10 फ़रवरी, 2011

जीत के साथ शुरू हुआ रोमांच





एक दिन छत्तीसगढ़ सभी खेलों में नबंर वन पर रहेगा : रमन सिंह

मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह की फेडरेशन कप बास्केटबाल प्रतियोगिता का आयोजन कराने की घोषणा ने गुरुवार को मूर्त रूप ले लिया। छत्तीसगढ़ की महिला टीम की विजयी शुरुआत के साथ 25वी फेडरेशन कप एमआईजी रिलायंस राष्ट्रीय बास्केटबाल प्रतियोगिता को रोमांच शुरू हो गया। मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने इस प्रतियोगिता का शुभारम्भ किया और कहा कि यह गौरवशाली क्षण है क्योंकि राजधानी के इनडोर स्टेडियम की यह पहली प्रतियोगिता है।
रायपुर। मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने इनडोर स्टेडियम में प्रतियोगिता का ध्वज फहराकर और उद्घाटन की घोषणा कर फेडरेशन कप बास्केटबाल का शुभारम्भ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि इनडोर स्टेडियम का काम काफी लंबे समय तक अटका हुआ था। हम भाग्यशाली हैं कि राष्ट्रीय स्पर्धा से इसका शुभारम्भ हो रहा है। डा. सिंह ने कहा कि इस प्रतियोगिता से खेलों के वातावरण का निर्माण होगा। छत्तीसगढ़ जिस तरह सभी क्षेत्रों में देश में नंबर वन पर है, उसी तरह आने वाले समय में सभी खेलों में नंबर वन पर रहेगा। इसके पूर्व समारोह की अध्यक्षता करते हुए विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि राज्य के लिए यह सुखद अवसर है कि इनडोर स्टेडियम के उद्घाटन के बाद इस प्रतियोगिता की शुरुआत  हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में असिमित खेल  प्रतिभाएं हैं जिन्हें आगे बढ़ाने की जरूरत है। मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के नेतृत्व में राज्य में लगातार खेलों का विकास हो रहा है। इसके पूर्व खेल संचालक जीपी सिंह ने स्वागत भाषण में कहा कि मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने इस प्रतियोगिता के आयोजन की घोषणा की थी। देशभर के खिलाड़ी खेल भावना का परिचय देते हुए बेहतर प्रदर्शन करेंगे। खेल सचिव सुब्रत साहू ने इस प्रतियोगिता की विस्तार से जानकारी दी और कहा कि छत्तीसगढ़ ने बास्केटबाल में राष्ट्रीय स्तर पर सबजूनियर, जूनियर और सीनियर वर्ग में 65 नेशनल मेडल हासिल किए हैं। समारोह के विशेष अतिथि सांसद रमेश बैस, छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव पी जॉय उम्मेन, राज्य टेनिस संघ के अध्यक्ष विक्रम सिंह सिसोदिया, भारतीय बास्केटबाल संघ के महासचिव हरीश शर्मा थे। छत्तीसगढ़ बास्केटबाल संघ के अध्यक्ष राजीव जैन ने आभार व्यक्त किया। इस दौरान छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के सचिव बशीर अहमद खान, वरिष्ठ उपाध्यक्ष गुरुचरण सिंह होरा, राज्य बास्केटबाल संघ के सचिव राजेश पटेल, राज्य वालीबाल संघ के सचिव मो. अकरम खान, राज्य नेटबाल संघ के सचिव संजय शर्मा, राज्य स्क्वैश संघ के सचिव डा. विष्णु श्रीवास्तव सहित कई खेल संघों के पदाधिकारी और खिलाड़ी मौजूद थे। समारोह के बाद मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने मेजबान छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु के बीच महिला वर्ग में खेले गए उद्घाटन मैच का लुत्फ भी उठाया।
अब रमन कहलाएंगे खेल बाबा
भारतीय बास्केटबाल संघ के महासचिव हरीश शर्मा ने प्रदेश में खेलों के विकास को लेकर मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि डा. रमन सिंह को गरीबों वर्ग के लोग चाउर वाले बाबा कहते हैं लेकिन वे खेलों वाले बाबा भी हैं। उन्होंने कहा कि डा. सिंह ने छत्तीसगढ़ बास्केटबाल संघ को खुले हाथ से सहयोग किया है जो काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि डा. सिंह को खेल प्रेमी खेलों वाले बाबा के नाम से जानें। झारखंड नेशनल गेम्स में जितना मेजबान झारखंड की सरकार नगद पुरस्कार दे रही है उतने ही नगद  पुरस्कार की घोषणा डा. सिंह ने की है। उन्होंने यह भी कहा कि इनडोर स्टेडियम काफी बेहतर बना है और इसे खेलों के लिए मुफ्त में देना चाहिए। इसके अलावा श्री शर्मा ने छत्तीसगढ़ के बास्केटबाल के खिलाड़ियों को सरकारी सेवा का मौका देने का भी अनुरोध किया।

