22 जनवरी, 2011

नेशनल में खिताब की उम्मीद


59वीं राष्ट्रीय शरीर सौष्ठव प्रतियोगिता के मुकाबले मुंबई में



रायपुर, २१ जनवरी, २०११. । मुंबई के थाणे में 59वीं राष्ट्रीय शरीर सौष्ठव प्रतियोगिता के मुकाबले कल 22 जनवरी से शुरू हो रहे हैं। इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने छत्तीसगढ़ की टीम मुंबई पहुंच चुकी है। राज्य के खिलाड़ियों से खिताब की उम्मीद की जा रही है। प्रतियोगिता में भारत श्री के खिताब के लिए भी मुकाबले खेले जाएंगे और पी सालोमन से खिताबी हैट्रिक की उम्मीद की जा रही है। पिछले साल भी छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कई खिताब हासिल किए थे।
मुंबई के थाणे में 59वीं राष्ट्रीय शरीर सौष्ठव प्रतियोगिता के मुकाबले 22 से 23 जनवरी तक खेले जाएंगे। इसके लिए राज्य की टीम घोषित कर दी गई है। टीम में दीपक कुमार बेहरा, तालिब खान, ताम्बी स्वामी, सुमित चौधरी, राजकिशोर झा, सुरेंद्र साहू, टोनी जाब सभी रायपुर, देवनाथ, रघुसिंग, ऋतुकुमार, पी सालोमन दुर्ग, कमलेश पटेल राजनांदगांव, गणेश दत्ता बिलासपुर शामिल हैं। राष्ट्रीय स्तर पर पी सालोमन, राजकिशोर झा, सुमित चौधरी का बेहतर प्रदर्शन रहा है। पी सालोमन अंतरराष्ट्रीय बाडी बिल्डर हैं और हाल ही में उन्होंने जर्मनी की मिस्टर वर्ल्ड बाडी बिल्डिंग चैंपियनशिप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया है। छत्तीसगढ़ पुलिस के पी सालोमन ने पिछले साल राजधानी में 21 से 22 अगस्त 2010 तक आयोजित हुई 57वीं राष्ट्रीय शरीर  सौष्ठव प्रतियोगिता में लगातार दूसरी बार   भरत श्री के खिताब पर कब्जा जमाया था। इस प्रतियोगिता के पहले दिन तीन खिताब के लिए मुकाबले खेले गए थे जिनमें पश्चिम भारत श्री, भारत उदय और भररत केसरी के खिताब शामिल थे। सभी की नजरें टिकी थीं भारत श्री के खिताब पर और इस खिताब के लिए छत्तीसगढ़ के अंतरराष्ट्रीय बॉडी बिल्डर पी सोलमन पर नजरें टिकी हुईं थीं। सालोमन ने पहले दिन ही पश्चिम भारत श्री का खिथाब हासिल कर राज्य को राष्ट्रीय स्पर्धा में गौरवान्वित कर दिया था। सालोमन से उम्मीद की जा रही थी कि वे पश्चिम भारत श्री के साथ-साथ भारत श्री का खिताब भी अपनी झोली में डालें। सालोमन ने इन उम्मीदों पर खरा उतरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सालोमन ने बेहतरीन अंदाज में अपनी मांसपेशियों का जौहर दिखाया। पी सालोमन ने अपने बेहतरीन खेल जौहर से न केवल भारत श्री का दोहरा खिताब हासिल किया बल्कि छत्तीसगढ़ के बॉडी बिल्डिंग के इतिहास में नया रिकार्ड भी बना दिया। सालोमन से पहले कोई दूसरा बॉडी बिल्डिर एक साथ पश्चिम भारत श्री और भारत श्री का खिताब हासिल करने का रिकार्ड नहीं बना सका है। मुंबई की 59वीं नेशनल में पी सालोमन से खिताब बरकरार रखने की उम्मीद की जा रही है। राजकिशोर झा और सुमित चौधरी भी राष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन कर चुके हैं। इस बार इन तीन खिलाड़ियों के अलावा नए खिलाड़ियों से भी खिताब हासिल करने की उम्मीद है। मुंबई नेशनल में भारत श्री, भारत कुमार, भारत उदय, भारत किशोर, भारत केशरी के खिताब के लिए मुकाबले होंगे।
