07 मार्च, 2011

फुटबाल बालाओं ने रचा इतिहास


  
छत्तीसगढ़ और देश का दूसरी बार करेंगे श्रीलंका में प्रतिनिधित्व
: राजधानी की 13 वर्षीय सुप्रिया कुकरेती और निकिता पन्ना ने छत्तीसगढ़ के खेल जगत में एक बार फिर से इतिहास रच दिया है। इन दोनों खिलाड़ियों ने पिछले साल ही श्रीलंका में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया था और बाकायदा टीम इंडिया ने स्वर्ण पदक हासिल किया था। एक बार फिर से ये खिलाड़ी श्रीलंका में अपना जौहर  दिखाएंगे। छत्तीसगढ़ के खेल इतिहास में ये दोनों फुटबाल की पहली महिला खिलाड़ी बन गई हैं जिन्होंने इतनी कम उम्र में इतनी बुलंदियां स्पर्श की हैं। इसके पीछे फुटबाल की एनआईएस कोच सरिता कुजूर और खेल विभाग का नियमित अभ्यास शिविर की महत्वपूर्ण भूमिका है।
रायपुर। सबजूनियर नेशनल  के अलावा स्कूल नेशनल और कई राष्ट्रीय  स्पर्धाओं में प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुकीं शंकर  नगर की सुप्रिया कुकरेती एमजीएम स्कूल की कक्षा सातवीं की छात्रा है। सुप्रिया भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व स्ट्राइकर के तौर पर करेंगी। निकिता पन्ना कचना की रहने वाली हैं और वे होलीक्रास कांपा स्कूल की कक्षा आठवीं की छात्रा  हैं। निकिता बतौर गोलकीपर टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व करेंगी। इन दोनों खिलाड़ियों की प्रशिक्षक खेल विभाग की फुटबाल की एनआईएस कोच सुश्री सरिता कुजूर हैं। सरिता बताती हैं कि निकिता पिछले दो साल से फुटबाल खेल रही है और वह पहले बास्केटबाल की खिलाड़ी थी। उसका बाडी लेंग्वेज और फिजिक काफी बेहतर था सो उसे मैंने फुटबाल के लिए चुना तो वह पूरी तरह फिट बैठी और उसने होलीक्रास कांपा स्कूल में सालभर चलने वाले खेल विभाग के नियमित अभ्यास शिविर में काफी अच्छा परिश्रम  किया। सुप्रिया को करीब सात साल हो गए हैं फुटबाल का गुर सीखते और इन सात सालों में उसने  कई बुलंदियों को स्पर्श किया है। दोनों खिलाड़ी मध्यम वर्गीय परिवार से हैं। सुश्री कुजूर ने बताया कि दो माह पहले भारतीय फुटबाल फेडरेशन ने इंडिया कैंप के प्रशिक्षण शिविर के संबंध में छत्तीसगढ़ बास्केटबाल संघ को जानकारी दी और संघ के माध्यम से दोनों खिलाड़ियों को लखनऊ के शिविर में भेजा गया। यह शिविर भारतीय  फुटबाल फेडरेशन ने साई सेंटर में लगाया था। दोनों खिलाड़ियों ने पिछले साल  श्रीलंका में भारतीय टीम का एशियन फुटबाल को चैंपियनशिप में प्रतिनिधित्व किया था और टीम ने स्वर्ण पदक हासिल किया था। इन्हें पुराना अनुभव काफी काम आया और शिविर में भी इन खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन किया जिससे इनका चयन टीम में कर लिया गया। सुप्रिया और निकिता के चयन पर छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह, खेल मंत्री लता उसेंडी, खेल सचिव सुब्रत साहू, खेल संचालक जीपी सिंह, वरिष्ठ खेल अधिकारी राजेंद्र डेकाटे सहित छत्तीसगढ़ फुटबाल संघ और रायपुर जिला फुटबाल संघ के कई पदाधिकारियों ने हर्ष व्यक्त किया है। सुप्रिया और निकिता को इन बुलंदियों तक पहुंचाने में रायपुर जिला फुटबाल संघ और छत्तीसगढ़ फुटबाल संघ के पदाधिकारियों का भी अहम रोल रहा है।
कोच और परिवार ने दी भरपूर सहायता
निकिता और सुप्रिया कुकरेती को यहां तक पहुंचाने के पीछे कोच सरिता कुजूर और इनके परिजनों की काफी अहम भूमिका रही है। मध्यमवर्गीय परिवार के इन खिलाड़ियों के लिए पासपोर्ट बनवाने और प्रशिक्षण शिविर के लिए आर्थिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में कोच व परिजनों ने काफी मदद की। कोच सुश्री सरिता कुजूर बताती हैं कि करीब दो साल पहले निकिता के पिता नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी फुटबाल खेले लेकिन जब उन्होंने निकिता की खेल प्रतिभा देखी तो वे भी सहयोग करने लगे। सुश्री कुजूर बताती हैं कि ऐसा किस्सा फुटबाल की लगभग हर बालिका के साथ है क्योंकि काफी कम परिजन लड़कियों को फुटबाल खेलने भेजते हैं। सरिता ने अब तक प्रदेश को करीब 40 राष्ट्रीय खिलाड़ी और दो अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिए हैं। वे कहती हैं कि उनका सालभर नियमित अभ्यास शिविर होलीक्रास कांपा स्कूल में लगा रहेगा और कोई भी परिजन अपने बच्चों को इस शिविर में फुटबाल के प्रशिक्षण के लिए भेज सकता है।