मेजबान का विजय अभियान शुरू

तमिलनाडु को 82-52 हराकर जताए अपने मंसूबे
रायपुर। 25वीं फेडरेशन कप आईएमजी रिलायंस नेशनल बास्केटबाल प्रतियोगिता का उद्घाटन मैच मेजबान छत्तीसगढ़ की महिला टीम ने तमिलनाडु को हराकर जीत लिया। इस प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ की महिला टीम से पदक की उम्मीद की जा रही है। उद्घाटन मैच काफी रोमांचक और संघर्षपूर्ण रहा। छत्तीसगढ़ ने 82-52 अंक से जीत हासिल कर ली। छत्तीसगढ की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी एम पुष्पा ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए 30 अंक बनाए।
इस प्रतियोगिता  के लीग मुकाबले गुरुवार को सुबह 9 बजे से प्रारंभ हो गए। पहला मैच पुरुष वर्ग में केएसईबी केरल और इंडियन आर्मी के बीच खेला गया। यह मुकाबला खिताब की प्रबल दावेदार इंडियन आर्मी ने 75-49 अंकों से जीत लिया। इंडियन आर्मी के एन कुमार ने 18, जयराम ने 13 अंक बनाए। केरल के अजीत वीजी ने 14 और अजीत सुगुमन ने 8 अंक बनाए। दूसरे मैच में वेस्टर्न रेलवे ने हैदराबाद को एकतरफा 99-41 अंक से पराजित किया। इस मैच में वेस्टर्न रेलवे ने काफी बेहतर खेल का प्रदर्शन किया। वेस्टर्न रेलवे के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी विशेष  ने सर्वाधिक 17 अंक स्कोर किए। गगनदीप सिंग ने 17 अकं बनाए। हैदराबाद के सौम्या राजन ने 11 और एसटी मुरली कृष्णा ने 9 अंक बनाए। महिला वर्ग में पहला लीग मैच खिताब की दावेदार मानी जा रही दिल्ली और महाराष्ट्र के बीच खेला गया। यह मैच काफी   संघर्षपूर्ण रहा। दिल्ली की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी प्रशांति सिंग के शानदार खेल की बदौलत दिल्ली ने इस मैच में 74-58 अंक से जीत हासिल कर ली। प्रशांति ने सर्वाधिक 21 अंक और रश्मित ने 20 अंक बनाए। महाराष्ट्र की अनामिका ने 15 और मनीषा ने 14 अंक का योगदान दिया। महिला वर्ग में दूसरा मैच केरल और कर्नाटक के बीच खेला गया। केरल ने कर्नाटक को संघर्षपूर्ण मुकाबले में 57-50 अंक से पराजित किया। केरल की सोनिया जॉय ने सर्वाधिक 16 और लिजी मेथन ने 11 अंक बनाए। कर्नाटक की एलएफ सरिता ने 20 अंक और कृतिका ने 14 अंक का योगदान दिया।

