356), मंगल सिंह (349), प्रसन्ना (347), कंपाउंड के 30 मीटर में शिवनाथ (356), विकास (353), पल्टन (352) ने क्रमश: स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक हासिल किया। रिकर्ब महिला 30 मीटर में •ाी रोमांचक मुकाबले खेले गए। इन मुकाबलों में एसईआर की रिमिल ने 349 अंक के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया। वहीं स्टार आरचर और कामनवेल्थ गेम्स की पदक विजेता डोला बेनर्जी को 342 अंक के साथ रजत पदक पर संतोष करना पड़ा। 340 अंक के साथ रीना कुमारी ने कांस्य पाया। कंपाउंड में नमिता (356), मंजूधा (349), वृशाली (349), रिकर्ब महिला 50 मीटर में सुषमा (330), रिमिल (322), बोम्बिला (315), कंपाउंड में मंजूधा (333),वृशाली (328), नमिता (325) क्रमश: पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर रहीं।
 इस प्रतियोगिता में दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे के 11 अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जौहर दिखा रहे हैं। इनमें नमिता यादव, बी प्रणिता, रोशाली गोरले, साकरो बेसरा, पल्टन हसदा, मंजूधा, लक्ष्मीरानी मांझी, शिवनाथ, रिमिल बिरुली, विकास शामिल हैं।