06 जनवरी, 2011

आल इंडिया वनवासी आरचरी में 12 पदक

छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों का बेहतरीन प्रदर्शन




रायपुर, ६ जनवरी, २०११.  अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम की मेजबानी में विजयवाड़ा में खेली गई आल इंडिया आरचरी चैंपियनशिप में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया और 12 पदक हासिल किए। इनमें कई खिलाड़ियों ने छत्तीसगढ़ का राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिनिधित्व किया है।
छत्तीसगढ़ की प्रबंधक मोनू साहू ने बताया कि छत्तीसगढ़ की टीम 31 दिसंबर को इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने गई थी और दो जनवरी को वापस लौटी। टीम ने 12 पदक हसिल किए। इनमें छह स्वर्ण, पांच रजत और एक कांस्य पदक शामिल है। आरचरी के 30 मीटर और 40 मीटर पुरुष वर्ग में अघन सिंह बैगा ने स्वर्ण और ओवरआल चैंपियन होने का  गौरव हासिल किया। खेम सिंह ने 30 और 40 मीटर में रजत पदक पाया और बंगाल ने कांस्य हासिल किया। महिला वर्ग में मिनी मरकाम ने 30 व 40 मीटर में स्वर्ण पदक, सरोज खुसरो ने रजत पदक हासिल किया। सुश्री साहू ने बताया कि इस प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने काफी उम्दा खेल का प्रदर्शन दिखाया।

नेशनल गर्ल्स हैंडबाल का लोगो विमोचित

नेशनल गर्ल्स हैंडबाल राजधानी में २७ से
रायपुर, ५ जनवरी २०११. छत्तीसगढ़ हैंडबाल एसोसिएशन की मेजबानी में राजधानी में इस माह 27 जनवरी से आयोजित होने वाली 33वीं जूनियर नेशनल गर्ल्स हैंडबाल चैंपियनशिप के लिए तैयार किए गए लोगो का यहां खेल मंत्री लता उसेंडी ने विमोचन किया। इस दौरान प्रदेश हैंडबाल संघ और राज्य ओलंपिक संघ के कई पदाधिकारी और खेल अधिकारी मौजूद थे।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ को 33वीं जूनियर नेशनल गर्ल्स हैंडबाल चैंपियनशिप की मेजबानी दी गई है। इस प्रतियोगिता का आयोजन राजधानी के इनडोर और आउटडोर मैदान में इस माह 27 जनवरी से 31 जनवरी तक किया जा रहा है। प्रतियोगिता का उदघाटन मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह कर रहे हैं। इसके पूर्व बुधवार को छत्तीसगढ़ हैंडबाल संघ के पदाधिकारियों ने खेल मंत्री लता उसेंडी से इस प्रतियोगिता के लिए बनाए गए लोगो का विमोचन किया। इस अवसर पर खेल मंत्री लता उसेंडी ने प्रदेश हैंडबाल संघ के पदाधिकरियों को राष्ट्रीय प्रतियोगिता की सफल मेजबानी करने की शु•ाकामनाएं दी और  प्रतियोगिता के लिए हरसं•ाव सहयोग का आश्वासन दिया। इस दौरान खेल संचालक जीपी सिंह, छत्तीसगढ़ हैंडबाल संघ के सचिव बशीर अहमद खान, छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गुरुचरण सिंह होरा, उपाध्यक्ष मोहम्मद अकरम खान, छत्तीसगढ़ हैंडबाल संघ के सहसचिव डा. आलोक दुबे सहित कई खिलाड़ी और पदाधिकारी मौजूद थे।

पदक विजेता टीम ने की मुलाकात

छत्तीसगढ़ की पुरुष हैंडबाल टीम ने 39वीं सीनियर नेशनल हैंडबाल चैंपियनशिप में रजत पदक  जीतने के बाद खेल मंत्री लता उसेंडी से मुलाकात की। खेल मंत्री ने टीम को शुभकामनाएं दी। इस दौरान खेल संचालक जीपी सिंह, राज्य हैंडबाल संघ के महासचिव बशीर अहमद खान, संयुक्त सचिव आलोक दुबे, राज्य वालीबाल संघ के सचिव मो. अकरम खान, एम सुरेश कुमार, शेख मौला, मो. युसूफ खान सहित कई खिलाड़ी मौजूद थे। खिलाड़ियों में सैय्यद जफर, आनंद ए्नएस, नागेश, एसएन दुबे, अनिल कौशिक, शरद, फैसल, धर्मवीर, लक्ष्मीनारायण प्रमुख रूप से शामिल थे।
छत्तीसगढ़ हैंडबाल संघ के सचिव बशीर अहमद खान ने बताया कि राज्य की टीम ने अपने पूल के स•ाी मैच जीतकर पहला स्थान हासिल किया और क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। छत्तीसगढ़ ने पश्चिम बंगाल को 26-25 से, राष्ट्रीय हैंडबाल अकादमी को 22-16 से और दिल्ली को 29-26 गोल से पराजित किया था। छत्तीसगढ़ ने क्वार्टर फाइनल में इंडियन रेलवे को 36-29 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। सेमीफाइनल में छत्तीसगढ़ ने पंजाब को कड़ी टक्कर देते हुए 27-26 से हराया। फाइनल मुकाबले में सर्विसेस (सेना) की टीम से छत्तीसगढ़ को 31-19 अंकों से पराजय का सामना करना पड़ा। टीम में अनिल कुमार कौशिक, लक्ष्मी नारायण बीएसपी, अनिल कुमा निर्मलकर, कुनाल, बीनू वासु, गंगाधर, सैय्यद जफर हसनैन, एसएन दुबे, शरद तकावाले, विश्वजीत कलीटा, ज्योति कुमार, आनंद एनएस, फैसल अहमद खान, एस नागेश, सत्यपाल, धरमवीर सभी दुर्ग जिला, शेख मौला कोच, मो., युसूफ प्रबंधक शामिल थे।