दसवें साल मिले दस पदक

राज्य निर्माण का दसवां साल नेटबाल, बास्केटबाल और लान टेनिस की तरह शरीर सौष्ठव के लिए भी काफी महत्वपूर्ण साबित हुआ। शरीर सौष्ठव के खिलाड़ियों ने पिछले साल की तरह इस साल भी काफी बेहतरीन खेल का प्रदर्शन दिखाया। 57वीं सीनियर नेशनल बाडी बिल्डिंग चैंपियनशिप में छत्तीसगढ़ ने खिताब के साथ-साथ दस पदक भी हासिल किए। इस प्रतियोगिता में सालोमन सहित कुल 14 खिलाड़ियों ने छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया। इनमें दिनेश ठाकुर, सुमित, भूपेंद्र साहू, फूलचंद साहू, सिद्धार्थ पंडित, अभीजीत चटर्जी, सुमित राय चौधरी, राज किशोर झा, टोनी जाब, सचिन मिश्रा, वीरेंद्र ठाकुर, नरेंद्र  सोनवानी, बृजकिशोर मिश्रा, प्रबंधक कमल शानबाग, कोच तामेश्वर बंजारे प्रमुख रूप से शामिल  थे। भारत केसरी के खिताब के लिए छत्तीसगढ़ के बृजबिहारी मिश्रा ने कांस्य पदक हासिल किया तो नरेंद्र सोनवानी ने बेस्ट आफ फोर में जगह बनाई। भारत श्री के खिताब के लिए हुए मुकाबलों में सुमित और राजकिशोर झा ने रजत पदक हासिल किया जबकि पी सालोमन ने सीधे  स्वर्ण पर निशाना साधा। पश्चिम भारत श्री में छत्तीसगढ़ को दो स्वर्ण और तीन रजत पदक मिले।  टोनी जाब को कांस्य पदक मिला। सचिन मिश्रा इसके पूर्व 2008 में भारत कुमार का खिताब हासिल कर चुके हैं। भारत किशोर के लिए हुए खिताबी मुकाबलों में छत्तीसगढ़ के अभीजीत चटर्जी ने चौथा स्थान हासिल किया।






गांवों में खोजें खेल प्रतिभएँ
चैलेंजेस आफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स पर राष्ट्रीय सेमीनार
रायपुर, २१ जनवरी, २०११.  खेल प्रतिभाएं तो ग्रामीण क्षेत्रों में है लेकिन हम उन्हें खोज नहीं पा रहे हैं। ग्रामीणों को खेल में आगे लाना बेहद जरूरी है। मौजूदा समय में खिलाड़ी उन्हीं खेलों में भाग रहे हैं जिनमें सबसे ज्यादा पैसा है। फिजीकल एजुकेशन की पूरे देश में बाढ़ आ गई है लेकिन क्वालिटी की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है। यह तमाम बातें साइंस कालेज की मेजबानी में आयोजित चैलेंजेस आफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार के पहले दिन सामने आईं। इस सेमिनार में देशभर के शारीरिक शिक्षा के चुनिंदा विशेषज्ञ अपना व्याख्यान दे रहे हैं और शोध पत्र भी प्रस्तुत कर रहे हैं।