प्रतिभएँ ग्रास रूट से खोजें





आगे बढ़ने के लिए विदेशी तकनीक अपनानी होगी : प्रशांति सिंग
रायपुर। चीन के ग्वांगझू में हाल ही में संपन्न हुए 23वें एशियाई खेलों में भारतीय महिला बास्केटबाल टीम का नेतृत्व करने वाली देश की स्टार बास्केटबाल खिलाड़ी प्रशांति सिंग ने ग्रास रूट से प्रतिभाएं खोजने और उन्हें खेल सुविधाएं मुहैया कराने पर ज्यादा जोर दिया है।
प्रशांति राजधानी में गुरुवार से शुरू हुई 25वें फेडरेशन कप बास्केटबाल प्रतियोगिता में दिल्ली की टीम का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। मूलत: वाराणसी की प्रशांति ने 2009 के वितयनाम की एशियन चैंपियनशिप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया था। भारतीय टीम ने इस प्रतियोगिता में रजत पदक हासिल किया था। प्रशांति ग्वांगझू के एशियाई खेलों में भारतीय महिला टीम की कप्तान थीं। टीम ने पांचवा स्थान हासिल किया था जबकि पुरुष टीम 13वें स्थान पर थीं। प्रशांति ने यहां पत्रकारों चर्चा करते हुए कहा कि बास्केटबाल में फारेन की टीमें तकनीक के आधार पर नंबर वन पर हैं। वहां ग्रास रूट तक के खिलाड़ियों को इनडोर स्टेडियम की सुविधाएं मिलती हैं। इसके अलावा हर खिलाड़ी वीडियो फुटेज देखकर अ•यास करता है और आगे बढ़ता है।  2003 में जूनियर इंडिया खेल चुकीं प्रशांति बताती हैं कि बास्कटेबाल में ट्रिपल एस की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और यह जरूरी भी है। ट्रिपल एस मतलब स्टेमिना, स्ट्रैंथ और स्पीड। वे बताती हैं कि भारतीय टीम स्टेमिना और स्पीड में तो ठीक है लेकिन स्ट्रैंथ में हम पीछे रह जाते हैं। प्रशांति के घर में कुल पांच बहनें हैं और इनमें चार बहनें इंडिया टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। एमटीएनएल में कार्यरत प्रशांति के मुताबिक भारतीय बास्केटबाल फेडरेशन ने जब से खिलाड़ियों को ग्रेडिंग सिस्टम में लाया है तब से खिलाड़ियों को काफी आर्थिक सहायता मिलती है। खिलाड़ियों के लिए यह खेल  महंगा है और माता-पिता भी संकोच करते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं रहा है। सी ग्रेड में ही जूनियर खिलाड़ियों को काफी सुविधाएं मिल रही हैं जिससे वे  आगे बढ़ रहे हैं। प्रशांति का कहना है कि कामनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स जैसे खेलों की मेजबानी करने के बाद खिलाड़ियों को एक्सपोज मिल रहा है। लोग बास्कटेबाल को भी गंभीरता से ले रहे हैं और घरों में भी खिलाड़ियों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह मीडिया का सपोर्ट भी है।

राजधानी को साई हास्टल जून में


श्री गोपालकृष्ण राजधानी में साईं हॉस्टल के लिए स्टेडियम का अवलोकन करते हुए.

श्री गोपालकृष्ण कल संचालक ज.प. सिंग से चर्चा करते हुए. 

