15 जनवरी, 2011


खिलाड़ियों का पलायन सबसे बड़ी समस्या
भारतीय हाकी टीम के लिए आसान नहीं होगा ओलंपिक 
2012 के लिए क्वालीफाई करना : दिलीप तिर्की
रायपुर, १४ जनवरी, २०११. भरतीय हाकी टीम के पूर्व कप्तान दिलीप तिर्की का कहना है कि छत्तीसगढ़ और उड़ीसा दोनों राज्यों में प्रति•ाावान खिलाड़ियों का पलायन सबसे बड़ी समस्या है। राज्यों में खिलाड़ियों के लिए नौकरी नहीं है जिसकी वजह से वे पलायन कर जाते हैं। ऐसे में राज्य की हाकी टीमों में प्रतिभावान खिलाड़ियों की कमी रह जाती है और राज्य का नाम नहीं होता।
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान दिलीप तिर्की शुक्रवार से राजनांदगांव में शुरू हुई महंत सर्वेश्वरदास स्मृति अखिल भारतीय हाकी प्रतियोगिता में शिरकत करने आए थे। रायपुर पहुंचने पर उन्होंने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि लंदन ओलंपिक के लिए भारतीय टीम का क्वालीफाई करना काफी कठिन होगा। हमें काफी बेहतर प्रदर्शन करना होगा। उन्होंने हाकी के किसी भी  विवादास्पद मुद्दे पर बात करने से इनकार कर दिया लेकिन यह जरूर कहा कि फेडरेशन में विवाद का असर खिलाड़ियों और खेल पर पड़ता है। वर्ल्ड कप में ही खिलाड़ियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। मूलत: उड़ीसा के सुंदरगढ़ में रहने वाले दिलीप तिर्की ने बताया कि वे इस समय सुंदरगढ़ में हाकी के छोटे-छोटे आयोजन करवा रहे हैं और इनका काफी असर बच्चों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि टूर्नामेंट भाले ही अखिल भारतीय स्तर पर न कराएं, जिला स्तर पर ही हों लेकिन लगातार होने चाहिए। इससे नई पीढ़ी तैयार होती है। उन्होंने छत्तीसगढ़ में एस्ट्रो टर्फ की कमी को लेकर कहा कि यह हाकी का आधार है और यदि यह कमी पूरी नहीं की गई तो खिलाड़ी आगे नहीं बढ़ सकेंगे। राजनांदगांव को लेकर तिर्की ने कहा कि उन्होंने काफी नाम सुना था और यह  जाना था कि यहां हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद भी आया करते थे। यहां का टूर्नामेंट काफी लोकप्रिय है क्योंकि इसमें 25 हजार दर्शक जुटते है। जहां हाकी का इतना क्रेज हो   वहां कई खिलाड़ी निकलेंगे। तिर्की ने बताया कि मौजूदा समय में हाकी काफी बदल गई है और नई-नई तकनीक आ गई है। हास्टल और एकेडमी में अभी  भी पुरानी तकनीक से हाकी सिखाई जा रही है। इसमें बदलाव लाना चाहिए। पूर्व कप्तान ने बताया कि उड़ीसा में •ाविष्य में उनकी हाकी एकेडमी की योजना है लेकिन इसमें काफी समय लगेगा। उन्होंने यह •ाी कहा कि यदि छत्तीसगढ़ में हाकी के विकास के लिए उनसे सहयोग मांगा जाएगा तो वे सहर्ष सहयोग करने तैयार हैं। तिर्की का यहां नेताजी सुभाष स्टेडियम स्थित वरिष्ठ खेल अधिकारी कार्यालय में स्वागत  किया गया। इस दौरान वरिष्ठ खेल अधिकारी राजेंद्र डेकाटे, नीता डुमरे, नोमान अकरम, परवेज शकीलुद्दीन, अरुण ध्रुव, मो. फारुख, रश्मि तिर्की प्रमुख रूप से मौजूद थीं।

