13 जनवरी, 2011

बकअप बस्तर


  राज्य मैराथन में  सर्वाधिक खिताब बस्तर बालाओं की झोली में
पिछले साल की तरह इस साल भी बस्तर बालाओं ने पाटन में आयोजित हुई राज्य मैराथन में अपना दबदबा बनाए रखा और टाप ट्वेंटी में सर्वाधिक खिताब अपने नाम कर लिए। एक लाख रुपए की नगद पुरस्कार राशि वाली राज्य मैराथन का महिला वर्ग का खिताब  बस्तर की ललिता कश्यप ने जीता। ललिता दो साल पहले भी चैंपियन थी। पुरुष वर्ग में रायपुर के अरविंद ने यह पुरस्कार जीता। बिना किसी कोच के बस्तर बालाओं ने नंगे पैर ही मैराथन पूरी की और टाप टेन में तो पहले से लेकर छठे स्थान तक के खिताब बस्तर ने जीते। पुरुष वर्ग में बस्तर के खिलाड़ियों ने बेहतर खेल का प्रदर्शन किया।
रायपुर, १२ जनवरी, २०११. बुधवार को सुबह संसदीय सचिव विजय बघेल ने राज्य मैराथन को हरी झंडी दिखाई। पुरुष वर्ग के लिए 30 किलोमीटर और महिला वर्ग के लिए 20 किलोमीटर की मैराथन दौड़ निर्धारित थी। महिला वर्ग में सबसे ज्यादा खिताब जगदलपुर के माता रुकमणी सेवा संस्थान की बालिकाओं ने जीते। ये बालिकाएं बस्तर के घोर जंगली इलाकों में रहने वाली हैं। इन्हें बाकायदा पद्मश्री धर्मपाल सैनी ने बिना किसी कोच और तकनीक के प्रशिक्षित किया है। २००८ में एक लाख रुपए का नगद  पुरस्कार जीतने वाली बस्तर की ललिता कश्यप ने इस साल भी यह खिताब अपने नाम कर लिया। ललिता ने 1 घंटा 30 मिनट एक सेकंड का समय निकालकर यह खिताब जीता। दूसरे स्थान पर बस्तर की ही दशरी पोयाम रही। दशरी ने 1 घंटा 30 मिनट 20 सेंकड का समय निकाला। दशरी नई खिलाड़ी है। बस्तर की एक और नई बालिका खिलाड़ी चैयती कश्यप ने 1 घंटा 31 मिनट 34 सेंकड का समय निकाला और तीसरा स्थान हासिल किया। अन्य खिलाड़ियों में बालमति यादव जगदलपुर ने चौथा, हेमेश्वरी कर्मा जगदलपुर ने पांचवा, रमावती  भारती जगदलपुर ने छठा, कमल कैवर्त्य रायपुर ने सातवां, शांति यादव जांजगीर ने आठवां, पोयाम जगदलपुर ने नौंवा, रेशमा ताती दंतेवाड़ा ने दसवां स्थान हासिल किया। सुभद्रा बघेल जगदलपुर ने 11वां, मंगला तामू दंतेवाड़ा ने 12वां, मुन्नी जगदलपुर ने 13वां, गीतेश्वरी साहू दुर्ग ने 14वां, पदमनी जगदलपुर ने 15वां, धनवंतरी साहू दुर्ग ने 16वां, गलो•ाास्कर दंतेवाड़ा ने 17वां, रायपुर की माया वर्मा ने 18वां, जशपुर की मनीषा तिर्की ने 19वां और दंतेवाड़ा की किरण शोरी ने 20वां स्थान हासिल किया। राज्य मैराथन में पुरुष वर्ग का खिताब रायपुर के अरविंद कुमार ने 1 घंटा 43 मिनट 47 सेकंड का समय निकालकर हासिल किया। 75 हजार रुपए के दूसरे स्थान के नगद पुरस्कार पर रायपुर के ही बृजेश कुमार सिंह ने कब्जा जमाया। बृजेश ने 1 घंटा 43 मिनट 51 सेकंड का समय निकाला। तीसरे स्थान पर जगदलपुर के रामेश्वर नाग रहे जिन्होंने 1 घंटा 43 मिनट 56 सेकंड का समय निकाला। अन्य खिलाड़ियों में राजकुमार साहू जांजगीर, मनोज निषाद जशपुर, कामता यादव दुर्ग, सुखनंदन ध्रुव रायपुर, गुलाब रजवाड़े सरगुजा, महेश कुमार तेलंग, मनोज कुमार दंतेवाड़ा, महेश सिंह उरकरे सरगुजा, सोप सिंह रायपुर, अशोक नेताम दंतेवाड़ा, सूरजभान महासमुंद, सालीकराम कांकेर, गेंदलाल दुर्ग, विजय मरकाम कोरबा, बद्री प्रसाद कैवर्त बिलासपुर, जागेंद्र दुर्ग और रायपुर के नरेंद्र कुमार ने क्रमश: चौथे से लेकर बीसवां स्थान तक हासिल किया। इस प्रतियोगिता के समापन समारोह में मुख्य अतिथि नगर पंचायत सिमगा की अध्यक्ष उपासने चंद्राकर ने खिलाड़िÞयों को पुरस्कृत किया। समारोह की अध्यक्षता खेल संचालक जीपी सिंह ने की। इस अवसर पर जनपद उपाध्यक्ष खोमलाल देशलहरा, जयहिंद क्रीड़ा मंडल अध्यक्ष होरी देवांगन,उपसंचालक खेल ओपी शर्मा, प्रकाश ठाकुर, तापस बोस, जिला खेल अधिकारी ए एक्का, पायका प्रभारी पोखन साहू, पद्मश्री धर्मपाल सैनी सहित कई खेल अधिकारी और खिलाड़ी मौजूद थे।
खिलाड़ियों पर लाखों की बौछार
राज्य मैराथन में पहले से बीसवें स्थान तक के खिलाड़ियों को लाखों रुपए के नगद पुरस्कार महिला और पुरुष दोनों वर्ग में अलग-अलग  दिए गए। पहले स्थान पर एक लाख रुपए, दूसरे स्थान पर 75 हजार रुपए, तीसरे स्थान पर 50 हजार रुपए, चौथे स्थान पर 25 हजार रुपए, पांचवे स्थान पर 20 हजार रुपए, छठे स्थान पर 15 हजार रुपए, सातवें से लेकर दसवे स्थान तक सात हजार रुपए और 11वें से लेकर 20वें स्थान तक के धावक को तीन-तीन हजार रुपए का नगद पुरस्कार दिया गया।
मैराथन से संपन्न हुआ ललिता का परिवार