शासकीय नागार्जुन स्नातकोत्तर विज्ञान महाविद्यालय (साइंस कालेज) की मेजबानी में आयोजित इस सेमीनार का उद्घाटन शुक्रवार को सुबह संसदीय सचिव विजय बघेल ने किया। इस अवसर पर श्री बघेल ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि सेमिनार में दो मंत्री (उच्च शिक्षा मंत्री हेमचंद यादव, खेल मंत्री लता उसेंडी) नहीं आए और उन्हे मुख्य अतिथि बनाया गया। उन्होंने का कि बचपन के दिनों में वे खेलों में ज्यादा ध्यान देते थे और यही वजह थी कि बार्डर लाइन में पास होते थे। मौजूदा परिवेश में हर कोई व्यावसायिक हो गया है। यहां तक कि रिश्ते भी व्यवसाय बन गए हैं। लड़की की शादी के लिए लड़का ऐसा खोजेंगे जो ज्यादा कमाई करता हो। खेल में भी व्यवसायिकता आ गई है। खिलाड़ी उन्हीं खेलों में ज्यादा हिस्सा ले रहे हैं जिनमें पैसा ज्यादा है। उन्होंने कहा कि 71 रुपए और 51 रुपए का पहले कबड्डी प्रतियोगिता का नगद पुरस्कार हुआ करता था और हम 40 किलोमीटर दूर तक सायकल से सफर कर प्रतियोगिता में हिस्सा लिया करते थे। आज वह जुनून देखने को नहीं मिलता। श्री बघेल ने बताया कि इन्हीं चीजों को देखते हुए सरकार प्रयास कर रही है कि उद्योगपति खेलों को गोद लें और खिलाड़ियों के लिए नौकरी की  व्यवस्था करें जिससे उनका जीवन सुरक्षित हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल के दिनों में शारीरिक शिक्षा और बागवानी जैसे विषय हुआ करते और इसके  नंबर मिलते थे। आज यह सब नहीं है क्योंकि शिक्षा भी व्यवसायिक हो गई है व्यवहारिक नहीं। इसके पूर्व साइंस कालेज के प्राचार्य केएन बापट और आयोजन सचिव डा. विष्णु कुमार श्रीवास्तव ने अपने विचार रखे। सेमीनार के पहले दिन उद्घाटन अवसर पर प्रमुख व्याख्यान मेजर जनरल शिबनाथ मुखर्जी द्वारा प्रस्तुत किया गया।
 श्री मुखर्जी लक्ष्मीबाई नेशनल यूनिवर्सिटी आफ फिजिकल एजुकेशन के पूर्व कुलपति हैं। उन्होंने अपने व्याख्यान में कहा कि जीवन में कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जिसमें चैलेंज नहीं होता। हर क्षेत्र में चैलेंज है और फिजीकल एजुकेशन व स्पोर्ट्स में भी चैलेंज है। जरूरत है इस चैलेंज को समझ पाने की। श्री मुखर्जी ने इस  बात पर  ज्यादा जोर दिया कि ग्रामीण इलाकों में  खेल प्रतिभाएं मौजूद  हैं लेकिन हम उन्हें आगे नहीं ला पा रहे हैं। उन्होंने पायका को काफी अच्छी योजना बताते हुए कहा कि इसके बेहतर परिणाम सामने आएंगे। सेमिनार के उद्घाटन अवसर पर वरिष्ठ क्रीड़ाधिकारी सुरेंद्र दुबे का संसदीय सचिव और उनके शिष्य विजय बघेल ने शाल और श्रीफल देकर सम्मान  किया। इस अवसर पर डा. जेएस नरुका (एडवाइजर एवं कंसलटेंट स्पोर्ट्स एवं यूथ अफेयर के पूर्व कुलपति), पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग की विभागाध्यक्ष डा. रीता वेणुगोपाल, डा. सीडी आगाशे, डा. रविंद्र मिश्रा, डा. विपिन शर्मा, डा. आलोक दुबे सहित कई कालेजों के क्रीड़ाधिकारी, खेल विशेषज्ञ और प्राध्यापक मौजूत थे।  