कामनवेल्थ से सबक लें
भारतीय हाकी टीम के पूर्व कप्तान दिलीप तिर्की ने कामनवेल्थ गेम्स की मेजबानी को काफी अहम बताया और कहा कि इससे हमें सबक लेना चाहिए और जो सुविधाएं हमें कामनवेल्थ गेम्स में मिली थीं वह सभी  बड़े टूर्नामेंट में मिलनी चाहिए। तिर्की ने कहा कि कामनवेल्थ गेम्स के लिए काफी लंबे समय तक कैंप का आयोजन किया गया। खिलाड़ियों को ट्रेनिंग के लिए फारेन भेजा गया। यदि ओलंपिक में भी ऐसी ही तैयारियां हों तो हमें पदक मिल सकता है। हमें दीर्धकालीन खेल प्रशिक्षण की योजना पर अमल करना चाहिए। तिर्की ने विदेशियों से सीखने पर ज्यादा जोर देते हुए कहा कि विदेशों में खेलों का क्लब कल्चर है जिसकी जररूत भारत में भी है। इसके अलावा हमें वहां की खेल तकनीक और सुविधाओं पर  अमल कररना चाहिए।

 सबसे बड़ा दल हैंडबाल का


नेशनल गेम्स के कैंप का उद्घाटन 20 को खेल मंत्री करेंगी
रायपुर, १४, जवनरी. झारखंड में 12 फरवरी से आयोजित होने वाले 34वें नेशनल गेम्स में छत्तीसगढ़ के 17 खेलों के कुल 175 खिलाड़ी, कोच और मैनेजर हिस्सा लेंगे। इन खेलों के प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन खेल मंत्री लता उसेंडी राजधानी में 20 जनवरी को यहां न्यू सर्किट हाऊस में करेंगी। इसके पूर्व 18 जनवरी से कैंप प्रारंभ  कर दिए जाएंगे। नेशनल गेम्स में सर्वाधिक 36 खिलाड़ी हैंडबाल के होंगे। इसके बाद बास्कटेबाल का सबसे बड़ा दल होगा। 
छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के सचिव बशीर अहमद खान ने बताया कि 34वें नेशनल गेम्स में कुल 175 खिलाड़ियों और अधिकारियों का दल हिस्सा ले रहा है। नेशनल गेम्स में कुल 17 खेलों में छत्तीसगढ़ की भागीदारी होगी। इनमें एथलेटिक्स, अरचरी, तैराकी, बास्केटबाल, टेबल टेनिस, बैडमिंटन, शूटिंग, जिम्नास्टिक, हैंडबाल, कराते डू, फेंसिंग, बाक्सिंग, वेटलिफ्टिंग, क्याकिंग एंड केनोइंग, थ्रेथलान, स्क्वैश और खो-खो शामिल  है। 21 दिनों तक विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन रायपुर और •िालाई में किया जाएगा। इसका समापन 8 फरवरी को होगा। समापन समारोह में मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह मुख्य अतिथि होंगे। प्रशिक्षण शिविर के उद्घाटन के दौरान खेल मंत्री लता उसेंडी नेशनल गेम्स के लिए पात्रता प्राप्त खेलों के राज्य खेल संघों को चेक द्वारा राशि का भूगतान करेंगी। समापन समारोह में खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों व प्रबंधकों को ट्रेक सूट, जूता व किट वितरित की जाएगी। छत्तीसगढ़ के 175 सदस्यीय नेशनल गेम्स के दल में सबसे बड़ा दल हैंडबाल का होगा जिसमें 36 खिलाड़ी और अधिकारी शामिल होंगे। हैंडबाल ने महिला और पुरुष दोनों वर्ग में पात्रता हासिल की है। इनमें 16-16 खिलाड़ियों के अलावा दो-दो कोच व मैनेजर शामिल होंगे। हैंडबाल के बाद दूसरा सबसे बड़ा दल बास्कटेबाल का होगा जिसके 24 खिलाड़ी और चार अधिकारियों सहित कुल 28 लोगों की भागीदारी होगी। बास्केटबाल ने  नेशनल गेम्स के लिए महिला और पुरुष दोनों वर्ग में हिस्सा ले रही है। अन्य खेलों में एथलेटिक्स में 13, तीरंदाजी में 6, तैराकी में 11, टेबल टेनिस में 7, बैडमिंटन में 3, शूटिंग में अनुमानित 15, जिम्नास्टिक में 6, कराते डू में 3, फेसिंग और बाक्सिंग में 6-6, वेटलिफ्टिंग में 3, क्याकिंग एंड केनोइंग में 6, थ्रेथलान 4, स्क्वैश में 8 और खो-खो में 14 खिलाड़ियों व अधिकारियों का दल हिस्सा लेगा।