रायपुर के साई हास्टल में लड़कियां क्यों नहीं?

राजधानी में शीघ्र ही साई हास्टल  खुलने वाला है और यहां फुटबाल का भी ट्रेनिंग सेंटर  खोला जाएगा लेकिन सिर्फ लड़कों के लिए। यह सवाल उठने लगे हैं कि जब फुटबाल में लड़कियां ज्यादा बेहतर परिणाम दे रहीं हैं तो लड़कों के लिए ही क्यों ट्रेनिंग सेंटर खोला जा रहा है। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर होगा कि  लड़कियों के लिए भी कम से कम डे बोर्डिंग फुटबाल सेंटर खोलें जिससे उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिल सके। फुटबाल की एनआईएस कोच सरिता कुजूर कहती हैं कि उन्हें साई सेंटर में बतौर कोच के लिए काफी लोगों ने प्रयास करने जरूर कहा लेकिन वे लड़कों को सिखाएंगी तो उनकी लड़कियों का क्या होगा जो काफी अच्छा रिजल्ट दे रही हैं। उन्होंने कहा कि वे अपनी बच्चियों को अकेला नहीं छोड़ सकतीं, उन्हें काफी आगे बढ़ाने की जररूत है।
...वरन राज्य को मिलते सात अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी
महिला फुटबाल में राज्य को सात अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी मिल सकते थे लेकिन पासपोर्ट समय पर न बनने की वजह से कई खिलाड़ी भारतीय टीम का   अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में प्रतिनिधित्व करने से वंचित रह गए। कई खिलाड़ियों को आर्थिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है और ऐसे खिलाड़ियों के लिए पैसो ंकी जरूरतें पूरी करते-करते काफी समय लग जाता है। ऐसी स्थिति में पासपोर्ट बनाने में लेटलतीफी हो जाती है और खिलाड़ी आगे बढ़ने से वंचित रह जाते हैं।

