07 फ़रवरी, 2011

खिलाड़ियों के लिए खुला लाखों का खजाना








छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डा. रमन सिंग कीट प्रदान करते हुए. (सभी फोटो-दिनेश यदु)
झारखंड नेशनल गेम्स में पदक जीतकर लाना
 सबसे बड़ा सम्मान : डा. रमन सिंह
 अंतत: इन कयासों पर मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने सोमवार को विराम लगा दिया कि झारखंड के 34वें नेशनल गेम्स में पदक जीतकर लाने वाले छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को कितना नगद पुरस्कार दिया जाएगा। डा. सिंह ने कामनवेल्थ गेम्स में पदक विजेताओं के लिए लाखों रुपए के नगद पुरस्कार की घोषणा की थी। एक बार फिर से उन्होंने खिलाड़ियों के लिए लाखों रुपए के नगद पुरस्कार की घोषणा की है।
रायपुर। मुख्यमंत्री निवास में सोमवार को झारखंड नेशनल गेम्स में हिस्सा लेने वाले प्रदेशभार के विभिन्न खेलों के 201 खिलाड़ियों को डा. रमन सिंह ने किट वितरित की। इस दौरान उन्होंने नेशनल गेम्स में टीम इवेंट और व्यक्तिगत खेलों के लिए अलग-अलग घोषणा की। घोषणा के तहत टीम गेम में स्वर्ण पदक जीतकर लाने वाली टीम को पांच लाख रुपए का नगद पुरस्कार दिया जाएगा। इसी तरह कोई टीम यदि रजत पदक हासिल करती है तो उसे तीन लाख रुपए का नगद पुरस्कार मिलेगा। कांस्य पदक हासिल करने वाली पूरी टीम को दो लाख रुपए का नगद पुरस्कार मिलेगा। व्यक्तिगत स्तर पर कोई खिलाड़ी यदि स्वर्ण पदक हासिल करता है तो उसे एक लाख रुपए का नगद पुरस्कार दिया जाएगा। इसी तरह रजत पदक  हासिल करने पर 75 हजार रुपए और कांस्य पदक हासिल करने पर 50 हजार रुपए का नगद पुरस्कार दिया जाएगा। इस घोषणा के दौरान छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के भी अध्यक्ष डा. रमन सिंह ने कहा कि पदक और सम्मान से बढ़कर पैसा नहीं होता। पदक से पैसा छोटा होता है। पदक की पैसे से कीमत नहीं लगाई जा सकती। खिलाड़ियों का हौसला बढ़े इसलिए नगद पुरस्कार की घोषणा की जा रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी नेशनल गेम्म में बेहतर प्रदर्शन करेंगे और पिछले नेशनल गेम्स से भी ज्यादा पदक हासिल करेंगे। उन्हें इस बात की पूरी उम्मीद है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेलों का काफी अच्छा वातावरण निर्मित हुआ है। ब्लाक स्तर से लेकर जिला व राज्य स्तर पर भी तमाम खेलों के आयोजन हो रहे हैं। खुशी की बात यह भी है  कि छत्तीसगढ़ के दल में रायपुर, दुर्ग, भिलाई, बिलासपुर के शहरी खिलाड़ियों के अलावा बस्तर और सरगुजा जैसे दूरस्थ इलाकों के खिलाड़ी भी शामिल हैं। उन्होंने यह  कहा कि उन्हें खुशी हो रही है कि नेशनल गेम्स में हिस्सा लेने वाले प्रदेशभर के खिलाड़ी उनके निवास पर आए हैं। वे पदक जीतकर लाएंगे तो भी उनका यहां स्वागत किया जाएगा और वे स्वागत करने तैयार रहेंगे। डा. सिंह ने यह भी  कहा कि खिलाड़ियों के गले में मेडल चमकेंगे तब लगेगा कि हमारी मेहनत सफल हो गई। डा. सिंह ने खेल सचिव सुब्रत साहू, खेल संचालक जीपी सिंह सहित छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के पदाधिकारियों और तमाम खेल संघों के पदाधिकारियों व खिलाड़ियों को अपनी शुभकामनाएं दीं। किट वितरण समारोह में खेल सचिव सुब्रत साहू ने कहा कि 34वें नेशनल गेम्स को लेकर खिलाड़ियों से बहुत सी उम्मीदें हैं और विशेष रूप से इस बात की उम्मीद ज्यादा है कि राज्य के खिलाड़ी पिछले नेशनल गेम्स से ज्यादा पदक हासिल करें। वे अधिक संख्या में खिलाड़ियों को पदक के साथ देखना चाहते हैं। खेल संचालक जीपी सिंह ने कहा कि पिछला इतिहास देखें तो पंजाब नेशनल गेम्स के बाद हैदराबाद और असम नेशनल गेम्म में भी, एक के बाद एक पदकों की संख्या बढ़ी है। इस बार की पूरी उम्मीद है कि पदकों की संख्या बढ़ेगी। श्री सिंह ने बताया कि खिलाड़ियों को किट में ट्रेक सूट, जूता, प्लेइंग किट, कैप के अलावा प्रशिक्षण शिविर की राशि और यात्रा भत्ता भी प्रदान किया जा रहा है। प्रशिक्षण शिविर और यात्रा भत्ता व यात्रा व्यय के लिए छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ को कुल 13 लाख 27 हजार 528 रुपए की राशि उपलब्ध कराई गई है। समारोह में छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के सचिव बशीर अहमद खान, कोषाध्यक्ष वै•ाव मिश्रा, राज्य ओलंपिक संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गुरुचरण सिंह होरा, राज्य वालीबाल संघ के अध्यक्ष गजराज पगारिया, सचिव मोहम्मद अकरम खान, राज्य नेटबाल संघ के सचिव संजय शर्मा, राज्य स्क्वैश संघ के सचिव डा. विष्णु श्रीवास्तव, राज्य जिम्नास्टिक संघ के अश्वनी महेंद्रु सहित तमाम खेल संघों के पदाधिकारी और खिलाड़ी मौजूद थे।
18 खेलों के 201 खिलाड़ी दिखाएंगे जौहर