कुल 86 पुरुष और 52  महिला खिलाड़ी

झारखंड नेशनल गेम्स के 175 सदस्यीय दल में कुल 22  प्रशिक्षक और 15 प्रबंधक हिस्सा ले रहे हैं। इनमें पुरुष खिलाड़ियों की संख्या 86 और महिला खिलाड़ियों की संख्या 52 है। एथलेटिक्स में एक •ाी महिला खिलाड़ी नेशनल गेम्स के लिए पात्र नहीं है। कुल 10 पुरुष खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। आरचरी में 4 महिला, तैराकी में 4-4 महिला-पुरुष, बास्केटबाल में 12 महिला, 12 पुरुष. टेबल टेनिस में 5 पुरुष, बैडमिंटन में 2 पुरुष, शूटिंग में 8 पुरुष, 4 महिला, जिम्नास्टिक में 2 पुरुष 2 महिला, हैंडबाल में 16 पुरुष, 16 महिला. कराते डू में 2 पुरुष, फेसिंग में 4 महिला, बाक्सिंग में 2 महिला, 2 पुरुष, वेटलिफ्टिंग में एक महिला, एक पुरुष, केनोइंग एंड क्याकिंग में 4 पुरुष, थ्रेथलान में 3 पुरुष स्क्वैश में 3 पुरुष, 3 महिला और खो-खो में 12 सदस्यीय पुरुष टीम जौहर दिखाएगी।