पदक विजेताओं को लाखों के नगद पुरस्कार


नेशनल गेम्स के पदक विजेताओं को मिलेगा पुरस्कार
छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की 13 मार्च को होने वाली बैठक में झारखंड के 34वें राष्ट्रीय खेलों में पदक हसिल करने वाले खिलाड़ियों को नगद पुरस्कार दिया जाएगा। सीओए अध्यक्ष और मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने राष्ट्रीय खेलों में टीम इवेंट और व्यक्तिगत इवेंट में पदक हासिल करने वाले खिलाड़ियों के लिए अलग-अलग घोषणा की थी। टीम इवेंट में स्वर्ण पदक पर पांच लाख, रजत पर तीन लाख और कांस्य पदक पर दो लाख रुपए के नगद पुरस्कार की घोषणा की गई थी। व्यक्तिगत इवेंट में स्वर्ण पर एक लाख रुपए, रजत पर 75 हजार और कांस्य पदक पर 50 हजार रुपए के नगद पुरस्कार की घोेषणा हुई थी। टीम इवेंट में हैंडबाल को स्वर्ण पदक पर पांच लाख रुपए, बास्केटबाल को रजत पदक पर तीन लाख   रुपए और शूटिंग में टीम इवेंट के स्वर्ण पदक पर पांच लाख व व्यक्तिगत स्वर्ण पर एक लाख व कांस्य पदक पर 50 हजार रुपए और कराते में स्वर्ण पर एक  लाख रुपए का नगद पुरस्कार दिया जाएगा। कुश्ती में कांस्य पदक पर 50 हजार रुपए का नगद पुरस्कार दिया जाएगा। करीब 15 लाख  रुपए के नगद पुरस्कार पदक विजेताओं को दिए जाएंगे।
इन्हें मिलेगा पुरस्कार
1. अंबर सिंह भारद्वाज (कराते में प्लस 84 किलोग्राम वजन वर्ग का स्वर्ण पदक)
2. कैप्टन पीपी सिंग बाबा, पीएस बेदी, मैराज अहमद खान (स्कीट शूटिंग में दो स्वर्ण एक कांस्य पदक)
3. महिला बास्केटबाल टीम (रजत  पदक)
4. आनंद (सीआईएसएफ के इस खिलाड़ी ने कुश्ती में कांस्य पदक  हासिल किया।
5. महिला हैंडबाल टीम (स्वर्ण पदक)