इस सेमीनार में देश के ख्यातिप्राप्त खेल विशेषज्ञ, क्रीड़ाधिकारी, खेल प्रशासनिक अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। सेमनीर में शारीरिक क्रीड़ा के वि•िान्न आयामों एवं विषयों पर विचार मंथन किया जाएगा। सेमीनार में शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में मार्डन ट्रेंड, शारीरिक शिक्षा कारीकूलम डिजाइनिंग, अंतरविषय परिचर्चा, शारीरिक शिक्षा एवं स्वस्थ जीवन, महिलाओं में व्यायाम का एंडी एजिंग में महत्व, राष्ट्रीय स्तर पर शारीरिक शिक्षा परिषद का निर्माण एवं सतही स्तर पर शारीरिक शिक्षा एवं खेलों का विकास, क्रीड़ा के क्षेत्र में भारतीय ओलंपिक परिषद की भूमिका, खेलों में शासकीय एवं अशासकीय संस्थाओं की भूमिका, खेलों में महिलाओं की सहभागिता, भारत में साहसिक खेलों के विकास की संभावनाएं, इवेंट मैनेजमेंट एवं पेशे के रूप में तथा स्पोर्ट्स एरगोनाकिम्स   जैसे नवीन विषयों पर  चर्चा की जाएगी।

आज अंतिम दिन
सेमिनार का कल 23 जनवरी को अंतिम दिन होगा। इस दिन भी कई विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। सुबह 9 बजे से 9.30 बजे तक रविवि के शारीरिक शिक्षा विभाग की विभागाध्यक्ष डा. रीता वेणुगोपाल, 9.30 से 10 बजे तक आईजीपीई के एसोसिएट प्रोफेसर डा. संदीप तिवारी, 10 बजे से 10.30 बजे तक एलएनयूपीई के प्रोफेसर डा. विवेक पांडेय, 10.30 से 11 बजे तक डा. रिशी त्रिपाठी कानपुर अपने विचार रखेंगे। 11.15 से दूसरा सत्र शुरू होगा जिसमें डा. अमित श्रीवास्तव वाराणसी, डा. चिनप्पा रेडी एनएपीईएसएस हैदराबाद, डा. विष्णु कुमार श्रीवास्तव रायपुर अपने विचार रखेंगे। दोपहर 2 बजे से ओरल प्रजेंटेशन के बाद ओपन सेशन और फिर शाम चार बजे के बाद सेमिनार का समापन होगा।
स्पोर्ट्स ला से मिलेगा खिलाड़ियों को न्याय

देश के खेल जगत में जल्द ही स्पोर्ट्स ला भी लागू हो जाएगा जो खिलाड़ियों को न केवल न्याय दिलाएगा बल्कि खेल विवाद से संबंधित मुद्दों को भी सुलझाएगा। यह जानकारी चैलेंजेस आफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में हिस्सा लेने आए अधिवक्ता डा. अमरेश कुमार ने दी। वे एशियन काउंसिंल आफ स्पोर्ट्स आर्बिटेशन के महासचिव भी  हैं। उन्होंने बताया कि इस संस्था के एशिया महादीप में जितने ओलंपिक संघ है, सदस्य हैं। इसके अलावा स्वीट्जरलैंड में इंटरनेशनल स्पोर्ट्स कोर्ट भी है। इंटरनेशनल कोर्ट 48 घंटे के भीतर विवादों का निपटारा करता है और अधिक से अधिक 48 दिनों के भीतर किसी विवाद का निपटारा होता है। डा.कुमार ने बताया कि भारत में इंडियन स्पोर्ट्स आर्बिटेशन या कहें भारतीय खेल अधिकरण का गठन होगा जो भारतीय ओलंपिक संघ से संबद्ध रहेगा। इसे मान्य करने अगले माह 12 फरवरी से झारखंड में आयोजित होने वाले 34वें नेशनल गेम्स के दौरान होने वाली भारतीय ओलंपिक संघ की सामान्य सभा की बैठक में मुहर लगाई जाएगी। इस अधिकरण में विधि के जानकार और खेलों के जानकार होंगे। इसमें खिलाड़ियों के यौन शोषण के मामले से लेकर खिलाड़ियों के साथ अन्याय, खेल संघों के मामले, पुरस्कार संबंधित मामले भी सुलझाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि हमारे देश में स्पोर्ट्स ला का अभी उतना चलन नहीं है लेकिन विदेशों में यह काम कर रहा है। आस्ट्रेलिया में दो खंडपीठ है। एक सिडनी में और एक न्यूयार्क में है।