झारखंड नेशनल गेम्स में छत्तीसगढ़ से कुल 18 खेलों के 201 खिलाड़ी अपना जौहर दिखाएंगे। अधिकारी और डेलीगेशन मिलाकर कुल 260 खिलाड़ियों का दल प्रतिनिधित्व करेगा।  यह जानकारी छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के सचिव बशीर अहमद खान ने किट वितरण समारोह के दौरान बताई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2001 के पंजाब नेशनल गेम्स में छत्तीसगढ़ ने तीन पदक हासिल किए थे। इसके बाद 2002 के हैदराबाद नेशनल गेम्स में छत्तीसगढ़ को पांच पदक मिले थे। वर्ष 2007 के असम नेशनल गेम्स में छत्तीसगढ़ ने छह पदक हासिल किए थे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पूरे देश में पहला ऐसा राज्य  है जहां खिलाड़ियों को आर्थिक सुविधाएं काफी बेहतर  दी जाती हैं। उन्होंने बताया कि नेशनल गेम्स के कैंप के लिए ओलंपिक संघ को काफी पहले ही पैसा दिया गया था। लेकिन दो साल से नेशनल गेम्स स्थगित हो रहे थे। इससे ब्याज में मिले पैसों का भी सदुपयोग हो गया। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ रांची में ही नहीं बल्कि   छत्तीसगढ़ के 37वें नेशनल गेम्स में भी खिलाड़ी सर्वाधिक पदक हासिल करेंगे।
पहली नौकरी टेकलाल कुर्रे को

छत्तीसगढ़ के उत्कृष्ठ खिलाड़ियों को नौकरी देने के प्रावधान के तहत सोमवार को मुख्यमंत्री निवास में आरचरी के एनआईएस कोच टेकलाल कुर्रे को पहली नौकरी प्रदान की गई। टेकलाल कुर्रे उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित किए गए थे। उन्हें खेल विभाग में आरचरी का कोच नियुक्त किया गया है। इसके लिए नियुक्ति पत्र उनके पिता श्री कुर्रे को प्रदान किया गया। टेकलाल विशाखापटनम में सीनियर नेशनल आरचरी चैंपियनशिप में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