सीओए पर सस्पेंस बरकरार

सभी की नजरें लगी हैं सचिव पद पर
रायपुर। छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ यानी सीओए की नई कार्यकारिणी को लेकर सस्पेंस बरकरार है। प्रदेश के खेल जगत की नजरें लगी  हैं सचिव पद पर। यह पद इसलिए  काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह सीओए के अध्यक्ष हैं। ऐसे में जिस राज्य का राजा किसी खेल संगठन का अध्यक्ष हो तो उस खेल संघ का सचिव पद गरिमामय हो जाता है। सचिव  पद के अलावा कार्यकारी अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष जैसे पदों पर भी चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है।
यदि राज्य निर्माण के पिछले एक दशक के इतिहास पर नजर डालें तो छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ शुरू से ही चर्चा का विषय बना रहा है। राज्य निर्माण के शुरुआती दौर में तो सीओए प्रदेश के दो दिग्गजों की प्रतिष्ठा का प्रश्न भी  बन गया था और इसकी गूंज दिल्ली तक उठी थी। हालांकि ये काफी पुरानी बातें हैं जिनका इस समय कोई औचित्य नहीं है। इस समय सभी को इंतजार है 13 मार्च को होने वाली छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की बैठक का जिसमें नई कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा। इस बैठक की घोषणा होने के बाद प्रदेश के खेल जगत ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक जगत  में भी चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है। खासतौर पर नगरीय प्रशासन मंत्री राजेश मूणत के राज्य वालीबाल संघ का अध्यक्ष बनने के बाद नए समीकरणों की बात कही जा रही है। खेल सूत्रों का कहना है कि श्री मूणत के एकाएक खेल जगत में कदम रखने के पीछे •ाविष्य में कुछ नई कहानी सामने आ सकती है। हालांकि श्री मूणत ने इस बात से इनकार जरूर किया है कि वालीबाल संघ का अध्यक्ष बनने के पीछे उनका मकसद छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ का पद हासिल करना है लेकिन उन्होंने यह कहकर सस्पेंस बरकरार रखा है कि जो भी जवाबदारी मिलेगी उसे वे पूरी तरह निभाएंगे। जाहिर है कि श्री मूणत यदि सचिव न भी बनें तो कार्यकारी अध्यक्ष जैसे पद उन्हें दिया जा सकता है। श्री मूणत के अध्यक्ष बनने के दूसरे दिन प्रदेश के खेल जगत में इस  बात की चर्चा जोरो पर थी कि यह 37वें राष्ट्रीय खेलों के की पूर्व तैयारी भी है जिससे आयोजन की पूरी कमान सरकार के पास रहे। वैसे बिना सरकार के सहयोग के कोई भी राज्य राष्ट्रीय खेलों का सफल आयोजन नहीं कर सकता। सीओए के मौजूदा सचिव बशीर अहमद खान का कहना है कि वे सीओए के सचिव पद के दावेदार नहीं हैं। खेल सूत्रों का कहना है कि न्यू सर्किट हाऊस में 13 मार्च को शाम 6.30 बजे से होने वाली सीओए की बैठक पूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ होगी और इस बैठक के एक दिन पूर्व पूरी कार्यकारिणी पर गहन मंथन किया जाएगा। इसके अलावा कई तकनीकी पहलुओं और नियम-कानून की भी गहनता से समीक्षा की जा रही है।
क्या बनेंगी उपसमितियां?
कार्यकारिणी में कई राज्य खेल संघों के पदाधिकारियों को प्रमुखता देने की बात सामने आ रही है। इसके अलावा 37वें राष्ट्रीय खेलों के आयोजन को देखते हुए सीओए की कई उपसमितियां भी बनाई जा सकती है जिससे मान्यता प्राप्त राज्य खेल संघों का कोई भी पदाधिकारी असंतुष्ट नहीं रहे। वह आयोजन समिति हो या तकनीकी समिति और या  फिर वित्त, प्रबंधन, स्वागत, भोजन, आवास या अन्य कोई समिति। माना जा रहा है कि प्रदेश के खेल जगत को सीओए के साथ एक सूत्र में पिरोने का यह काफी अच्छा रास्ता हो सकता है। हालांकि राज्य ओलंपिक संघ के जिन पदाधिकारियों ने पूर्व में इस्तीफा दिया था उन्हें और मौजूदा सचिव को भी सीओए की नई कार्यकारिणी में प्रमुखता देने की बात सामने आ रही है।
हो सकती है कुछ घोषणाएं...
छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की 13 मार्च को होने वाली बैठक काफी अहम मानी जा रही है। प्रदेश के खेल जगत के लिए कुछ घोषणाएं भी हो सकती हैं। सीओए अध्यक्ष और मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने अध्यक्ष बनने के बाद पहली बैठक में काफी महत्वपूर्ण घोषणाएं की थी जिन पर खासा अमल हुआ। डा. सिंह ने राज्य निर्माण के दस साल पूर्ण होने पर राज्य खेल उत्सव की घोषणा की थी। इस घोषणा पर अमल करते हुए प्रदेश में साढेÞ तीन करोड़ की लागत से खेलोत्सव का कई दिनों तक भव्य आयोजन किया गया। डा. सिंह ने बास्केटबाल के बडे टूर्नामेंट की घोषणा की थी और राजधानी में पिछले माह ही 25वीं फेडरेशन कप बास्केटबाल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इसके साथ ही उन्होंने खेल सुरक्षा निधि का भी गठन किया था जिसमें बाकायदा 50 लाख रुपए की  व्यवस्था की गई। यह डा. सिंह के ओलंपिक संघ का अध्यक्ष बनने की सौगात थी और प्रदेश के खेल जगत की उनसे और भी अपेक्षाएं बढ़ गई हैं।