पायका के बाद आएगा मायका : मुखर्जी
लक्ष्मीबाई नेशनल यूनिवर्सिटी आफ फिजिकल एजुकेशन के पूर्व कुलपति डा. शिवनाथ मुखर्जी ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को सामने लाने पंचायत युवा क्रीड़ा एवं खेल अभीयान (पायका) काफी अच्छी योजना है। पायका की योजनाओं को लेकर कई बार अपना मार्गदर्शन दे चुके डा. मुखर्जी ने बताया कि पायका के बाद मायका योजना आने वाली है। मायका यानी (म्यूनिसिपल) नगर निगम या पालिका युवा क्रीड़ा खेल अभीयान योजना। इसकी तैयारियां और प्रशिक्षण दोनों चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पायका में क्रीड़ा श्री एक अहम पार्ट होता है और उसका मासिक मानदेय पांच सौ रुपए काफी कम है। संभवत: 2012 तक मानदेय में काफी इजाफा होगा। डा. मुखर्जी ने कहा कि गांवों में बड़ा बेस मिलता है। मौजूदा समय में खेल छोटे बेस में है क्योंकि यह शहरों तक सिमटा हुआ है और यही वजह है कि हमें पदक भी कम मिल रहे हैं। उन्होंने खेल आयोजनों पर ज्यादा जोर देते हुए कहा कि इससे जागरुकता बढ़ती है। 1982 में देश में एशियन गेम्स आयोजित हुए थे और इसी वजह से देश की पहली स्पोर्ट्स पालिसी बनी थी। वरन देश में स्पोर्ट्स पालिसी ही नहीं थी। देश में काफी सालों बाद कामनवेल्थ गेम्स का बड़ा आयोजन हुआ। इससे काफी जागरुकता बढ़ी है और खेलों के प्रति लोगों का झुकाव  बढ़ गया है।





पावरलिफ्टिंग में छाईं राज्य की लड़कियां
जूनियर लड़कियों ने लगातार चौथी बार जीती चैंपियनशिप
 केरल में खेली गई जूनियर नेशनल पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में छत्तीसगढ़ की बालिका टीम ने सर्वाधिक 58 अंकों के साथ चौथी बार टीम चैंपियनशिप पर कब्जा जमा लिया। इस चैंपियनशिप में केरल ने दूसरा स्थान और उत्तरप्रदेश की टीम ने तीसरा स्थान हासिल किया।
छत्तीसगढ़ पावरलिफ्टिंग एसोसिएशन के सचिव और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी कृष्णा साहू ने बताया कि पावरलिफ्टिंग में छत्तीसगढ़ की अब तक की यह सबसे अहम उपलब्धि है। टीम को वर्ष 2008 में डिब्रूगढ़ असम में, 2009 पटिलाया पंजाब में, 2010 गोवाहाटी असम में और इस वर्ष 2011 में एलप्पी केरल में लगातार चौथी बार चैंपियनशिप की उपलब्धि हासिल हुई है। श्री साहू ने बताया कि इस प्रतियोगिता मे ंराष्ट्रीय पदक विजेता पूजा नायक को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के आधार पर सर्वाधिक अंक दिए गए और पूजा को स्ट्रांग वूमन आफ इंडिया के खिताब से भी नवाजा गया। पूजा ने वर्ष 2009 में जमशेदपुर नगर में सबजूनियर नेशनल पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में भी स्ट्रांग वुमन आफ इंडिया का खिताब हासिल किया था। केरल ेकी जूनियर नेशनल में 44 किलोग्राम वजन वर्ग में लक्ष्मी साहू ने स्वर्ण, 52 किलोग्राम में पूजा नायक ने