.... और लुप्त हो गई धर्नुविद्या

छत्तीसगढ़ के द्रोणाचार्य को नहीं मिला एक भी अर्जुन

रायपुर, ५ जनवरी. २०११. : छत्तीसगढ़ के लिए यह अफसोस की ही बात होगी कि हमारे पास प्राचीन धर्नुविद्या की कला मौजूद थी लेकिन हम उसे गवां बैठे। छत्तीसगढ़ के द्रोणाचार्य कोदूराम वर्मा को 86 साल की आयु तक एक भी अर्जुन नहीं मिला। अब वे इस विद्या को वे सिखाने में सक्षम नहीं हैं और न तो वे शब्दभेदी बाणों का प्रदर्शन कर पाते हैं। उन्हें इस बात का अफसोस है कि उनके परिवार के लोगों ने भी यह विद्या नहीं सीखी।
शब्दभेदी बाण में माहिर धर्नुविद्या के महारथी दुर्ग जिले के भीमौरी गांव में रहने वाले कोदूराम वर्मा को यहां आल इंडिया इंटर रेलवे आरचरी चैंपियनशिप के समापन समारोह में सम्मानित किया गया। सहज और सरल स्वभाव  के कोदूराम से पत्रकारों ने खूब सवाल किए और उन्होने  बखूबी सहजता के साथ जवाब भी दिया। उन्होंने इस बात को लेकर अफसोस जताया कि उनकी यह विद्या अब किसी काम की नहीं रही। उन्होंने काफी  प्रयास किया कि एक तो युवा ऐसा मिले जो चाय, तम्बाकू, सिगरेट, शराब न पीता हो और इस विद्या को सीखने ललायित हो। लेकिन ऐसा एक भी युवा नहीं मिला। बच्चों की बात तो कोसों दूर है। श्री वर्मा ने हालांकि नारायणपुर और होशंगाबाद में आश्रम के बच्चों को सिखाने का प्रयास किया था लेकिन बाद में बच्चों ने रूचि नहीं दिखाई। नारायणपुर के विवेकानंद आश्रम में नए सन्यासी के आते ही उनका प्रशिक्षण यह कहकर बंद करवा दिया गया कि पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। श्री वर्मा के मुताबिक जब वे 35 वर्ष के थे तब उन्होंने उत्तरप्रदेश के गुरुकुल आश्रम कांगड़ी के बालकृष्ण शर्मा से धर्नुविद्या सीखी थी। तब वे भजन का प्रचार  करते थे और नाचा-गम्मत जैसी लोक कलाओं का प्रदर्शन करते थे। इसके बाद उन्होंने कई जगह प्रदर्शन  किया। राज्य निर्माण के बाद 2007 में जब उन्होंने यहां साइंस कालेज मैदान में प्रदर्शन किया था तो स•ाी हैरत में पड़ गए थे। राजधानी के राजकुमार कालेज में भी उन्होंने प्रदर्शन दिखाया था। श्री वर्मा शब्दभेदी बाण के अलावा धागे को काटने, आंखों में पट्टी बांधकर तीर निशाने पर लगाने, सोकर, उलटा लेटकर, दर्पण में देखकर सटीक निशाना लगाने में माहिर हैं। लेकिन 86 साल की इस उम्र में उनके घुटने ने जवाब दे दिया है और यही वजह है कि अब यह विद्या न तो वे सिखा सकते हैं और न तो कोई उन्हें इस लायक शिष्य मिला। वे बताते हैं कि उनके परिवार के सदस्यों ने भी इस ओर कोई विशेष उत्साह नहीं दिखाया। वे कहते हैं कि उनकी धर्नुविद्या को सीखकर आधुनिक तीरंदाजी में कोई भाग्य  आजमाता तो निश्चय ही अंतरराष्ट्रीय पदक हासिल कर सकता था।