ट्रैक पर दौड़ेगी लोहांडीगुड़ा की बाला



झारखंड नेशनल गेम्स में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद
रायपुर। झारखंड में 12 फरवरी से शुरू होने वाले 34 वें राष्ट्रीय खेलों की एथलेटिक्स स्पर्धा में लोहांडीगुड़ा की बालमती भी छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। टीएसआरडीएस से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली बालमती की इच्छा राष्ट्रीय टीम से प्रतिनिधित्व करते हुए देश के लिये सोना लाने की है। छत्तीसगढ़ की टीम में बालमती के चयन होने पर टाटा स्टील के कृष्णनंदन (चीफ कारर्पोरेट रिलेशन टाटा स्टील),श्री वरूण झा(वाईस प्रेसिडेंट छत्तीसगढ़ प्रोजेक्ट टाटा स्टील) ने अपनी शु•ाकामनाएं दी और उसकी सफलता की कामना की है।
झारखंड के रांची में 12 से 26 फरवरी तक होने वाले 34 वें राष्ट्रीय खेलों में भाग लेने वाली छत्तीसगढ़ की आठ सदस्यीय टीम में स्थान प्राप्त करने वाली बालमती बस्तर की एक मात्र एथलीट है। टाटा स्टील रूरल डेव्हलपमेंट सोसायटी (टीएसआरडीएस) से बालमती ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है। टाटा स्टील ने अपने टीएसआरडीएस के माध्यम से प्रस्तावित संयंत्र स्थल के प्रभावित लोगों के सामाजिक और आर्थिक विकास की दिशा में जो शुरूआत की है उसके नतीजे आने शुरू हो गये और बस्तर आदिवासी अंचल के बच्चे विभिन्न विधाओं में अपना हुनर दिखा रहे हैं। छत्तीसगढ़ की ओर से प्रतिनिधित्व करने वाली बालमती लोहांडीगुड़ा शासकीय कन्या हायर सेंकडरी स्कूल की कक्षा 11 वीं की छात्रा है। बालमती का प्रारंभ से खेलों के प्रति लगाव था और विशेषकर उसकी रूची दौड़ में थी। उसकी रूची को ध्यान में रखते हुए टीएसआरडीएस के खेल प्रशिक्षक शंकर पटेल का ध्यान उस पर गया और उन्होंने बालमती की प्रतिभा को तराशना शुरू किया। इसका परिणाम भी जल्द ही दिखाई दिया जब बालमति ने पेंड्रा में संपन्न हुई राज्य स्तरीय शालेय खेलों में बस्तर संभाग की ओर से प्रतिनिधित्व करते हुए 1500 मीटर, 3000 और 5000 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक हासिल किया।  सरल व शर्मीली बालमती आज के खेलों की चकाचौंध से पूरी से तरह से दूर है उसे केवल इतना ही मालूम है कि उसे दौड़ना है और जो विश्वास उस पर व्यक्त किया गया है उस पर उसे खरा उतरना है। छत्तीसगढ़ की ओर से प्रतिनिधित्व करने वाली बालमती ने इससे पूर्व राष्ट्रीय शालेय खेलों में छत्तीसगढ़ की ओर से कोलकाता, केरल, उत्तर प्रदेश, मुंबई, बिहार और अमृतसर में हुई प्रतियोगिताओं की ट्रैक एंड फील्ड में दौड़ लगाई है। राष्ट्रीया