स्वर्ण, 56 किलोग्राम में संतोषी विभार ने रजत, शालिनी नायक ने कांस्य, 52 किलोग्राम में रोहिणी ने कांस्य, 60 किलोग्राम में प्रेरणा राणे ने कांस्य  पदक हासिल  किया। बालक वर्ग में रंजीत तांडी ने 52 किलोग्राम वजन वर्ग में स्काट में कांस्य पदक, मधुसूदन दीप ने 56 किग्रा में डेड लिफ्ट मे ंरजत पदक, 60 किग्रा में हरीश कुमार ने ब्रेंच प्रेस में कांस्य पदक और 125 किलोग्राम से ऊपर वर्ग में अभिषेक घोष ने ब्रेंचप्रेस में रजत पदक हासिल किया। श्री साहू ने बताया कि राज्य में यह खेल अब व्यक्तिगत खेलों में सर्वाधिक राष्ट्रीय पदक हासिल करने वाला खेल हो गया है। छत्तीसगढ़ के पावरलिफ्टरों ने इस खेल में पिछले 35 वर्षों में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर कीर्तिमान स्थापित किया है। राज्य को यह उपलब्धियां दिलाने में ए नागभूषण, के एस अनिलजीत, कृष्णा साहू, एमए शफीक का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। छत्तीसगढ़ की इस उपलब्धि पर राज्य पावरलिफ्टिंग संघ के मुख्य संरक्षक आईजी मुकेश गुप्ता, खेल संचालक जीपी सिंह, एसके जैन सहित बीएसपी के अधिकारियों ने हर्ष व्यक्त किया है।

  
बास्केटबाल की संभावित टीमें घोषित
नेशनल गेम्स और फेडरेशन कप में लेगी हिस्सा
राजधानी में अगले माह 10 फरवरी से 16 फरवरी तक आयोजित होने वाली 25वीं फेडरेशन कप महिला-पुरुष बास्केटबाल प्रतियोगिता और झारखंड के 34वें नेशनल गेम्स  के लिए छत्तीसगढ़ की संभावित टीमें घोषित कर दी गई हैं। संभावित टीमों के लिए प्रशिक्षण शिविर का भी आयोजन किया गया है।
प्रदेश  बास्केटबाल संघ के अध्यक्ष राजीव जैन और सचिव राजेश पटेल ने बताया कि झारखंड में 12 फरवरी से नेशनल गेम्स का आयोजन किया जा रहा है। इसेक पूर्व रायपुर में फेडरेशन कप बास्केटबाल प्रतियोगिता का आयोजन होगा। इन स्पर्धाओं के लिए राज्य की महिला और पुरुष टीमों की घोषणा की गई है। साथ ही टीमों के लिए प्रशिक्षण शिविर भी प्रारंभ कर दिया गया गया है। चयन ट्रायल बीएसपी के सहयोग से आयोजित किया गया और संभावित 16 महिला व 16 पुुरुष खिलाड़ियों का चयन किया गया। प्रशिक्षण शिविर भिलाई के पंत स्टेडियम में 20 जनवरी से 1 फरवरी तक आयोजित किया गया है। टीमों की घोषणा प्रदेश बास्केटबाल संघ के अध्यक्ष राजीव जैन, राजेश पटेल और विजय डब्ल्यू देशपांडे ने की। श्री पटेल ने बताया कि पिछले फेडरेशन कप में छत्तीसगढ़ की महिला टीम ने तीसरा और पुरुष टीम ने सातवां स्थान हासिल किया था। इसके आधार पर दोनों टीमों को फेडरेशन कप की पात्रता मिली है। पुरुष टीम को राज्य निर्माण के बाद पहली बार पात्रता मिली  है। महिला टीम ने दो बार फेडरेशन कप का खिताब जीता है। इसके अलावा 2002 में महिला टीम ने हैदराबाद के नेशनल गेम्स में स्वर्ण पदक और 2007 में गोवाहाटी के 33वें नेशनल गेम्स में रजत पदक हासिल किया है। राज्य की दोनों टीमों से इस साल  फेडरेशन कप के साथ-साथ राष्ट्रीय खेलों में भी पदक की उम्मीद है।