एक लाख रुपए के नगद पुरस्कार राशि वाली राज्य मैराथन ने प्रदेश के दूरस्थ इलाकों में रहने वाले कई खिलाड़ियों के परिवार को संपन्न बना दिया है। बस्तर के डिमरापाल आश्रम की ललिता कश्यप ने तीसरी बार राज्य मैराथन जीती है। अब तक वह तीन लाख रुपए हासिल कर चुकी है। इसके अलावा वह और उसकी बहनें प्रमिला व चंद्रवती दूसरा और तीसरा स्थान हासिल करती रही हैं। अब तक ललिता के परिवार के पास आठ लाख रुपए पहुंच चुके हैं और इससे ललिता के परिवार की आर्थिक स्थिति  काफी बेहतर हो गई है। ललिता ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहा कि वह देश और राज्य के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक हासिल करना चाहती है। बीए की छात्रा ललिता ने बताया कि राज्य मैराथन ने उसके परिवार को काफी राहत पहुंचाई है और इस तरह के खेल आयोजनों से खिलाड़ियों को काफी प्रोत्साहन मिलता है। ललिता बचपन से माता रुकमणी सेवा संस्थान में शिक्षा हासिल कर रही है। संस्थान के संचालक पद्मश्री धर्मपाल सैनी के मुताबिक ललिता के परिजनों ने हाल ही में किसानी के लिए ट्रेक्टर  खरीदा है और वे काफी बेहतर स्थिति में हैं। श्री सैनी ने बताया कि ललिता की तरह कई और खिलाड़ी अपने परिवार को राज्य मैराथन के चलते आर्थिक सहयोग पहुंचा चुके हैं।
एथलेटिक एकेडमी मिली तो हम देंगे नेशनल गेम्स के पदक

माता रुकमणी सेवा संस्थान के अध्यक्ष धर्मपाल सैनी इस समय 81साल के हो रहे हैं लेकिन वे जवानों से कम नहीं है। बस्तर में ताऊजी के नाम से ख्यातिप्राप्त श्री सैनी ने 1976 में माता रुकमणी सेवा संस्थान की स्थापना की थी जिसका उद्देश्य घोर जंगलों में रहने वाले आदिवासियों के बच्चों को शिक्षा के साथ खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रम व श्रमनिष्ठा का पाठ पढ़ाना था। आज पूरे बस्तर में इसकी 37 शाखाएं हैं जिनमें 22 बालिकाओं के और 16 बालकों के आश्रम हैं। 1992 में समाज सेवा के लिए पद्मश्री पुरस्कार से नवाजे गए श्री सैनी एथलेटिक्स के खिलाड़ी रहे। वे बताते हैं कि आश्रम की बालिकाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं  है। हमारे पास कमी है तो कोच की जो तकनीकी रूप से खिलाड़ियों को प्रशिक्षित कर सके। पिछले एक दशक से हम क्रीड़ा परिसर की मांग कर रहे हैं और हमें यदि एथलेटिक एकेडमी मिल जाए जिसमें प्रशिक्षकों की  व्यवस्था हो तो, हम छत्तीसगढ़ को 2013-14 का नेशनल गेम्स का पदक देंगे। श्री सैनी ने बताया कि बिना किसी कोच के पिछले तीन माह से वे बालिकाओं को अ•यास करा रहे थे जिसका बेहतर परिणाम सामने आया। उन्होंने बताया कि बस्तर की पहली राष्ट्रीय महिला खिलाड़ी मंगल मौर्य थी जिसने 1985 में गोवाहाटी की आल इंडिया एथलेटिक प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व किया था। वह रविवि की ओवरआल चैंपियन  थी। आश्रम की ही जानकी मज्जी इस राज्य की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हो सकती थी। जानकी ने कई राष्ट्रीय स्पर्धाओं में पदक हासिल किया था। लेकिन विवाह के बाद यह प्रतिभा लुप्त हो गई। वे बताते हैं कि आश्रम ने 18 राष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ी राज्य को दिए हैं। खिलाड़ियों के नंगे पैर दौड़ने को लेकर उन्होंने बताया कि उनका अगला टारगेट इन्हें जूता पहनाकर एथलेटिक्स में अ•यास्त करना है जिससे राष्ट्रीय स्तर पर ये प्रदेश के लिए पदक हासिल कर सकें।
प्रतिभाओं पर कब देंगे ध्यान?