खेलों में राज्य की टीम में अपने चयन को लेकर वह काफी प्रसन्न है, बालमती ने कहा कि जब उसे टीम में लिये जाने की सूचना मिली तो पहले तो उसे सहसा विश्वास नहीं हुआ लेकिन बाद में उसके साथ अ•यास करने वाली अन्य खिलाड़ियों से उसे जब बधाई मिली तो उसे यकीन हुआ। राज्य की टीम में चयन होने का श्रेय बालमती ने टीएसआरडीएस और प्रशिक्षक शंकर पटेल को दिया। बालमती ने टीम ने 1500 व 3000 ,5000 मीटर दौड़ में टीम चयन ट्रायल के दौरान सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए जो समय निकाला उससे चयनकर्ता काफी प्रभावित हुए। इन दिनो बालमती भिलाई के जयंती स्टेडियम में चल रहे टीम प्रशिक्षण शिविर में राज्य टीम के प्रशिक्षक राधाकृष्णनन पिल्लई के मार्गदर्शन में अभ्यास कर रही है। प्रशिक्षक श्री पिल्ले ने कहा कि बालमती काफी प्रतिभाशली खिलाड़ी हैं और प्रशिक्षण अवधि के दौरान जो समय वह निकाल रही है उससे यह कहा जा सकता है कि वह पदक हासिल करेगी।
मां की ख्वाहिश, बेटा भी हिस्सा ले खेलों में
राष्ट्रीय खेलों में छत्तीसगढ़ की ओर से प्रतिनिधित्व मिलने पर बालमती की मां ओमबती यादव आंगनबाड़ी कार्यकर्ता है और बालमती के राज्य एथलेटिक टीम में चयन होने पर वे बेहद प्रसन्न मुद्रा में थी। ओमबती भिलाई में प्रशिक्षण ले रही बालमती से मिलने के लिये लोहांडीगुड़ा से भिलाई पहुंची थी। उन्होंने कहा कि 6 बच्चों में उनकी दो लड़कियां बालमती और सुमित्रा को बचपन से ही खेलों के प्रति बेहद लगाव है और खेलों के प्रति उनकी दिलचस्पी को देखते हुए उन्होने दोनों को खिलाड़ी बनाने का निर्णय लिया। बालमती जहां ट्रैक पर दौड़ रही हैं वहीं उसकी छोटी बहन सुमित्रा खो-खो  में बस्तर की ओर से प्रतिनिधत्व कर चुकी है। बालमती के राष्ट्रीय खेलों में प्रदर्शन और पदक जीतने के बारे में ओमबती ने कहा कि उसका प्रदर्शन हमेशा से अच्छा रहा है और वह अपना बेहतर प्रदर्शन करना भी चाहती है उसे परी उम्मीद है कि बालमती अपने राज्य के लिये पदक अवश्य जीतेगी। लेकिन इसके बाद भी उस दिन के प्रदर्शन और भाग्य पर भी बहुत कुछ निभर  रहेगा। ओमबती ने कहा कि वह अपनी दो लड़कियों की तरह अपने एक  मात्र छोटे लड़के को भी खिलाड़ी बनाना चाहती है। अपनी दोनों लड़कियों के इस मुकाम तक पहुंचने के लिये उन्होंने टाटा स्टील रूरल डेव्हलपमेंट सोसायटी (टीएसआरडीएस) को पूरा श्रेय दिया और कहा कि चूंकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता होने के नाते वे अपनी लड़कियों के खेलों की ओर ध्यान नहीं दे पाती ऐसे में टीएसआरडीएस के प्रशीक्षक ने इस कमी को पूरा कर दिया।