संभावित टीमें
महिला : अंजु लकड़ा, सीमा सिंह, भारती नेताम, एम पुष्पा, आकांक्षा सिंह, अरुणा किंडो, एल दीपा, शोषण तिर्की, निकिता गोदामकर, कविता (रेलवे बिलासपुर), कविता, जेलना जोस, रंजीता कौर, पुष्पा निषाद (बीएसपी), पूजा देशमुख (रायपुर), मुख्य प्रशिक्षक राजेश पटेल, सहायक प्रशिक्षक इकबाल अहमद खान, सरजीत चक्रवर्ती, एमवीवीजे सूर्यप्रकाश (बीएसपी)।
पुरुष : अजय प्रताप सिंह, अंकित पाणिग्रही, पवन तिवारी, समीर राय, के राजेश कुमार (बीएसपी), किरणपाल सिंह, लुमेंद्र साहू, मनोज सिंह, शिवेंद्र निषाद, श्रवण कुमार (रेलवे बिलासपुर), आशुतोष सिंह, जानक रानाथ कुमार, आनंद सिंह (दुर्ग), पुष्पांक (राजनांदगांव), मुख्य प्रशिक्षक आरएस गौर, सहायक प्रशिक्षक एस दुर्गेश राजु (बीएसपी), विपिन बिहारी सिंह (बिलासपुर)।

आल इंडिया में बीएसपी को तीसरा स्थान
लड़कों की टीम को पांचवा स्थान
रायपुर। केरल के कोट्टायम में खेली गई द्वितीय अखिल भारतीय जेसीआई आमंत्रण बास्केटबाल प्रतियोगिता में भिलाई इस्पात संयंत्र की महिला टीम ने कांस्य पदक हासिल किया। पुरुषों की टीम पांचवे स्थान पर रही। इस प्रतियोगिता में कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
बीएसपी की महिला टीम ने चौथे और पांचवे स्थान के लिए खेले गए मैच में केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड की टीम को  52-50 अंको से हराकर तीसरा स्थान बनाया। बीएसपी की अंतरराष्ट्रीय जूनियर खिलाड़ी कविता ने 12, एल दीपा ने 10, जेलना जोस ने 4 अंक बनाए। इसके पूर्व सेमीफाइनल में बीएसपी की टीम को तमिलनाडु ने संघर्षपूर्ण मैच में 91-89 अंक से पराजित किया। बीएसपी की पुरुष टीम ने एमईजी बेंगलूर को 48-46 अंकों से हराकर पांचवा स्थान हासिल किया। बीएसपी के अजय प्रताप सिंह ने सर्वाधिक 14, अंकित पाणिग्रही ने 10, मनोज सिंह ने 8, पवन तिवारी ने 6, समीर राय ने 8 अंक बनाए। टीम को क्वार्टर फाइनल में आईसीएफ कपूरथला ने 52-49 अंकों से पराजित किया था। बीएसपी की इस उपलब्धि पर महाप्रबंधक प्रभारी कार्मिक आरके नरुला, बास्केटबाल क्लब अध्यक्ष आरए रिजवी, एके कयाल, मेहमूद हसन, सुखदेव सिंह गिल, साजी टी थामस, एमवीवीजे सूर्यप्रकाश, इकबाल अहमद खान, सरजीत चक्रवर्ती सहित कई पदाधिकारियों ने हर्ष व्यक्त किया है।
ये थी टीमें
महिला : कविता (कप्तान), एल दीपा, जेलना जोंस, संगीता मंडल, रंजीता कौर, संगीता दास, पूजा देशमुख, पुष्पा निषाद, संगीता कौर, शरणजीत कौर, शालीनी श्रीवास्तव, सागरिका महापात्रा, अंजना डेजी एक्का, मुख्य प्रशिक्षक राजेश पटेल, सहायक प्रशिक्षक इकबाल अहमद खान, प्रबंधक श्रीमती अनिता पटेल।
पुरुष : अंकित पाणिग्रही (कप्तान), अजय प्रताप सिंह, पवन तिवारी, समीर कुमार राय, के राजेश कुमार, पी मुरली, आनंद सिंह, विनय जनबंधु, लुमेंद्र साहू, मनोज सिंह, मुख्य प्रशिक्षक आरएस गौर, प्रबंधक एस दुर्गेश राजु।