पद्मश्री धर्मपाल सैनी से जब पूछा गया कि इतनी खेल प्रतिभाओं के बावजूद इन्हें अधिकृत राष्ट्रीय स्पर्धाओं में हिस्सा लेने का मौका क्यों नहीं मिला तो उन्होंन बताया कि उन्हे सूचना ही नहीं मिलती और न तो छत्तीसगढ़ एथलेटिक एसोसिएशन उनके खिलाड़ियों की कोई सुध लेता है। इस दौरान राज्य एथलेटिक एसोसिएशन के सचिव आरके पिल्ले भी मौजूद थे। श्री पिल्ले से जब पत्रकारों ने पूछा कि दूरस्थ इलाकों में रहने वाले खिलाड़िÞयों पर संघ का फोकस क्यों नहीं तो उन्होंने कहा कि श्री सैनी को पूरी जानकारी दी जाती है और कई बार वे ही रूचि नहीं दिखाते। श्री पिल्ले और श्री सैनी को आमने-सामने भी कराया गया लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। हां, श्री पिल्ले ने पत्रकारों को यह जरूर बताया कि •िालाई में सेल की एथलेटिक एकेडमी है आखिर वह क्या कर रही है और एकेडमी के खिलाड़ी क्यों नहीं राज्य मैराथन में इतने खिताब हासिल कर पाते हैं। श्री   पिल्ले ने बताया कि एकेडमी में यूपी, बिहार और हरियाणा के खिलाड़यों को रखा जाता है जबकि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों की उपेक्षा की जाती है। यही वजह है कि उन्हें एकेडमी से बाहर कर दिया गया। वे यहां चीफ कोच हुआ करते थे।

परवाह नंगे पैर की नहीं, टारगेट पूरा करने की
राज्य मैराथन में पिछले कई सालों से बेहतर प्रदर्शन कर रहीं बस्तर बालाओं की एक खासियत यह •ाी है कि वे उन्हें नंगे पैर दौड़ने की परवाह नहीं रहती बल्कि उनका ध्यान टारगेट पूरा करने पर रहता है।  बस्तर के जितने •ाी खिलाड़ी राज्य मैराथन में हिस्सा लेते हैं वे चाहे बीसवें स्थान तक  पहुंचे या नहीं लेकिन दौड़ पूरी करना उनका पहला मकसद रहता है। पाटन की खराब सड़कों पर  ये खिलाड़ी शहरी खिलाड़ियों को पीछे छोड़ते हुए थके नहीं। शहरी खिलाड़ी बीच में ही मैराथन छोड़कर हांफने लगे थे। कई तो सड़क पर ही लुड़क गए थे। लेकिन ऐसा बस्तर के किसी खिलाड़ी के साथ नहीं हुआ।
हम देंगे पूरी सुविधाएं : सिंह

खेल संचालक जीपी सिंह ने कहा है कि बस्तर के डिमरापाल स्थित माता रुकमणी सेवा संस्थान को हर वे सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी जो यहां के खिलाड़ी चाहते हैं। श्री सिंह ने आश्रम के संचालक धर्मपाल सैनी को आश्वासन दिया कि वे खेल की जो सुविधाएं मांगेंगे उन्हें उपलब्ध कराई जाएगी और इसके लिए पैसों की कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि माता रुकमणी आश्रम को गोद लेने के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण से भी चर्चा हुई है। साई इस आश्रम को गोद लेने को तैयार है। इस पर श्री सैनी ने कहा कि यह दूरस्थ इलाकों के खिलाड़ियों के लिए और  खुशी की बात होगी। राज्य मैराथन के दौरान खेल संचालक जीपी सिंह स्वयं मोटर साइकल से पेट्रोलिंग कर रहे थे। उन्होंने पूरा रूट खिलाड़िÞयों के साथ तय किया और मैराथन में अंत तक डटे रहे। श्री सिंह के इस कदम की काफी सराहना  की गई।