रेलवे और दिल्ली से मिलेगी टक्कर






फेडरेशन कप के लिए छह घंटे कड़ा अभ्यास
 कर रही हैं छत्तीसगढ़ की टीमें
 राजधानी में 10 फरवरी से खेली जाने वाली 25वीं फेडरशन कप बास्केटबाल प्रतियोगिता की तैयारियां जारी हैं। छत्तीसगढ़ की महिला टीम से पदक की पूरी उम्मीद की जा रही है। मेजबान महिला टीम के लिए रेलवे और दिल्ली की टीमें सबसे बड़ी चुनौती साबित होंगी। ये दोनों टीमें खिताब की प्रबल दावेदार हैं। इस प्रतियोगिता में राज्य की महिला और पुरुष दोनों टीमें हिस्सा ले रही हैं।
रायपुर। 25वीं फेडरेशन कप बास्केटबाल प्रतियोगिता का आयोजन राजधानी के इनडोर स्टेडियम में 10 फरवरी से 15 फरवरी तक किया जाएगा। इस प्रतियोगिता में देश की शीर्ष आठ महिला और आठ पुरुष टीमें हिस्सा ले रही हैं। यही टीमें झारखंड के 34वें नेशनल गेम्स में भी जौहर दिखाएंगी। छत्तीसगढ़ बास्केटबाल संघ के सचिव और अंतरराष्ट्रीय कोच राजेश पटेल के मुताबिक राज्य की महिला और पुरुष दोनों टीमों की घोषणा 7 फरवरी को की जाएगी। दोनों टीमों में 16-16 खिलाड़ी संभावितों में चयनित किए गए हैं। इसके बाद 12-12 सदस्यीय टीम की अंतिम घोषणा की जाएगी। छत्तीसगढ़ की संभावित टीमों के खिलाड़ियों में महिला वर्ग में  अंजु लकड़ा, सीमा सिंह, भारती नेताम, एम पुष्पा, आकांक्षा सिंह, अरुणा किंडो, एल दीपा, शोषण तिर्की, निकिता गोदामकर, कविता (रेलवे बिलासपुर), कविता, जेलना जोस, रंजीता कौर, पुष्पा निषाद (बीएसपी), पूजा देशमुख (रायपुर), मुख्य प्रशिक्षक राजेश पटेल, सहायक प्रशिक्षक इकबाल अहमद खान, सरजीत चक्रवर्ती, एमवीवीजे सूर्यप्रकाश (बीएसपी) शामिल हैं। पुरुष वर्ग में  अजय प्रताप सिंह, अंकित पाणिग्रही, पवन तिवारी, समीर राय, के राजेश कुमार (बीएसपी), किरणपाल सिंह, लुमेंद्र साहू, मनोज सिंह, शिवेंद्र निषाद, श्रवण कुमार (रेलवे बिलासपुर), आशुतोष सिंह, जानक रानाथ कुमार, आनंद सिंह (दुर्ग), पुष्पांक (राजनांदगांव), मुख्य प्रशिक्षक आरएस गौर, सहायक प्रशिक्षक एस दुर्गेश राजु (बीएसपी), विपिन बिहारी सिंह (बिलासपुर) शामिल हैं। श्री पटेल के मुताबिक छत्तीसगढ़ की महिला टीम को दक्षिण रेलवे चेन्नई और दिल्ली की टीम से कड़ी टक्कर मिलेगी। इन दोनों टीमों के अलावा छत्तीसगढ़ को मिलाकर कुल तीन टीमें खिताब की प्रबल दावेदार  हैं। फेडरेशन कप की महिला टीमों में मेजबान छत्तीसगढ़ सहित दक्षिण रेलवे चेन्नई, दिल्ली, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल और पंजाब तथा पुरुष वर्ग में वेस्टर्न रेलवे मुंबई, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तराखंड, सर्विसेस, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश व मेजबान छत्तीसगढ़ शामिल है। पुरुष वर्ग में छत्तीसगढ़ की टीम से काफी कम उम्मीद है। इसकी एक वजह यह भी है कि राज्य की पुरुष टीम ने पहली बार फेडरेशन कप की पात्रता हासिल की है और उसका यह पहला अनुभव  होगा। पुरुष वर्ग में पश्चिम रेलवे मुवंबई, भारतीय आर्मी, इंडियन ओवरसीस बैंक तमिलनाडु और ओएनजीसी खिताब की प्रबल दावेदार हैं। श्री पटेल ने बताया कि छत्तीसगढ़ की महिला और पुरुष दोनों वर्ग की टीम को सुबह तीन घंटे और शाम को तीन घंटे सहित कुल  छह-छह घंटे नियमित अ•यास कराया जा रहा है। खिलाड़ियों की फिजीकल  फिटनेस पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। इस प्रतियोगिता में कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। महिला वर्ग में करीब 25 और पुरुष वर्ग में देशभर से लगभग 20 अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी खेल जौहर दिखाएंगे।
लग गए आधुनिक खेल उपकरण
25वीं फेडरेशन कप की मेजबानी का सबसे बड़ा फायदा यह  है कि छत्तीसगढ़ में इस खेल के आयोजन संबंधी आधुनिक उपकरण उपलब्ध हो गए हैं। इस प्रतियोगिता के लिए हाईड्रोलिक पोल इनडोर स्टेडियम में लगा दिया गया है। हाईड्रोलिक पोल का उपयोग इनडोर स्टेडिय में कभी भी किया जा सकता है। इसे कभी भी  हटाया जा सकता है और आयोजन के दौरान लगाया जा सकता  है। ऐसा आउटडोर में लगने वाले बास्केटबाल के पोल के साथ नहीं होता। वह स्थाई बनाया जाता है। इसी तरह इलेक्ट्रानिक स्कोर बोर्ड से भी काफी सुविधाएं उपलब्ध हो जाएंगी। इन उपकरणों के मिलने से राजधानी में बास्केटबाल का इंडिया कैंप व राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं का आयोजन किया जा सकेगा।

छत्तीसगढ़ को एक और पदक का नुकसान





कोच नहीं मिला तो रुस्तम सारंग भी 
हिस्सा  नहीं लेंगे नेशनल गेम्स में
 वर्ष 2007 में असम के 33वें नेशनल गेम्स में छत्तीसगढ़ को वेटलिफ्टिंग का पदक दिलाने वाले रुस्तम सारंग झारखंड नेशनल गेम्स में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करना लगभग असंभव नजर आ रहा है। रुस्तम इस समय बेंगलूर में हैं और उनका कहना है कि उनका कोच ही उन्हें नहीं दिया गया है तो वे नेशनल गेम्स जाकर क्या करेंगे। रुस्तम इस बात से भी खफा हैं कि झारकंड नेशनल गेम्स के लिए कैंप लगाया गया है या नहीं, उन्हें कोई जानकारी नहीं है। यही हालात रहे तो कोई खिलाड़ी कैसे पदक हासिल कर सकता है