बस्तर को मिला मैराथन का तोहफा

  आश्रम के खिलाड़ियों को लाखों के खेल उपकरण
रायपुर, 13 जनवरी, २०११. राज्य निर्माण के इस एक दशक में पहली बार बस्तर के खिलाड़ियों को, खासतौर पर माता रुकमणी सेवा संस्थान डिमरापाल को लाखों रुपए की खेल सामग्री खेल संचालक ने दूसरे ही दिन प्रदान कर दी। राज्य मैराथन में बेहतर प्रदर्शन करने के दौरान आश्रम के संचालक पद्मश्री धर्मपाल सैनी ने खेल विभाग से खेल उपकरणों की मांग की थी जिससे बस्तर के खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका मिल सके। इस मांग पर खेल विभाग ने तत्काल कदम उठाया और दूसरे ही दिन कई खेल उपकरण दे दिए।पाटन में आयोजित हुई राज्य मैराथन में पिछले साल की तरह इस साल भी सर्वाधिक खिताब बस्तर के खिलाड़ियों ने हासिल किए। महिला और पुरुष वर्ग में कुल 21 खिलाड़ियों ने मैराथन में अपना स्थान बनाया। शेष 19 खिलाड़ी अलग-अलग जिलों के थे। बस्तर के सभी खिलाड़ी माता रुकमणी सेवा संस्थान डिमरापाल आश्रम, माता शबरी आदिवासी कन्या आश्रम चिउरगांव और घुरली आश्रम के थे। बिना किसी कोच और खेल उपकरणों की सुविधाओं के बस्तर के खिलाड़ियों ने नंगे पैर ही मैराथन में हिस्सा लिया और अपनी क्षमता प्रदर्शित कर दी। इस दौरान आश्रम के संचालक पद्मश्री धर्मपाल सैनी से खेल संचालक जीपी सिंह ने कहा था कि जो भी सुविधाएं मांगी जाएंगी प्रदान की जाएगी। इसके ठीक एक दिन बाद श्री सैनी ने आश्रमों के लिए खेल सामग्री की मांग की और खेल विभाग ने तत्काल कई खेल उपकरण मुहैया करा दिए। श्री सैनी ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में पिछले तीन दशकों से उनका आश्रम जनजातीय छात्र-छात्राओं को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ाते आ रहा है। खेल के क्षेत्र में बस्तर के चार आश्रम विशेष रूप से उभरकर सामने आए जिनमें तोकापाल विकासखंड का माता रुकमणी सेवा संस्थान डिमरापाल, बकावंड विकासखंड का शबरी आदिवासी कन्या आश्रम चिउरगांव, बालक-बालिका आदिवासी आश्रम घुरली शामिल है। इन तमाम आश्रमों में खेल उपकरणों का अभाव अब दूर हो जाएगा। खेल संचालक जीपी सिंह ने बताया कि खेल विभाग के पास फिलहाल जितने खेल उपकरण हैं वे आश्रमों को मुहैया कराए जा रहे हैं। जिन उपकरणों की कमियां होंगी वे भी उपलब्ध कराए जाएंगे। माता रुकमणी कन्या आश्रम में 600 छात्राओं के लिए दो रनिंग मशीन, 20 मैराथन जूते, एक जोड़ी फुटबाल गोलपोस्ट, 24  फुटबाल जूते, 12 फुटबाल, 12 स्पाइक शू, 12 थ्रोबाल, 6 वालीबाल, एक जोड़ी हैंडबाल, हाकी गोल पोस्ट, 10 हैंडबाल, टेनिस बाल क्रिकेट का सेट, 24 बाल, जिम्नास्टिक सेट की मांग की गई। माता शबरी कन्या आश्रम में 130 बालिकाओं के लिए जिम सेट, रनिंग मशीन, बास्केटबाल गोल पोस्ट सहित, बास्केटबाल, मैरथन जूते, वालीबाल का गोल पोस्ट, वालीबाल, गोला फेंक, तवा फेंक और भाला फेंक के उपकरण मांगे गए हैं। दंतेवाड़ा जिले के घुरली स्थित बालक-बालिका आश्रम के लिए भी जिम, रनिंग मशीन, मैराथन के जूते, वालीबाल, गोला, तवा, भाला फेंक के उपकरण तथा हाई जम्प पोस्ट व स्टाफ बाल सेट की मांग की गई है।
अगले साल दौड़ेंगे जूतों के साथराज्य मैराथन में राज्य के दूरस्थ इलाकों के धावक आज भी नंगे पैर दौड़ पूरी करते हैं। कई बार खिलाड़ियों के पैरों में छाले पड़Þ जाते हैं। लेकिन खेल विभाग से मिले खेल उपकरणों और मैराथन शू के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि बस्तर के खिलाड़ी अब जूते पहनकर मैराथन में भाग्य आजमाएंगे। श्री सैनी ने कहा कि वे इसके लिए उन्हें सालभर अभ्यास कराएंगे। इससे आश्रम के खिलाड़ियों को अधिकृत राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी हिस्सा लेने का मौका मिल सकेगा। राष्ट्रीय स्तर पर मैराथन व एथलेटिक्स की प्रतियोगिताओं में बिना जूतों के प्रवेश नहीं दिया जाता और कई बार खिलाड़ी राष्ट्रीय स्पर्धाओं से बाहर भी हुए हैं।

मनीषा रामटेके ने दिलाया राज्य को रजत पदक
हरियाणा के यमुना नगर में 2 जनवरी से 5 जनवरी तक आयोजित हुई यूथ नेशनल वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में रायपुर की मनीषा रामटेके ने राज्य के लिए रजत पदक हासिल किया। मनीषा ने 40 किलोग्राम वजन वर्ग में 48 किलोग्राम स्नैच के साथ यह पदक हासिल किया। गुढियारी स्थित राधाकृष्णा हायर सेकंडरी स्कूल की दसवीं की छात्रा मनीषा के कोच जय सतनाम व्यायाम शाला के संचालक और विक्रम अवार्डी बुधराम सारंग हैं। मनीषा की इस उपलब्धि पर रायपुर जिला भारोत्तोलन संघ के अध्यक्ष रज्जन श्रीवास्तव, सचिव राजेंद्र सिंग यादव सहित कई पदाधिकारियों व खिलाड़ियों ने हर्ष व्यक्त किया है।