100 बालकों से शुरू होगा हास्टल, मार्च में
 टेकओवर होगा आउटडोर स्टेडियम
रायपुर। राजधानी में प्रस्तावित भारतीय खेल प्राधिकरण का हास्टल इस साल जून में प्रारंभ होगा। इसके लिए आउटडोर स्टेडियम साई को मार्च माह में टेकओवर हो जाएगा। यह निर्णय भारतीय खेल प्राधिकरण के महानिदेशक गोपालकृष्ण के राजधानी दौरे के बाद लिया गया। उन्होंने राजनांदगांव का भी दौरा किया। राजनांदगांव के साई सेंटर को विस्तृत किया जा रहा है।
भारतीय खेल प्राधिकरण के महानिदेशक गोपालकृष्ण ने राजधानी में प्रस्तावित साई हास्टल के लिए आउटडोर स्टेडियम का निरीक्षण किया। इस दौरान निगम आयुक्त ओपी चौधरी और साई भोपाल के क्षेत्रीय निदेशक आरके नायडू ने उन्हें साई के साथ हुए एमओयू और खेल सुविधाओं की जानकारी दी। इस दौरान खेल संचालक जीपी सिंह भी मौजूद थे। डीजी साई गोपालकृष्ण ने यह वादा किया कि जून माह में साई हास्टल प्रारंभ कर दिया जाएगा। इसके पहले मार्च माह में स्टेडियम टेकओवर कर लिया जाएगा जिससे फर्नीचर व अन्य सुविधाएं पूरी की जा सके व शेष मरम्मत कार्य को भी अंजाम दिया जा सके। उन्होंने पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि साई हास्टल की शुरुआत 100 बालकों से की जाएगी जिन्हें चार खेलों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें वालीबाल, जूडो, वेटलिफ्टिंग और फुटबाल शामिल है। उन्होंने बताया कि राजनांदगांव में पहले से ही साई का सेंटर दिग्वजय स्टेडियम में चल रहा है। इस सेंटर को बड़ा करने के लिए नया सेंटर बनाने की योजना है। यहां भी चार खेलों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें आरचरी, हाकी, फुटबाल शामिल हैं। वहां नया स्टेडियम बना है जिसे साई को देने का अनुरोध किया गया है। इससे 100 खिलाड़ियों के लिए नया सेंटर  प्रारंभ कर सकते हैं। राज्य सरकार द्वारा मुहैया कराई गई 15 एकड़ जमीन पर खेल की अधोसंरचनाओं के निर्माण को लेकर उन्होंने बताया कि इसमें करीब तीन साल लग जाएंगे। लेकिन साई शीघ्र ही यहां खेल की बुनियादी सुविधाओं का विकास करेगा। जशपुर में हाकी के साई सेंटर को लेकर उन्होंने बताया कि खेल संचालक जीपी सिंह ने उन्हें बेहतर योजना दी है और इस पर विचार किया जा रहा है। डीजी साई गोपालकृष्ण ने कहा कि इसके बाद बस्तर के संबंध में निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि उत्तर बस्तर और दक्षिण बस्तर में भी साई सेंटर हो जिससे पूरा राज्य कवर हो जाएगा और आने वाले समय में यहां से खेल की बेहतर प्रतिभाएं सामने आएंगी।
इनडोर भी मिल जाए तो लड़कियों को भी देंगे प्रशिक्षण
डीजी साई गोपालकृष्ण ने इनडरो स्टेडियम का भी अवलोकन किया। उन्होंन कहा कि यदि इनडोर स्टेडियम भी साई को दे दिया जाए तो यहां 50 बालिकाओं के लिए हास्टल खोला जा सकता है। उन्होंने कहा कि इनडोर स्टेडियम का ज्यादातर उपयोग खेलों के लिए होना चाहिए। यदि सालभर स्पोर्ट्स की गतिविधियां यहां होती है तो खेलों के लिए इसे खुला रखना चाहिए।
स्थानीय प्रशिक्षकों को प्राथमिकता
भारतीय खेल प्राधिकरण के महानिदेशक गोपालकृष्ण ने स्थानीय एनआईएस कोच को प्राथमिकता देने पर जोर दिया है। उन्होंने बताया कि राजनांदगांव और रायपुर के साई सेंटर के लिए कुल आठ प्रशिक्षकों की व्यवस्था की जाएगी। रायपुर में जूडो व वेटलिफ्टिंग के कोच पहल्े से ही मौजूद हैं। वालीबाल के लिए एनआईएस कोच चंदर सिंह के नाम पर जोर दिया गया। उन्हें जब पत्रकारों ने बताया कि खेल विभाग में फुटबाल की एनआईएस कोच सरिता कुजूर पदस्थ हैं और उन्होंने कई राष्ट्रीय खिलाड़ी भी दिए हैं तो उन्होंने हर्ष व्यक्त किया और कहा कि यदि खेल विभाग कोच देना चाहे तो वे इसके लिए तैयार हैं। इस  दौरान खेल संचालक जीपी सिंह ने भी यह बात स्वीकार कर ली। डीजी साई ने एक सवाल के जवाब में बताया कि हर साल करीब 450 एनआईएस कोच बनते हैं लेकिन इनमें से 50 या 60 कोच ही नियुक्त हो पाते  हैं। कोई राज्य सरकार की सेवा में रहता है तो कोई निजी संस्थानों में सेवा देता है।