रायपुर। झारखंड के 34वें नेशनल गेम्स में छत्तीसगढ़ का नेटबाल का पदक तय माना जा रहा था लेकिन फेडरेशन ने छत्तीसगढ़ को अपात्र घोषित कर दिया। इसके बाद राजधानी के अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर रुस्तम सारंग ने भी झारखंड नेशनल गेम्स में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है। छत्तीसगढ़ के खेल जगत के लिए यह दूसरा झटका है क्योंकि रुस्तम से सौ फीसदी पदक की उम्मीद है।
राजधानी के अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर रुस्तम सारंग ने 33वें नेशनल गेम्स असम में छत्तीसगढ़ के लिए व्यक्तिगत रूप से रजत पदक हासिल किया था। यह राज्य के लिए काफी अहम उपलब्धि थी। इसके बाद भी रुस्तम सारंग का लगातार  राज्य के लिए पदक हासिल करने का सिलसिला जारी है। हाल ही में रुस्तम ने कामनवेल्थ  गेम्स में भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम का भी प्रतिनिधित्व किया। रुस्तम मात्र एक अंक से चूक गए वरन उनका कांस्य  पदक तय था। इस दौरान उनकी कलाई में चोट भी लग गई थी। कलाई की चोट को देखते हुए रुस्तम ने पहले ही कह दिया था कि वे नेशनल गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। लेकिन इसके बाद थोड़ी बहुत संभावना भी बनी। रुस्तम झारखंड नेशनल गेम्स के लिए क्वालीफाई कर चुके हैं। इस समय बेंगलूर के इंडिया कैंप में हैं। रुस्तम ने नेशनल लुक से दूरभाष पर कहा कि नेशनल गेम्स में हिस्सा लेने के दो प्रमुख कारण हैं। उनमें पहला कारण कलाई में चोट है तो दूसरा कारण कोच का अभाव। वे चाहते हैं कि उनका कोच उनके पिता विक्रम अवार्डी बुधराम सारंग को बनाया जाए जिन्होंने उन्हें इन बुलंदियों तक पहुंचाया है। असम नेशनल गेम्स में भी उनके पिता ही उनके कोच थे और उनकी मेहनत की बदौलत ही वे छत्तीसगढ़ के लिए रजत  पदक हासिल कर पाए थे। रुस्तम ने यह भी कहा कि अफसोस इस बात  का है कि उन्हें इस बात की कोई सूचना भी नहीं दी गई है कि झारखंड नेशनल गेम्स के लिए छत्तीसगढ़ में कोई कैंप लगाया गया है और उन्हें कोचिंग करनी है। दूसरी तरफ रुस्तम सारंग के पिता बुधराम सारंग का कहना है कि वेटलिफ्टिंग का कोचिंग कैंप लगाया गया है या नहीं यह पता ही नहीं है। कैंप का कोई नामोनिशा नजर नहीं आ रहा है। हां, यह जरूर मालूम है कि रुस्तम सारंग झारखंड नेशनल गेम्स के लिए पात्र है और उससे सौ फीसदी पदक की उम्मीद भी है। इस मामले में नेशनल लुक ने छत्तीसगढ़ वेटलिफ्टिंग एसोसिएशन के सचिव सुकलाल जंघेल से संपर्क करने का काफी प्रयास किया लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
इनडोर में क्यों नहीं हुआ रुस्तम का सम्मान ?

छत्तीसगढ़ के खेल जगत में यह सवाल भी  उठने लगे हैं कि राजधानी के अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर रुस्तम सारंग को इनडोर स्टेडियम के उद्घाटन समारोह में ही भूला दिया गया। जबकि ऐसे लोगों का  सम्मान किया गया जिनकी कोई विशेष उपलब्धि खेलों के विकास के लिए नहीं है। रुस्तम सारंग राजधानी ही नहीं बल्कि राज्य के पहले ऐसे वेटलिफ्टर हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई दफा भारत का प्रतिनिधित्व करने के साथ-साथ पदक भी हासिल किया है। छत्तीसगढ़ के वे एकमात्र वेटलिफ्टर हैं जिन्होंने कामनवेल्थ  गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इसके अलावा एशियाड में भी रुस्तम ने देश का प्रतिनिधित्व किया। वे राज्य के श्रेष्ठ खेल पुरस्कार भी हासिल कर चुके हैं। इतनी उपलब्धियों के बावजूद रुसम का नाम तक इनडोर स्टेडियम के उद्घाटन समारोह में नहीं पुकारा गया। रुस्तम के पिता बुधराम सारंग का कहना है कि कम से कम परिवार के किसी सदस्य को ही बुला